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पूर्वी चीन सागर में नमक के आख़िरी किसान

Sat, 26 Oct 2019 07:59 PM IST
Trainee Trainee बीबीसी
बीबीसी Published by: Trainee Trainee Updated Sat, 26 Oct 2019 07:59 PM IST
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Last Farmers in China of Salt
पूर्वी तीन का एक टापू - फोटो : bbc

पूर्वी चीन सागर में झेजियांग प्रांत के तट से दूर 18 हजार छोटे-बड़े द्वीप बिखरे हुए हैं। ज्यादातर द्वीप इतने छोटे हैं कि उन पर कोई नहीं रहता।उनमें से एक द्वीप अन्य के मुकाबले समुद्र तल से ज्यादा उठा हुआ है। वह है हुआओ द्वीप। चीन और चीन से बाहर करीब 13 वर्ग किलोमीटर में फैले हुआओ की पहचान यहां की कुदरती चट्टानों की वजह से है, जिन्हें अजूबा माना जाता है। यह पूर्वी चीन सागर का एकमात्र ऐसा द्वीप है, जहां नमक तैयार किया जाता है। कुछ साल पहले तक झेजियांग के कई द्वीपों पर नमक तैयार किया जाता था। अब नमक का उत्पादन करने वाले लोग और उनके फार्म सिर्फ हुआओ द्वीप पर बचे हैं।

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नमक का द्वीप

नमक करीब साढ़े छह करोड़ साल पुराने इस द्वीप की 'नकदी फसल' है। यहां के किसान पिछले 1,300 साल से समुद्री नमक की फार्मिंग कर रहे हैं और आज तक उनकी तकनीक में कोई बदलाव नहीं आया।भूरे रंग की चट्टानी पहाड़ियों से घिरे इस द्वीप में नमक के चौकोर खेत हैं। छोटे-बड़े आकार के आयताकार खेतों के बीच में रास्ते बने हुए हैं। कुछ रास्ते इतने चौड़े हैं कि उन पर मोटर गाड़ियां भी चल सकती हैं।नमक के खेतों के रंग अलग-अलग दिखते हैं। ऊपर से देखने पर कुछ खेत समुद्री पानी की तरह नीले रंग के दिखते हैं तो कुछ के रंग भूरे नजर आते हैं। रंग से उनके पानी में नमक के गाढ़ेपन का पता चलता है। गाढ़ापन बढ़ने पर पानी का रंग बदलने लगता है।

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हुआओ द्वीप पर नमक के खेत 400 हेक्टेयर में फैले हैं। इनको आप अपनी सुविधा से नमक के तालाब भी कह सकते हैं। नमक के ये मैदान या समुद्री पानी के वाष्पीकरण के लिए बने उथले तालाब सिर्फ ऐतिहासिक अवशेष नहीं हैं। ये चीन और बाहर के कई देशों की नमक की मांग पूरी करते हैं।

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नमक के 40 फार्मर

हुआओ द्वीप पर करीब 1,000 लोग रहते हैं। उनमें से सिर्फ 40 लोग ही नमक के खेतों में काम करते हैं।ये किसान खेतों में बने पूल में मोटर पंप के जरिये समुद्र का खारा पानी लाते हैं। सूरज की रोशनी पड़ने पर पानी भाप बनकर उड़ना शुरू हो जाता है।
इसके बाद किसानों की मेहनत शुरू होती है। वे तपती धूप में पानी को हिलोरते हैं और तलछट को निकालते रहते हैं ताकि खेतों में गंदगी न रहने पाए। पानी में नमक का गाढ़ापन बढ़ने पर वहां समुद्री नमक की परत बनने लगती है। किसान और नमक बनने का इंतज़ार करते हैं और फिर खेत में बचे हुए पानी को वापस समुद्र में बहा देते हैं।

वहां बचे हुए नमक को इकट्ठा किया जाता है। उसे छानकर साफ किया जाता है और फिर पानी के जहाजों से झेजियांग तट की ओर भेज दिया जाता है। चीन के बाहर लाखों लोग हुआओ द्वीप में तैयार किए गए नमक को चखते हैं।

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पर्यटन का केंद्र

चीन फिलहाल दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री नमक उत्पादक देश है। यह सालाना करीब छह करोड़ 60 लाख टन नमक का निर्यात करता है।स्थानीय निवासियों में से ज्यादातर लोग यहां के बढ़ते पर्यटन उद्योग में लगे हैं। यह द्वीप हुआओ स्टोन फॉरेस्ट का केंद्र है, जिसे चीन के लोग शिलिन (पत्थरों का जंगल) कहते हैं।

इस द्वीप पर ज्वालामुखीय चट्टानों की संरचनाएं बिखरी हैं। द्वीप के तट भी उन्हीं चट्टानों से बने हैं जो लाखों साल से समंदर के थपेड़े खा रहे हैं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं।

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