कश्मीरी पंडितों ने अमेरिकी सांसदों से की घाटी के हालात पर बातचीत
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अमेरिका में रह रहे कश्मीरी पंडितों ने अमेरिकी सांसदों को घाटी के हालात और कुछ दशकों से हो रहे उनके अधिकारों के उल्लंघन से अवगत कराया। दक्षिण एशिया में मानवाधिकारों की स्थिति पर अगले सप्ताह अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में चर्चा होनी है। इससे ठीक पहले कश्मीरी पंडितों ने अमेरिकी सांसदों से मुलाकात की और कश्मीर पर जानकारी दी।
इंडो अमेरिकन कम्यूनिटी फेडरेशन ने कश्मीरी ओवरसीज एसोसिएशन (केओए) और यूएस-इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (यूएसआईएनपीएसी) के साथ ‘कश्मीर आगे का रास्ता’ कार्यक्रम का आयोजन किया। विदेश मामलों की सदन की समिति की एशिया प्रशांत और अप्रसार उपसमिति 22 अक्तूबर को कश्मीर और दक्षिण एशिया के अन्य हिस्सों में मानवाधिकार पर चर्चा करने वाली है। केओए के अध्यक्ष शकुन मलिक ने कश्मीरी पंडितों की दशा और अनुच्छेद 370 व 35 ए की वजह से समाज के कमजोर तबकों, अल्पसंख्यकों, कश्मीरी महिलाओं के साथ हुए भेदभाव के बारे में चर्चा की।
कार्यक्रम की मेजबानी करने वाले कैलिफोर्निया के जीवन जुत्शी ने कहा कि कश्मीर के लिए आगे का रास्ता यह सुनिश्चित करना है कि कश्मीर में सभी धर्म के लोग शांति के साथ रह सकें। आयोजन के दौरान एक वीडियो भी दिखाया गया, जिसमें कश्मीर में धीरे धीरे सामान्य होते हालात के बारे में बताया गया। भारत ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करते हुए इसे दो केंद्र शासित राज्यों में बांटने का निर्णय लिया था।
भारत-अमेरिका में लोकतंत्र मजबूत करने पर जोर
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना, माइक थॉम्पसन, जो लोफग्रेन, मार्क डेसूलनीर और डोरिस मतसुई के साथ ही सदन की विदेश संबंधित समिति के अध्यक्ष एलिअट इंगेल कैपिटोल हिल में कांग्रेस की सुनवाई में उपस्थित हुए। महिला सांसद एन्ना इशू ने अपने संबोधन में जोर दिया कि दुनिया के दो बड़े लोकतांत्रिक देशों भारत और अमेरिका को लोकतंत्र को मजबूत करने की जरूरत है।