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ऐसे में अमेरिका कैसे बताएगा खुद को लोकतंत्र का पहरुआ? जी-7 की बैठक में जारी हुए जनमत सर्वेक्षण के नतीजे

Thu, 06 May 2021 02:29 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 06 May 2021 02:29 PM IST
सार

जनमत सर्वेक्षण के नतीजों को यहां जी-7 के विदेश मंत्रियों की चल रही बैठक के मौके पर जारी किया गया। सर्वे एलायंस ऑफ डेमोक्रेसीज फाउंडेशन ने कराया। इस गैर-सरकारी संस्था का मुख्यालय नॉर्वे की राजधानी कोपेनहेगेन में है।...

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latest survey revealed in G7 summit, America is seen as a greater threat to democracy than China and Russia
जी 7 शिखर सम्मेलन - फोटो : Agency

विस्तार

जो बाइडन प्रशासन अमेरिका को दुनिया भर में लोकतंत्र के संरक्षक के रूप में पेश करने की मुहिम में जुटा हुआ है। चीन और रूस के खिलाफ उसके अभियान में ये दावा एक खास औजार है। लेकिन बुधवार को जारी हुए एक जनमत सर्वेक्षण के नतीजों पर ध्यान दें, तो अमेरिका के लिए अपने इस दावे को लोगों के गले उतार पाना आसान नहीं होगा। 53 देशों में हुए ताजा सर्वेक्षण से सामने यह आया है कि आज दुनिया में अमेरिका को लोकतंत्र के लिए चीन और रूस से ज्यादा बड़े खतरे के रूप में देखा जाता है। बढ़ती आर्थिक गैर-बराबरी और अमेरिकी टेक कंपनियों के दुनिया पर दबदबे को लोगों ने लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा माना है।

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जनमत सर्वेक्षण के नतीजों को यहां जी-7 के विदेश मंत्रियों की चल रही बैठक के मौके पर जारी किया गया। सर्वे एलायंस ऑफ डेमोक्रेसीज फाउंडेशन ने कराया। इस गैर-सरकारी संस्था का मुख्यालय नॉर्वे की राजधानी कोपेनहेगेन में है। लोकतंत्र और मुक्त बाजार की नीतियों को आगे बढ़ाना ये संस्था अपना उद्देश्य बताती है। सर्वे में 53 देशों के पांच हजार से ज्यादा लोगों की राय ली गई।
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सर्वे के मुताबिक 2020 के अप्रैल महीने में लोकतंत्र और सीमित लोकतंत्र वाले दोनों प्रकार के देशों में लगभग 70 फीसदी लोग कोरोना महामारी पर अपने देश की सरकारों के काम से संतुष्ट थे। लेकिन एक साल बाद लोकतांत्रिक देशों में संतुष्ट लोगों की संख्या 51 फीसदी रह गई। यूरोप में ये संख्या सिर्फ 45 फीसदी है। जबकि एशिया में अपनी सरकारों के प्रति सकारात्मक नजरिया रखने वाले लोगों की संख्या 76 फीसदी हो गई है।    
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अमेरिका के लिए सबसे ज्यादा चिंता का पहलू यह होगा कि सर्वे में शामिल लगभग 44 फीसदी लोगों ने कहा कि अमेरिका उनके देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। चीन को सबसे बड़ा खतरा मानने वाले लोगों की संख्या 38 फीसदी और रूस को सबसे बड़ा खतरा समझने वालों की संख्या 28 फीसदी रही। विश्लेषकों ने कहा है कि जब दुनिया में जनमत की यह दिशा है, तब अमेरिका या जी-7 के लिए खुद को लोकतंत्र का पहरुआ बताने की चुनौती बेहद मुश्किल नजर आती है।

पिछले साल अमेरिका के विपक्ष और पक्ष में राय जताने वाले लोगों का अंतर छह फीसदी था। यानी छह फीसदी ज्यादा लोग उसे लोकतंत्र के लिए खतरा समझते थे। इस साल ये अंतर 14 फीसदी हो गया है। खासकर जर्मनी और चीन में ऐसा मानने वालों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। जर्मनी में अब 20 फीसदी अधिक लोग अमेरिका को लोकतंत्र के लिए खतरा समझते हैँ।

सर्वे से एक अच्छी बात यह सामने आई है कि दुनिया में लोकतंत्र से जुड़ाव महसूस करने वाले लोगों की संख्या का स्तर ऊंचा बना हुआ है। 81 फीसदी लोगों ने कहा कि उनकी निगाह में उनके देश का लोकतांत्रिक होना अहम है। लोकतंत्र के लिए पैदा हो रहे खतरों में सबसे बड़ा खतरा आर्थिक गैर-बराबरी को बताया गया। 64 फीसदी लोगों ने ऐसी राय जताई। 48 फीसदी लोगों ने कहा कि बड़ी टेक कंपनियां लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। टेक कंपनियों को सबसे बड़ा खतरा मानने वाले सबसे ज्यादा लोग अमेरिका में हैँ। वहां 62 फीसदी लोगों ने ऐसी राय जताई।


नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और स्वीडन वे देश हैं, जहां अपने लोकतंत्र की सेहत को लेकर आत्म विश्वास जताने वाले लोग सबसे ज्यादा हैं। चीन के 71 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके देश में पर्याप्त हद तक लोकतंत्र है। लेकिन रूस में सिर्फ 33 फीसदी लोग मानते हैं कि उनका देश लोकतांत्रिक है।  
 

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