पिछले साल एक फीसदी भारतीय अमीरों ने रोजाना कमाए 22 अरब
- 2018 में गरीबों की संपत्ति में महज तीन फीसदी का हुआ इजाफा
- 9 अमीरों की संपत्ति 50 प्रतिशत गरीब आबादी की संपत्ति के बराबर
- भारतीय अरबपतियों की संपत्ति हर दिन बढ़ी 2,200 करोड़ रुपये
- देश की कुल संपत्ति में 77.4 फीसद हिस्सेदार है देश की 10 फीसदी आबादी
- 2018 से 2022 के बीच भारत में रोजाना 70 नए करोड़पति बनेंगे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत के शीर्ष एक प्रतिशत अमीरों की संपत्ति में 2018 के दौरान 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, वित्तीय रूप से कमजोर लोगों की संपत्ति में महज तीन फीसदी का इजाफा हुआ। इस दौरान भारतीय अरबपतियों की संपत्ति में हर दिन 2,200 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। ऑक्सफैम की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के शीर्ष नौ अमीरों की संपत्ति 50 फीसदी फीसदी गरीब आबादी की संपत्ति के बराबर है।
दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक से पहले जारी इस रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया भर के अरबपतियों की संपत्ति में पिछले साल प्रतिदिन 12 प्रतिशत यानी 2.5 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के मुताबक, पिछले साल दुनिया के सबसे गरीब तबके की संपत्ति में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। गौरतलब है कि 13.6 करोड़ भारतीय 2004 से कर्ज में डूबे हैं। यह आबादी देश की सबसे गरीब आबादी का 10 फीसदी है।
वहीं, संपत्तियां कुछ ही लोगों तक सिमटती जा रही हैं। 26 लोगों के पास दुनिया के 3.8 अरब लोगों के बराबर संपत्ति है। ये दुनिया की आधी सबसे गरीब जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऑक्सफैम का अनुमान है कि 2018 से 2022 के बीच भारत में रोजाना 70 नए करोड़पति बनेंगे।
10 फीसदी आबादी के पास 77.4 फीसदी संपत्ति
भारत की 10 फीसदी आबादी के पास देश की कुल संपत्ति का 77.4 फीसदी हिस्सा है। वहीं, एक फीसदी लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का 51.53 फीसदी हिस्सा है।
2018 में देश में 18 नए अरबपति बने
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल भारत में 18 नए अरबपति बने। इसके साथ ही अरबपतियों की संख्या बढ़कर 119 हो गई है। उनकी संपत्ति पहली बार बढ़कर 400 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपये) के स्तर को पार कर गई है।
असमानता को बढ़ा रही हैं सरकारें
‘अध्ययन से पता चलता है कि सरकारें कैसे स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसी सार्वजनिक सेवाओं का कम वित्त पोषण करके असमानता को बढ़ा रही हैं। सरकारें कंपनियों और अमीरों पर कम टैक्स लगा रही हैं और टैक्स चोरी को रोकने में नाकाम रही हैं।’
- अमिताभ बेहर, सीईओ, ऑक्सफैम इंडिया
...तो बिगड़ जाएगी भारत की संरचना
‘बेहद अपमानजनक है कि मुट्ठी भर लोग भारत की संपत्ति में हिस्सेदारी बढ़ाते जा रहे हैं, जबकि गरीब रोटी और बच्चों की दवा तक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अगर यह असमानता बरकरार रही, तो देश की सामाजिक और लोकतांत्रिक संरचना बिगड़ जाएगी।’
- विनी, कार्यकारी निदेशक, ऑक्सफैम इंटरनेशनल