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जिराफ, तोते और बांज के पेड़ जैसी अनेक प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर

Thu, 11 Aug 2022 04:47 PM IST
शैलजा श्रीवास्तव यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: शैलजा श्रीवास्तव Updated Thu, 11 Aug 2022 04:47 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित एक स्वतंत्र, अंतर-सरकारी विज्ञान और नीति निकाय, IPBES की रिपोर्ट के अनुसार, पशु, पक्षियों और पेड़ों की लगभग दस लाख प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं।

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Many species like giraffes, parrots and oak trees are on the verge of extinction
जिराफ, तोते और बांज के पेड़ जैसी अनेक प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर - फोटो : Social Media

विस्तार

यह जानकर आश्चर्य होगा कि जिराफ, तोते और बांज के पेड़ और नागफनी व समुद्री शैवाल भी, विलुप्ति के खतरे वाली प्रजातियों की सूची में शामिल हैं। पृथ्वी पर कठिन परिस्थितियों में भी जीवित बचे रहने की क्षमता में, समुद्री शैवाल का नाम सबसे आगे आता है, और कुछ आधुनिक समुद्री शैवाल की किस्में लगभग 1.6 अरब साल पुरानी हैं। समुद्री शैवाल, समुद्री पारिस्थितिक तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समुद्री जीवों के लिए आवास और भोजन प्रदान करते हैं, जबकि बड़ी किस्में - जैसे केल्प-पानी के नीचे मछलियों के लिए, नर्सरी के रूप में कार्य करती हैं। हालांकि, मशीनी हस्तक्षेप, बढ़ते समुद्री तापमान और तटों पर बुनियादी ढांचों के निर्माण से, प्रजातियां खत्म होती जा रही हैं।
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दुनियाभर के पेड़ों को विभिन्न स्रोतों से खतरा है, जिनमें लॉगिंग, उद्योग और कृषि के लिए वनों की कटाई, शरीर गर्म रखने व खाना पकाने हेतु जलाने वाली लकड़ी एवं जंगलों में आग लगने जैसे जलवायु संबंधी खतरे शामिल हैं।
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प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (IUCN) की जोखिम वाली प्रजातियों की अनुमानित लाल सूची के अनुसार, दुनिया के 430 प्रकार के बांज (Oak) के पेड़ों में से 31 प्रतिशत के विलुप्त होने का खतरा है। इसके अलावा, कृषि के लिए वनों की कटाई और खाना पकाने के लिए ईंधन के कारण 41 प्रतिशत के संरक्षण को लेकर चिंता जताई गई है। जिराफ के मांस के लिए उसका शिकार किया जाता है। साथ ही, लकड़ी की निरंतर कटाई, और कृषि भूमि की बढ़ती मांग के कारण, उनके आवासों का क्षरण होता जा रहा है; अनुमान है कि जंगलों में अब केवल 600 पश्चिम अफ्रीकी जिराफ ही बचे हैं।
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जानवरों को एक प्रकार का समुद्री शैवाल, केल्प, खिलाने से, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है.

मानवता के लिए विनाशकारी परिणाम

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक मानव प्रकृति के साथ अधिक स्थाई तरीके से सामंजस्य स्थापित नहीं करेगा, तब तक वर्तमान जैव विविधता संकट बढ़ता जाएगा व मानवता के लिए इसके परिणाम विनाशकारी होंगे। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में पारिस्थितिक तंत्र विभाग की निदेशक, सूज़न गार्डनर कहती हैं, "IPBES रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि जंगली प्रजातियां, दुनियाभर में लाखों लोगों के लिए भोजन, आश्रय एवं आय का एक अनिवार्य स्रोत हैं।"

“सतत उपयोग तब होता है जब मानव कल्याण के कार्यों में, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखा जाए। इन संसाधनों का असतत तरीके से उपयोग करने से, हम न केवल इन प्रजातियों का नुकसान कर रहे हैं; बल्कि अपने स्वास्थ्य व कल्याण एवं आने वाली पीढ़ी का स्वास्थ्य भी जोखिम में डाल रहे हैं।” 

रियो नैगरो में, कुछ महिलाएँ वृक्षारोपण के लिये मिट्टी को तैयार करते हुए.


स्थानीय ज्ञान

इस रिपोर्ट में, स्थानीय लोगों का अपनी भूमि पर अधिकार प्राप्त करने को भी महत्व दिया गया है, क्योंकि वे बहुत पहले ही जंगली प्रजातियों के मूल्य को समझ चुके हैं और उनका स्थाई उपयोग करना जानते हैं। जैव विविधता का नुकसान कम करने के लिए जो आवश्यक बदलाव लाने हैं, उनके उदाहरणों में - लागत और लाभ का समान वितरण, सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन और प्रभावी शासन प्रणाली शामिल हैं। वर्तमान में, दुनिया भर की सरकारें, जैव विविधता को नुकसान पहुंचाने वाले कदमों जैसे कि, जीवाश्म ईंधन, कृषि और मत्स्य पालन जैसे उद्योगों का समर्थन करने में, हर साल 500 अरब डॉलर से अधिक खर्च करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस धनराशि को बेहतर कृषि, टिकाऊ खाद्य प्रणालियों और प्रकृति-सकारात्मक नवाचारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में मोड़ देना चाहिए।



संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन

जारी प्रयासों के बावजूद, दुनिया भर में जैव विविधता की क्षति हो रही है, और आगे भी इसी तरह काम चलते रहने से इस परिदृश्य के और खराब होने का अनुमान है।
2020 की रूपरेखा प्रक्रिया के बाद की कार्यप्रणाली में, जैविक विविधता कंवेनशन के तहत, अगले दशक के लिए प्रकृति के नए लक्ष्यों पर सहमत होने के लिए दुनिया भर की सरकारों को, संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन का निमंत्रण दिया गया है।
यह  फ्रेमवर्क, जैव विविधता के साथ सामाजिक संबंधों में परिवर्तन लाने के लिए व्यापक कार्रवाई लागू करने की एक महत्वाकांक्षी योजना निर्धारित करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि 2050 तक, प्रकृति के साथ सदभाव से रहने के साझा दृष्टिकोण का पालन हो।

नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।
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