{"_id":"66dfba9cfba9566ea70c01dc","slug":"loyalty-remarks-from-us-ex-diplomat-condoleezza-rice-on-pm-modi-s-russia-trip-news-in-hindi-2024-09-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"US: 'हर पांच मिनट में भारत की परीक्षा नहीं ले सकते', PM मोदी की रूस यात्रा पर अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
US: 'हर पांच मिनट में भारत की परीक्षा नहीं ले सकते', PM मोदी की रूस यात्रा पर अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री
Tue, 10 Sep 2024 08:49 AM IST
काव्या मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पालो ऑल्टो (कैलिफोर्निया)
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पालो ऑल्टो (कैलिफोर्निया)
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Tue, 10 Sep 2024 08:49 AM IST
सार
स्टैनफोर्ड के हूवर इंस्टीट्यूट की निदेशक राइस ने रूसी सैन्य उपकरणों को कबाड़ बताया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की मॉस्को यात्रा से रक्षा के मामले में कुछ खास प्रगति नहीं होगी।
विज्ञापन
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने की पीएम मोदी की सराहना
- फोटो : ANI (फाइल फोटो)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले दो महीनों में यूक्रेन और रूस का दौरा कर चुके हैं। रूस की यात्रा के बाद अमेरिका के साथ लगातार संबंध बिगड़ने की बात उठ रही थी। हालांकि, अब अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री ने पीएम मोदी की रूस यात्रा को लेकर चिंताओं को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि वॉशिंगटन हर पांच मिनट में नई दिल्ली से वफादारी की परीक्षा नहीं ले सकता।
विज्ञापन
जो भी व्हाइट हाउस में आता...
पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस ने भारत अमेरिका रक्षा त्वरित पारिस्थितिक तंत्र (इंडस-एक्स) में भारत-अमेरिका संबंधों को स्थायी और द्विदलीय बताया। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि जो भी व्हाइट हाउस में आता है, वह इस रिश्ते के महत्व को जानता है। उन्होंने आगे कहा कि जैसा कि भारत कहता है कि देशों को रणनीतिक स्वायत्तता चाहिए और मुझे इससे कोई समस्या नहीं है। लेकिन यह हमारे (अमेरिका और भारत के) गहरे हित हैं, जो अंतत: एक मजबूत साझेदारी की ओर ले जाएंगे।
विज्ञापन
'रक्षा के मामले में नहीं होगा कुछ खास'
स्टैनफोर्ड के हूवर इंस्टीट्यूट की निदेशक राइस ने रूसी सैन्य उपकरणों को कबाड़ बताया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की मॉस्को यात्रा से रक्षा के मामले में कुछ खास प्रगति नहीं होगी। पूर्व विदेश मंत्री ने संकेत दिया कि अमेरिका मानता है कि भारत के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने में वह धीमा रहा है और उसने कुछ महत्वपूर्ण समय और अवसर गंवाए हैं।
विज्ञापन
भारत के लिए बन सकता है चुनौती: पूर्व विदेश मंत्री
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के बीच सीमा रहित संबंधों से अवगत हैं और यह भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
स्थिति शीत युद्ध से भी गंभीर
चीन को अमेरिका का प्रतिद्वंद्वी बताते हुए कोंडोलीजा राइस ने कहा कि स्थिति शीत युद्ध से भी गंभीर है। इसका कारण यह है कि मास्को सैन्य दृष्टि से तो एक महान देश है, लेकिन तकनीकी और आर्थिक दृष्टि से वह बौना है। जबकि चीन ने प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया है और वह वैश्विक नेटवर्क तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं में इतनी अच्छी तरह से एकीकृत हो गया है कि उससे निपटना कठिन है।
बता दें, जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन के तहत भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने में राइस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।