अमेरिका की न्यू ग्रीन डील, जिससे एक महीने में ही स्टार बन गई डेमोक्रेटिक पार्टी की अलेक्जेंड्रिया
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अमेरिका में इस वक्त न्यू ग्रीन डील की चर्चा हो रही है। वो डील जिसका नाम लेते ही अलेक्जेंड्रिया ओकासियो कोर्टेज की बात होने लगती है। 29 वर्षीय अलेक्जेंड्रिया को एओसी भी कहा जाता है। वह डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं और हाल ही में डी-न्यूयॉर्क 14 वां डिस्ट्रिक्ट से प्रतिनिधि बनी हैं। इस डील पर दिए गए भाषण के बाद से ट्विटर पर एओसी के फॉलोअर्स की संख्या कई गुना बढ़ गई है।
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अमेरिका में इस वक्त न्यू ग्रीन डील की चर्चा हो रही है। वो डील जिसका नाम लेते ही अलेक्जेंड्रिया ओकासियो कोर्टेज की बात होने लगती है। 29 वर्षीय अलेक्जेंड्रिया को एओसी भी कहा जाता है। वह डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं और हाल ही में डी-न्यूयॉर्क 14 वां डिस्ट्रिक्ट से प्रतिनिधि बनी हैं। इस डील पर दिए गए भाषण के बाद से ट्विटर पर एओसी के फॉलोअर्स की संख्या कई गुना बढ़ गई है।
अमेरिकी सीनेट में मंगलवार को इस डील को विरोध का सामना करना पड़ा। सीनेटरों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ 57-0 से मतदान किया। इस प्रस्ताव का विरोध रिपब्लिकन पार्टी के सांसद तो कर ही रहें हैं, साथ ही डेमोक्रेटिक पार्टी में भी बहुत से सांसद इसके विरोध में हैं।
इसी प्रस्ताव की को-सपॉन्सर हैं एओसी। जब संसद में इस प्रस्ताव का विरोध किया जा रहा था, तब एओसी ही इसकी आवश्कता के बारे में बोल रही थीं। वह सभी सांसदों का ध्यान जलवायु परिवर्तन की ओर खींचने की कोशिश कर रही थीं। उनके मुताबिक इस प्रस्ताव को पास करना बेहद जरूरी है।
हालांकि रिपब्लिकन पार्टी के भी कुछ नेताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन उनका कहना है कि बेशक प्रस्ताव में कोई बुराई नहीं है लेकिन इसके लागू होने से घरेलू उद्योग पूरी तरह खत्म हो जाएगा। रिपब्लिकन पार्टी के नाताओं ने डेमोक्रेट्स की ये कहते हुए आलोचना की है कि जलवायु परिवर्तन कोई मजाक नहीं है।
वहीं इस प्रस्ताव के प्रमुख स्पॉन्सर एड मार्के का कहना है कि जलवायु परिवर्तन का मजाक उड़ाना शर्मनाक है। एओसी कहती हैं कि इस बिल पर बहस में देरी से समुदायों को नुकसान हो रहा है, लोगों का जीवन खतरे में है। इस प्रस्ताव पर दिए गए अपने भाषणों से वह डेमेक्रोटिक पार्टी का स्टार चेहरा बन चुकी हैं।
क्या है इतिहास?
जब 1929 में अमेरिका में आर्थिक मंदी आई थी, उस वक्त यहां रिपब्लिकन पार्टी की सरकार थी और हर्बर्ट हूवर राष्ट्रपति थे। उनकी गलत नीतियों के चलते शेयर्स के दाम एकदम गिर गए। लोगों की नौकरियां चली गईं।
1928 के राष्ट्रपति चुनाव में हर्बर्ट ने अमेरिका की जनता से वादा किया था कि वह देश की अर्थव्यवस्था में प्रगति लाएंगे, देश में हर कोई अमीर होगा। लेकिन परिणाम इसके बिलकुल उलट निकले।
अमेरिका में आर्थिक मंदी की ये स्थिति दूसरा विश्व युद्ध समाप्त होने तक रही। हर्बर्ट की नीतियों के फेल होने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट राष्ट्रपति बने। वह चार बार (1933-1945) इस पद के लिए चुने गए। इस आर्थिक मंदी से निपटने के लिए वह न्यू डील लेकर आए थे।
1930 के दशक में वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान, उन्होंने रोजगार बढ़ाने, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और आर्थिक सुधार के लिए कई बैंकों और एजेंसियों से समझौता किया। उन्होंने कई कार्यक्रमों की शुरूआत भी की थी।
रूजवेल्ट की न्यू डील योजना से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार होने लगे। औद्योगिक एवं कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई, निम्नतम मजदूरी दर और अधिकतम काम के घंटे नियत किए गए। इस प्रकार धीरे-धीरे आर्थिक मंदी से उबरने की ओर अमेरिका अग्रसर हुआ। उनकी ये डील सफल साबित हुई थी।
इस बार क्या नया है डील में?
ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को खत्म करना
डील के आलोचकों का कहना है कि स्वच्छ, नवीकरणीय और शून्य उत्सर्जन ऊर्जा स्त्रोंतो से अमेरिका में 100 फीसदी बिजली की मांग को पूरा कर पाना असंभव है।
नई नौकरियां आएंगी
यातायात और बुनियादी ढांचा
स्वच्छ हवा, अच्छा पानी और स्वास्थ्य खाना
प्रदूषण
इन पांच उद्देश्यों के अलावा डील में न्याय और समानता को बढ़ावा देने, इतिहास में जिन लोगों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है, उस उत्पीड़न को समाप्त करने, रंगभेद को खत्म करने, विस्थापित समुदाय, गैरऔद्योगिक समुदाय, गरीब और कम आय वाले कर्मी, बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं, बेघरों और दिव्यांग लोगों के विकास की बात भी कही गई है।