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कुवैत त्रासदी: हाथ पर बने टैटू से जिंदा जले बेटे के शव की पहचान; चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बचा केरल का शख्स
Thu, 13 Jun 2024 06:22 PM IST
मेघा झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा झा
Updated Thu, 13 Jun 2024 06:22 PM IST
सार
कुवैत में लगी एक आग से 49 लोगों की मौत हुई। इसमें एक पिता ने अपने 27 वर्षीय जिंदा जल चुके पुत्र की पहचान उसके हाथ पर बने टैटू देखकर की। वहीं इस अग्नि त्रासदी से केरल का एक व्यक्ति जिंदा बचकर निकला है, हालांकि इमारत से कूदने पर उसकी पसलियां टूट गई हैं।
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कुवैत में जले बेटे को टैटू देखकर पहचाना (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कुवैत में लगी आग से जले व्यक्तियों के शव की शिनाख्त की जा रही है। अब तक 49 लोगों की मौत की सूचना मिली है। एक 27 वर्षीय श्रीहरि को उनके पिता प्रदीप ने हाथ पर बने टैटू की मदद से पहचाना। प्रदीप ने बताया कि अस्पताल के शवगृह में रखे बेटे के शव की पहचान करने के लिए जब उन्हें बुलाया तो उन्होंने देखा कि उसका चेहरा पूरी तरह सूजा हुआ था और नाक पर कालिख लगी हुई थी। उन्होंने कहा, "मैं उसे पहचान नहीं पाया। फिर मैंने उन्हें बताया कि उसके हाथ पर टैटू है।
उसके आधार पर उसकी पहचान की गई।" प्रदीप ने बताया कि श्रीहरि पिछले सप्ताह 5 जून को केरल से कुवैत गया था। पिता और पुत्र दोनों एक ही कंपनी में काम करते थे। कुवैत जाने के लगभग एक सप्ताह बाद ही उसकी मौत की खबर उसके गांव में पहुंच गई। वे केरल लौटने की कोशिश कर रहे हैं, और कल तक उनके शव को वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।"
वहीं अग्निकांड में एक साहस और जीवित रहने की कहानी सामने आई है। जो केरल के लिए राहत की किरण लेकर आई है। उत्तरी केरल के त्रिक्कारिपुर के निवासी नलिनाक्षन ने खुद को इमारत की तीसरी मंजिल के अपार्टमेंट में फंसा था। अपने को बचाने के लिए वह पास के पानी के टैंक पर कूद गया। हालांकि छलांग लगाने से उसकी पसलियां टूट गईं और काफी गंभीर चोटें आईं। लेकिन उसने अपने आप को उस मुश्किल से बचाने का हर संभव प्रयास किया। पास में रहने वाले रिश्तेदारों ने उसे ढूंढ़ा और चिकित्सा देखभाल के लिए कुवैत के एक अस्पताल में ले गए।
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नलिनाक्षन के चाचा बालकृष्णन ने बताया, "हमें बुधवार को सुबह 11 बजे के आसपास यह चौंकाने वाली खबर मिली। वह पानी की टंकी पर कूद गया था, लेकिन हिल नहीं पा रहा था। हमारे रिश्तेदारों ने उसे वहां पाया और तुरंत अस्पताल ले गए।" उन्होंने कहा कि परिवार नलिनाक्षन से फोन पर ज्यादा बात नहीं कर पाया, क्योंकि उसके मुंह से खून बह रहा था। उन्होंने बताया कि उसकी सर्जरी की जाएगी और उसका इलाज वहां एक अच्छे अस्पताल में चल रहा है।"
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उसके आधार पर उसकी पहचान की गई।" प्रदीप ने बताया कि श्रीहरि पिछले सप्ताह 5 जून को केरल से कुवैत गया था। पिता और पुत्र दोनों एक ही कंपनी में काम करते थे। कुवैत जाने के लगभग एक सप्ताह बाद ही उसकी मौत की खबर उसके गांव में पहुंच गई। वे केरल लौटने की कोशिश कर रहे हैं, और कल तक उनके शव को वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।"
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वहीं अग्निकांड में एक साहस और जीवित रहने की कहानी सामने आई है। जो केरल के लिए राहत की किरण लेकर आई है। उत्तरी केरल के त्रिक्कारिपुर के निवासी नलिनाक्षन ने खुद को इमारत की तीसरी मंजिल के अपार्टमेंट में फंसा था। अपने को बचाने के लिए वह पास के पानी के टैंक पर कूद गया। हालांकि छलांग लगाने से उसकी पसलियां टूट गईं और काफी गंभीर चोटें आईं। लेकिन उसने अपने आप को उस मुश्किल से बचाने का हर संभव प्रयास किया। पास में रहने वाले रिश्तेदारों ने उसे ढूंढ़ा और चिकित्सा देखभाल के लिए कुवैत के एक अस्पताल में ले गए।
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नलिनाक्षन के चाचा बालकृष्णन ने बताया, "हमें बुधवार को सुबह 11 बजे के आसपास यह चौंकाने वाली खबर मिली। वह पानी की टंकी पर कूद गया था, लेकिन हिल नहीं पा रहा था। हमारे रिश्तेदारों ने उसे वहां पाया और तुरंत अस्पताल ले गए।" उन्होंने कहा कि परिवार नलिनाक्षन से फोन पर ज्यादा बात नहीं कर पाया, क्योंकि उसके मुंह से खून बह रहा था। उन्होंने बताया कि उसकी सर्जरी की जाएगी और उसका इलाज वहां एक अच्छे अस्पताल में चल रहा है।"