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श्रीलंका: आर्थिक संकट से हाहाकार जारी, सेंट्रल बैंक के पूर्व गर्वनर पर कसा शिकंजा, देश छोड़ने पर लगी रोक 

Mon, 18 Apr 2022 04:48 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Amit Mandal Updated Mon, 18 Apr 2022 04:48 PM IST
सार

कैबराल 2006 और 2015 के बीच अपने पहले कार्यकाल के दौरान सेंट्रल बैंक के गवर्नर थे। उनपर बेल आउट पैकेज को लेकर सख्ती बरतने का आरोप है।
 

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Lankan court extends travel ban on former governor of Central Bank of Sri Lanka
श्रीलंका संकट - फोटो : ANI

विस्तार

एक स्थानीय अदालत ने सोमवार को श्रीलंका के सेंट्रल बैंक के पूर्व गवर्नर अजित निवार्ड कैबराल पर यात्रा प्रतिबंध को बढ़ा दिया, क्योंकि बढ़ते आर्थिक संकट ने द्वीप राष्ट्र उथल-पुथल मचा दी है। 7 अप्रैल को कोलंबो मजिस्ट्रेट की अदालत ने कैबराल को बाहर यात्रा करने से रोक दिया।

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67 वर्षीय कैबराल पर यात्रा प्रतिबंध 
कोलंबो गजट न्यूजपोर्टल ने बताया कि अदालत ने 67 वर्षीय कैबराल पर यात्रा प्रतिबंध बढ़ा दिया है और उसे 2 मई को फिर से अदालत में पेश होने का भी आदेश दिया है। यह आदेश एक जनहित कार्यकर्ता कीर्ति तेनाकून द्वारा कैबराल के कथित कदाचारों को लेकर दायर एक मामले के संबंध में जारी किया गया। वह 2006 और 2015 के बीच अपने पहले कार्यकाल के दौरान सेंट्रल बैंक के गवर्नर थे।
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कैबराल ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बेल आउट के आह्वान का विरोध किया था। दूसरी बार नियुक्त होने के सात महीने से भी कम समय के बाद उन्होंने 3 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था। सितंबर 2021 में उन्होंने सेंट्रल बैंक के गवर्नर के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल के लिए डब्ल्यूडी लक्ष्मण की जगह ली थी। कैबराल ने ऐसे समय में पद छोड़ा जब श्रीलंका में मुद्रास्फीति अब तक के उच्चतम स्तर पर है।
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भयंकर आर्थिक संकट से जूझ रहा श्रीलंका 
1948 में इंग्लैंड से स्वतंत्रता हासिल करने के बाद से श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। आर्थिक संकट ने इस द्वीप राष्ट्र में एक राजनीतिक उथल-पुथल भी शुरू कर दी, जिसमें नागरिकों ने लंबे समय तक बिजली कटौती और ईंधन, भोजन और अन्य दैनिक जरूरतों की कमी को लेकर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया है। लोग लगातार राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे को हटाने की मांग कर रहे हैं।


लोग ईंधन और गैस की कतारों में लगे दिख रहे हैं जबकि पारंपरिक सिंहली और तमिल नव वर्ष के कारण सप्ताहांत के दौरान बिजली कटौती नहीं की गई थी, सोमवार को दोबारा पहले जैसे हालात बन गए। बिजली इकाई ने कहा कि सोमवार को साढ़े चार घंटे बिजली कटौती होगी। देश के लिए आईएमएफ बेलआउट पैकेज के खिलाफ अपने कठोर रुख के लिए कैबराल को व्यापक रूप से दोषी ठहराया जा रहा है। 

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