फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Kuwait bill on foreign workers may force 8 lakh Indians to leave, Draft of bill passed in National Assembly

कुवैत: अप्रवासी कोटा विधेयक के मसौदे को मिली मंजूरी, 8 लाख भारतीयों पर मंडराया देश छोड़ने का खतरा

Mon, 06 Jul 2020 09:22 AM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कुवैत सिटी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कुवैत सिटी Published by: अनवर अंसारी Updated Mon, 06 Jul 2020 09:22 AM IST
विज्ञापन
Kuwait bill on foreign workers may force 8 lakh Indians to leave, Draft of bill passed in National Assembly
कुवैत में भारतीय - फोटो : social media

कुवैत में विदेशी कामगारों को लेकर अप्रवासी कोटा विधेयक लाया जा रहा है, जिससे इस खाड़ी देश में विदेशी कामगारों की संख्या में कटौती की जाएगी। इस विधेयक के मसौदे को कुवैत की नेशनल असेंबली की कानूनी और विधायी समिति ने संवैधानिक भी करार दिया है। 

विज्ञापन


हालांकि, इस विधेयक को अभी भी एक अन्य समिति द्वारा वीटो किया जाना है, लेकिन फिर भी भारत की इससे चिंताएं बढ़ गई हैं। दरअसल, कुवैत में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। ऐसे में यदि यह विधेयक पास हो जाता है, तो करीब 7 से 8 लाख भारतीय कामगारों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ेगी। 
विज्ञापन



कुवैत में प्रवासियों की सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। इस बिल में कुवैत की 48 लाख आबादी में भारतीयों की तादाद को 15 फीसदी करने का प्रस्ताव है। वर्तमान में कुवैत में भारतीयों की आबादी 14.5 लाख के करीब है और 15 फीसदी कोटा का मतलब होगा कि यहां केवल 6.5 से 7 लाख भारतीय ही काम कर पाएंगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों ने फर्जी लाइसेंस की बात सामने आने पर पाक पायलटों की जांच शुरू की

ऐसा नहीं है कि यह विधेयक सिर्फ भारतीयों के लिए ही है, इसमें अन्य विदेशी नागरिकों को भी शामिल किया गया है। विधेयक में मिस्र के लोगों की आबादी को भी कुल आबादी का 10 फीसदी करने का प्रावधान है। कुवैत में प्रवासी कामगारों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या मिस्र के लोगों की है। 

कुवैत भारत के लिए विदेशों से भेजे जाने वाले धन का एक शीर्ष स्रोत भी है। 2018 में, कुवैत से भारत में 4.8 बिलियन डॉलर धन भेजा गया। 

दरअसल, कुवैत द्वारा इस विधेयक को इसलिए लाया जा रहा है, क्योंकि कुवैत के नागरिक अपने ही देश में अल्पसंख्यक हो गए हैं। साथ ही कुवैत विदेशी कामगारों पर अपनी निर्भरता भी कम करना चाहता है। कुवैत की आबादी करीब 43 लाख है, जिसमें अकेले प्रवासियों की संख्या ही 30 लाख है। 


यह भी पढ़ें: H1-B वीजा पर रोक: सुंदर पिचाई ने जताई आपत्ति, क्या पड़ेगा भारतीयों पर असर?

इस विधेयक को इस रूप में देखा जा रहा है कि कुवैत अब प्रवासी बहुसंख्यक देश नहीं रहना चाहता है। इसके अलावा, कोविड-19 और तेल की घटती कीमतें भी कुछ कारण हैं, जिनकी वजह से कुवैत को यह विधेयक लाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 

एक रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत के प्रधानमंत्री शेख सबाह अल खालिद अल सबाह ने हाल ही में देश में रहने वाले प्रवासियों की संख्या को कुल आबादी के 70 फीसदी से 30 फीसदी तक कम करने का प्रस्ताव दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed