अमेरिका में पंजाब के गैंग पर बड़ी कार्रवाई: 'मोस्ट वॉन्टेड' नीतीश कौशल को LA जेल भेजने का आदेश, क्या है आरोप?
अमेरिकी अदालत ने कथित पंजाब गैंग सदस्य नीतीश कौशल को मुकदमे तक हिरासत में रखने और लॉस एंजिलिस स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। एफबीआई का आरोप है कि वह जग्गू भगवांनपुरिया गैंग से जुड़ा है, जो पंजाब के गरीब और नाबालिग युवाओं को पैसे और विदेश भेजने का लालच देकर भर्ती करता था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने कथित पंजाब गैंग के सदस्य नीतीश कौशल को मुकदमे तक हिरासत में रखने और कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस (LA) भेजने का आदेश दिया है। अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में दाखिल नए दस्तावेजों में दावा किया है कि यह आपराधिक संगठन पंजाब के आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं, यहां तक कि नाबालिगों को भी पैसे और विदेश भेजने का लालच देकर अपने गिरोह में शामिल करता था। संगठन पर हत्या, अपहरण, रंगदारी, मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं।
अदालत ने हिरासत में रखने का आदेश क्यों दिया?
वर्मोंट जिले के अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज केविन जे. डॉयल ने बुधवार को सुनवाई के बाद नीतीश कौशल को मुकदमे तक हिरासत में रखने का आदेश दिया। अदालत ने माना कि कोई भी शर्त ऐसी नहीं है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कौशल समाज के लिए खतरा नहीं बनेगा या फिर अदालत में पेश होने से नहीं बचेगा। साथ ही अदालत ने उसे कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट भेजने का आदेश भी दिया, जहां उस पर रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गेनाइजेशंस (RICO) कानून के तहत आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाया जाएगा। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, कौशल ने अपने बचाव के लिए कोर्ट द्वारा वकील उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है और उसे स्थानांतरण तक संघीय हिरासत में रखा जाएगा।
एफबीआई ने नीतीश कौशल को कैसे गिरफ्तार किया?
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, कुछ दिन पहले ही एफबीआई ने भारतीय नागरिक नीतीश कौशल उर्फ 'लाला' को कनाडा सीमा के पास वर्मोंट के अलबर्ग इलाके से गिरफ्तार किया था। एफबीआई ने उसे अपनी 'मोस्ट वॉन्टेड' सूची में भी शामिल किया था।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में क्या दलील दी?
वर्मोंट की अदालत में दाखिल हिरासत याचिका में अभियोजकों ने कहा कि कौशल को रिहा नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उस पर लगा आरोप आजीवन कारावास तक की सजा वाला है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि वह समाज के लिए गंभीर खतरा होने के साथ-साथ फरार होने की भी पूरी संभावना रखता है। सरकार ने दावा किया कि उनके पास ऐसे मजबूत सबूत हैं, जो कौशल को एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से जोड़ते हैं। इस संगठन पर अपहरण, रंगदारी, ड्रग तस्करी और हथियारों से जुड़े अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं।
अमेरिका में अवैध प्रवेश और पुराने मामलों का क्या दावा किया गया?
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, कौशल का वर्मोंट से कोई संबंध नहीं है और वह वर्ष 2022 में एरिजोना के युमा बॉर्डर से अवैध रूप से अमेरिका में दाखिल हुआ था। अभियोजकों का यह भी दावा है कि वर्ष 2023 में उस पर हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश और हथियारों से जुड़े मामलों में आरोप लगे थे। बाद में उसे हथियार रखने के एक मामले में दोषी ठहराया गया और 60 दिन की जेल की सजा सुनाई गई। इसके अलावा वर्ष 2026 में उस पर एक मामूली ड्रग्स से जुड़े मामले का भी आरोप लगाया गया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इन आरोपों का मौजूदा मुकदमे में अभी कोई न्यायिक फैसला नहीं हुआ है।
एफबीआई की गिरफ्त से बचने के लिए उसने क्या किया था?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, कैलिफोर्निया में संघीय आरोपपत्र सार्वजनिक होने के बाद नीतीश कौशल फरार हो गया था। 7 जुलाई को उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की गई, लेकिन वह हाथ नहीं आया। सरकारी दस्तावेजों में कहा गया है कि उसने वह मोबाइल फोन भी छोड़ दिया था, जिसकी निगरानी अदालत की अनुमति से की जा रही थी। इसके बाद एफबीआई ने उसे 'मोस्ट वॉन्टेड' सूची में शामिल कर लिया।
कनाडा सीमा के पास कैसे पकड़ा गया?
अभियोजकों के अनुसार, 16 जुलाई को कौशल को कनाडा सीमा से करीब एक मील दूर गिरफ्तार किया गया। दावा है कि उसने अपनी गाड़ी अंतरराष्ट्रीय सीमा से कुछ ही दूरी पर छोड़ दी थी। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, कनाडा की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने सीमा पार पैदल चलते एक व्यक्ति को देखा था। बाद में नीतीश कौशल की पहचान फिर वर्मोंट में हुई। हालांकि, दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कनाडा में देखा गया व्यक्ति निश्चित रूप से वही था।
स्थानीय व्यक्ति की सूचना से कैसे खुला सुराग?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वर्मोंट के एक निवासी ने पुलिस को सूचना दी थी कि उसके सुरक्षा कैमरों में एक व्यक्ति वाहन के अंदर झांकते और फिर एक खलिहान (बार्न) में घुसते हुए दिखाई दिया। जब अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल अधिकारियों ने कौशल को रोका, तब उसने कथित तौर पर न्यू जर्सी का ड्राइविंग लाइसेंस दिखाया, जो किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर था।
एफबीआई ने उसकी पहचान कैसे साबित की?
सरकार का कहना है कि फिंगरप्रिंट जांच से उसकी असली पहचान की पुष्टि हुई। अभियोजकों के अनुसार, कौशल ने स्वीकार किया कि बरामद ड्राइविंग लाइसेंस उसका नहीं था। इसके अलावा जांच एजेंसियों ने उसके शरीर पर बने शेर के टैटू की तस्वीरों का मिलान पहले से मौजूद रिकॉर्ड से किया, जिसके आधार पर भी उसकी पहचान की पुष्टि की गई।
आरोपपत्र में किस गैंग का नाम सामने आया?
44 पन्नों के संघीय आरोपपत्र के अनुसार, नीतीश कौशल उन 15 आरोपियों में शामिल है, जिन पर जग्गू भगवांनपुरिया ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप से जुड़े होने का आरोप है। अभियोजकों के अनुसार, यह गिरोह भारत से संचालित होने वाला एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क है, जिसके सदस्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड समेत कई देशों में सक्रिय हैं। सरकार का दावा है कि संगठन के दुनिया भर में एक हजार से अधिक सदस्य और सहयोगी हैं, जिनमें से 100 से ज्यादा अमेरिका में मौजूद हैं।
पंजाब के युवाओं और नाबालिगों की भर्ती कैसे की जाती थी?
आरोपपत्र में सबसे गंभीर आरोप संगठन की भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगाया गया है। अभियोजकों के अनुसार, गिरोह पंजाब के गरीब और कमजोर युवाओं को निशाना बनाता था। इसमें नाबालिगों की भी भर्ती की जाती थी क्योंकि पकड़े जाने पर उन्हें अपेक्षाकृत कम सजा मिलती है। दस्तावेजों में दावा किया गया है कि भारत के कुछ इलाकों में संगठन की ओर से हत्या करने के बदले लोगों को केवल 20 हजार रुपये तक दिए जाते थे।
विदेश भेजने का लालच कैसे दिया जाता था?
अभियोजकों का आरोप है कि संगठन युवाओं को पैसा, पहचान, ताकत और "भारत से बाहर निकलने का मौका" देने का वादा करता था। आरोपपत्र के मुताबिक, ऐसे युवाओं को प्राथमिकता दी जाती थी जो छात्र वीजा या वर्क वीजा हासिल कर सकते थे। गिरोह के प्रति वफादारी दिखाने वाले सदस्यों को अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में सक्रिय होने के लिए भेजा जाता था।
गिरोह किन-किन अपराधों से कमाई करता था?
आरोपपत्र के अनुसार, संगठन सुपारी लेकर हत्या, अपहरण, ड्रग्स तस्करी, रंगदारी, हथियारों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के जरिए धन कमाता था। अभियोजकों का दावा है कि अमेरिका में इसका बड़ा ड्रग नेटवर्क सक्रिय था। साथ ही यह गिरोह लोगों और उनके भारत में रहने वाले परिजनों को धमकाकर रंगदारी भी वसूलता था।
पंजाब पुलिस के कुछ अधिकारियों पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
आरोपपत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि गिरोह के कुछ सदस्य पंजाब पुलिस के भ्रष्ट अधिकारियों के संपर्क में थे। अभियोजकों के अनुसार, संगठन अपने विरोधियों के खिलाफ झूठी सूचनाएं उपलब्ध कराता था, जिसके आधार पर कथित तौर पर फर्जी आपराधिक मामले दर्ज कराए जाते थे। बाद में इन्हीं मामलों का डर दिखाकर पीड़ितों से पैसे वसूले जाते थे। हालांकि, इन सभी आरोपों को अभी अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
ये भी पढ़ें: रुश्दी पर जानलेवा हमला मामला: मतर ने 2022 में चाकू से वार किया, अब आतंकवाद के आरोप; क्या US में उम्रकैद होगी?
अब आगे क्या होगा?
वर्मोंट की अदालत का यह आदेश अमेरिका में पंजाब से जुड़े कथित अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ चल रही सबसे बड़ी कानूनी कार्रवाइयों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब नीतीश कौशल को लॉस एंजिलिस भेजा जाएगा, जहां कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में ग्रैंड जूरी द्वारा दायर रैकेटियरिंग साजिश के मामले में उस पर मुकदमा चलेगा।