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पाक में स्कूल पर आतंकी हमले का समर्थन करने वाले मौलाना ने कब्जाई लाल मस्जिद

Sun, 09 Feb 2020 01:57 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 09 Feb 2020 01:57 AM IST
सार

  • 100 छात्राओं के साथ दो सप्ताह से जमाए है कब्जा
  • सरकार कर रही निकालने की कोशिश

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Maulana Abdul Aziz Occupy Red Mosque Supporting Terrorist Attack On School In Pakistan
मौलाना अब्दुल अजीज

विस्तार

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की चर्चित लाल मस्जिद पर मौलाना अब्दुल अजीज ने 100 महिला छात्राओं के साथ कब्जा करते हुए खुद को वहां का मौलवी घोषित कर दिया है। अजीज वही मौलाना है, जिसने 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर आतंकी हमला कर 132 बच्चों को मारने वाले आतंकियों का समर्थन किया था। 

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इस घटना के बाद सरकार ने अजीज को मस्जिद से हटा दिया था, लेकिन वह प्रशासनिक लापरवाही का लाभ उठाकर दो सप्ताह पहले फिर से अंदर घुस गया। इस्लामाबाद के जी -7 इलाके में जामिया हफसा की लगभग 100 छात्राएं भी गुरुवार रात एच -11 स्थित शाखा की सील इमारत में प्रवेश कर गईं। डान समाचार पत्र की शनिवार की रिपोर्ट में कहा गया कि इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने मस्जिद के चारों तरफ का इलाका सील कर दिया है।
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मौलाना अजीज ने पिछले जुमे को कुतबा (उपदेश) देते हुए सरकार के खिलाफ जमकर जहर उगला। माना जा रहा है कि मौलाना ने यह हरकत अधिकारियों की प्रतिक्रिया देखने के लिए की थी। फिलहाल कोई भी मस्जिद में प्रवेश नहीं कर पा रहा है और बातचीत के जरिये मसले को हल करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि मौलाना द्वारा खुद को संघीय मंत्री के समकक्ष आंकते हुए किसी वरिष्ठ अधिकारी को बातचीत के लिए आने पर जोर देने के चलते वार्ता फेल हो गई है। दोनों में कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं है और गतिरोध कायम है। 
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पहले भी भेजा जा चुके हैं जेल
लाल मस्जिद पर सरकार का मालिकाना हक है और वहां मौलवी की तैनाती सरकारी स्तर से होती है। मौलाना अजीज को 1990 में उस समय इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र (आईसीटी) का मौलवी बनाया गया था, जब उसके पिता और लाल मस्जिद के मौलवी मौलाना अब्दुल्ला की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 2004 में वजीरिस्तान में आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाने के लिए पाकिस्तानी सेना के खिलाफ फतवा जारी करने पर अजीज को पद से हटाकर जेल भेज दिया गया था। हालांकि 2009 में जेल से रिहा होने के बाद अजीज को दोबारा मौलवी बना दिया गया था, लेकिन 2014 में फिर हटा दिया गया था।

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