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पाक में अविश्वास प्रस्ताव: अब अटकलबाजियों पर ही टिकी हैं इमरान खान की उम्मीदें

Mon, 21 Mar 2022 07:06 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 21 Mar 2022 07:06 PM IST
सार

पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने के बाद 14 दिन के अंदर सत्र बुलाना अनिवार्य है। 14 दिन की समयसीमा सोमवार को पूरी हुई। लेकिन ओआईसी का सम्मेलन नेशनल असेंबली के मुख्य सभागार में हो रहा है। इसके लिए संसद में एक प्रस्ताव पारित कराया गया था...

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meeting of the National Assembly in Pakistan has been scheduled March 25 demanded by opposition on voting no confidence motion
ओआईसी बैठक में इमरान खान - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

विपक्ष के हमलावर तेवरों के बीच पाकिस्तान में नेशनल असेंबली की बैठक 25 मार्च को बुलाई गई है। लेकिन उसी रोज इमरान खान सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला होगा, इसकी संभावना कम है। बल्कि उम्मीद यह है कि प्रस्ताव पर चर्चा 26 मार्च को शुरू होगी और उस पर मतदान 27 मार्च को होगा। इसके पहले विपक्ष 21 मार्च से सत्र बुलाने की मांग पर अड़ा हुआ था। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो यह कहने की हद तक चले गए कि अगर सोमवार से सत्र शुरू नहीं हुआ, तो विपक्षी सदस्य ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआईसी) के विदेश मंत्रियों की बैठक में खलल डालेंगे।

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पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने के बाद 14 दिन के अंदर सत्र बुलाना अनिवार्य है। 14 दिन की समयसीमा सोमवार को पूरी हुई। लेकिन ओआईसी का सम्मेलन नेशनल असेंबली के मुख्य सभागार में हो रहा है। इसके लिए संसद में एक प्रस्ताव पारित कराया गया था। उसकी ही आड़ लेकर स्पीकर असद कैसर ने चार दिन बाद नेशनल असेंबली की बैठक बुलाने की घोषणा की है।

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इमरान खान को बागियों से उम्मीद

पिछले हफ्ते सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के दो दर्जन सांसदों के पाला बदल लेने के तुरंत बाद विपक्ष ने 21 मार्च से सत्र बुलाने के लिए अपनी मुहिम तेज कर दी। तब से विपक्ष को लग रहा है कि बाजी उसके हाथ में है। जबकि प्रधानमंत्री इमरान खान की अब सारी उम्मीदें इस कयासों पर टिकी हैं कि पीटीआई के कुछ बागी सांसद फिर से उसके खेमे में लौट सकते हैं। इमरान खान ने कहा है कि अगर ये सांसद वापस आए, तो वे उन्हें ‘उसी तरह माफ कर देंगे, जैसे कोई पिता अपने भटकी संतान’ को क्षमा कर देता है। खान ने आरोप लगाया है कि विपक्ष ने सांसदों को धन से खरीदा है। पीटीआई के एक सांसद ने रविवार को खुलेआम आरोप लगाया कि विपक्ष की तरफ से उसे एक बड़ी रकम देने की पेशकश की गई है।

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इस बीच सियासी हलकों में चर्चा है कि सेना के हस्तक्षेप के बाद विपक्ष ने ओआईसी सम्मेलन में बाधा डालने संबंधी अपना बयान वापस लिया। लेकिन 21 मार्च से सत्र न बुलाने की विपक्षी दल कड़ी आलोचना कर रहे हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने रविवार को कहा कि इमरान खान अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इस कोशिश में उन्होंने स्पीकर से असंवैधानिक काम करवाया है।

जुल्फिकार अली भुट्टो ने आयोजित ओआईसी सम्मेलन

पर्यवेक्षकों के मुताबिक ओआईसी के सम्मेलन में बाधा डालने का बिलावल का बयान उलटा पड़ रहा था। उसकी देश में कड़ी आलोचना हो रही थी। इसे देखते हुए पीपीपी ने संबंधित बयान वापस लिया। उसके बाद बिलावल ने सफाई दी कि ओआईसी का पाकिस्तान में पहला सम्मेलन उनके दादा- तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने आयोजित कराया था।



विश्लेषकों का कहना है कि विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर जल्द से जल्द मतदान करवाना चाहता है, ताकि उसके पाले में आए सांसदों का मन कहीं फिर न बदल जाए। जबकि पीटीआई की रणनीति मतदान में अधिक से अधिक देर करने की है। इस बीच दोनों पक्षों ने 27 को इस्लामाबाद में अपनी-अपनी रैलियां आयोजित कर रखी हैं। इसलिए इस बात की पूरी संभावना है कि उस दिन इमरान खान सरकार का भविष्य तय हो जाएगा। फिलहाल पलड़ा उसके खिलाफ झुका दिख रहा है।

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