भारतीय मूल के काश पटले औपचारिक रूप से अमेरिका के संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के नए निदेशक बन गए हैं। अमेरिकी सीनेट ने काश पटेल को नए निदेशक के रूप में मंजूरी दे दी। पटेल (44) एफबीआई का प्रमुख बनने वाले पहले भारतीय अमेरिकी हैं। पटेल की नियुक्ति को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, डेमोक्रेट्स को उनकी योग्यताओं पर संदेह है और डर है कि वह पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेशों पर काम करेंगे और उनके विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।हालांकि नियुक्ति के बाद काश पटेल की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।
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Kash Patel FBI Director: सीनेट की मुहर, ट्रंप के वफादार काश पटेल एफबीआई निदेशक बने; डेमोक्रेट्स का संशय बेअसर
Fri, 21 Feb 2025 01:50 AM IST
शुभम कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 21 Feb 2025 01:50 AM IST
सार
Kash Patel FBI Director: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वफादार कहे जाने वाले भारतीय मूल के नागरिक काश पटेल को सीनेट ने एफबीआई का निदेशक नियुक्त कर दिया है। हालांकि, डेमोक्रेट्स को डर है कि वह पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेशों पर काम करेंगे। आईए पटेल के जीवन के कुछ पहलुओं पर एक नजर डालते हैं।
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काश पटेल
- फोटो : अमर उजाला
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काश पटेल और डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : अमर उजाला
पटेल के बयान से डेमोक्रेट्स में चिंता
नियुक्ति के बाद काश पटेल ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा एफबीआई में बड़े बदलाव की योजना की बात की है, जिसमें उन्होंने वाशिंगटन में मुख्यालय में पदों की संख्या कम करने और एजेंसी के पारंपरिक अपराध-निरोधक कार्यों पर जोर देने की बात की है। लेकिन उनके कुछ बयानों ने डेमोक्रेट्स के बीच चिंता पैदा की है। उन्होंने कहा था कि वह ट्रंप विरोधी "षड्यंत्रकारियों" के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। यह बयान डेमोक्रेट्स के लिए चिंता का विषय बना क्योंकि उन्हें लगता है कि पटेल संघीय सरकार और मीडिया में विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए काम करेंगे।
सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी ने किया समर्थन
सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी ने एफबीआई चीफ के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पसंदीदा काश पटेल का समर्थन किया। सीनेट ने नामांकन को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी लाइन के आधार मतदान किया। इसके बाद उनके नाम पर 30 घंटे तक बहस हुई और फिर सीनेट से काश पटेल को मंजूरी मिल गई।
बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मंत्रिमंडल और प्रशासन में नामित किए गए पटेल विवादास्पद लोगों में से एक रहे हैं। वह पूर्व लोक अभियोजक रहे हैं, जिन्होंने अमेरिकी राजनीति में तेजी से अपना प्रभुत्व जमाया। रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सीनेटरों ने पहले उनके नामांकन पर संदेह जताया था, लेकिन अंत में उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का समर्थन किया।
नियुक्ति के बाद काश पटेल ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा एफबीआई में बड़े बदलाव की योजना की बात की है, जिसमें उन्होंने वाशिंगटन में मुख्यालय में पदों की संख्या कम करने और एजेंसी के पारंपरिक अपराध-निरोधक कार्यों पर जोर देने की बात की है। लेकिन उनके कुछ बयानों ने डेमोक्रेट्स के बीच चिंता पैदा की है। उन्होंने कहा था कि वह ट्रंप विरोधी "षड्यंत्रकारियों" के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। यह बयान डेमोक्रेट्स के लिए चिंता का विषय बना क्योंकि उन्हें लगता है कि पटेल संघीय सरकार और मीडिया में विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए काम करेंगे।
सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी ने किया समर्थन
सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी ने एफबीआई चीफ के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पसंदीदा काश पटेल का समर्थन किया। सीनेट ने नामांकन को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी लाइन के आधार मतदान किया। इसके बाद उनके नाम पर 30 घंटे तक बहस हुई और फिर सीनेट से काश पटेल को मंजूरी मिल गई।
बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मंत्रिमंडल और प्रशासन में नामित किए गए पटेल विवादास्पद लोगों में से एक रहे हैं। वह पूर्व लोक अभियोजक रहे हैं, जिन्होंने अमेरिकी राजनीति में तेजी से अपना प्रभुत्व जमाया। रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सीनेटरों ने पहले उनके नामांकन पर संदेह जताया था, लेकिन अंत में उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का समर्थन किया।
भारतवंशी काश पटेल
- फोटो : एएनआई
सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी ने किया समर्थन
सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी ने एफबीआई चीफ के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पसंदीदा काश पटेल का समर्थन किया। सीनेट ने नामांकन को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी लाइन के आधार मतदान किया। इसके बाद उनके नाम पर 30 घंटे तक बहस हुई और फिर सीनेट से काश पटेल को मंजूरी मिल गई।
बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मंत्रिमंडल और प्रशासन में नामित किए गए पटेल विवादास्पद लोगों में से एक रहे हैं। वह पूर्व लोक अभियोजक रहे हैं, जिन्होंने अमेरिकी राजनीति में तेजी से अपना प्रभुत्व जमाया। रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सीनेटरों ने पहले उनके नामांकन पर संदेह जताया था, लेकिन अंत में उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का समर्थन किया।
सीनेटर डिक डर्बिन की नाराजगी
इस फैसले से नाजार सीनेटर डिक डर्बिन ने कहा कि मैं इससे बदतर विकल्प की कल्पना नहीं कर सकता। इसके अलावा, मेन की सीनेटर सुसान कोलिन्स और अलास्का की लिसा मुर्कोव्स्की रिपब्लिकन पार्टी से इकलौती सदस्य थीं जिन्होंने पटेल के पक्ष में वोट नहीं किया।
गौरतलब है कि ट्रंप के वफादार माने जाने वाले काश पटेल के पास एफबीआई की उस विरासत को संभालने की जिम्मेदारी होगी जो पिछले कुछ सालों से उथल-पुथल में रही है। पिछले महीने, अमेरिकी न्याय विभाग ने एफबीआई के कुछ उच्च पदस्थ अधिकारियों को बाहर किया था और 6 जनवरी 2021 को यूएस कैपिटल में हुए दंगे की जांच से जुड़े हजारों एजेंटों के नामों की सूची मांगी थी, जो एक असामान्य कदम था।
सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी ने एफबीआई चीफ के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पसंदीदा काश पटेल का समर्थन किया। सीनेट ने नामांकन को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी लाइन के आधार मतदान किया। इसके बाद उनके नाम पर 30 घंटे तक बहस हुई और फिर सीनेट से काश पटेल को मंजूरी मिल गई।
बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मंत्रिमंडल और प्रशासन में नामित किए गए पटेल विवादास्पद लोगों में से एक रहे हैं। वह पूर्व लोक अभियोजक रहे हैं, जिन्होंने अमेरिकी राजनीति में तेजी से अपना प्रभुत्व जमाया। रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सीनेटरों ने पहले उनके नामांकन पर संदेह जताया था, लेकिन अंत में उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का समर्थन किया।
सीनेटर डिक डर्बिन की नाराजगी
इस फैसले से नाजार सीनेटर डिक डर्बिन ने कहा कि मैं इससे बदतर विकल्प की कल्पना नहीं कर सकता। इसके अलावा, मेन की सीनेटर सुसान कोलिन्स और अलास्का की लिसा मुर्कोव्स्की रिपब्लिकन पार्टी से इकलौती सदस्य थीं जिन्होंने पटेल के पक्ष में वोट नहीं किया।
गौरतलब है कि ट्रंप के वफादार माने जाने वाले काश पटेल के पास एफबीआई की उस विरासत को संभालने की जिम्मेदारी होगी जो पिछले कुछ सालों से उथल-पुथल में रही है। पिछले महीने, अमेरिकी न्याय विभाग ने एफबीआई के कुछ उच्च पदस्थ अधिकारियों को बाहर किया था और 6 जनवरी 2021 को यूएस कैपिटल में हुए दंगे की जांच से जुड़े हजारों एजेंटों के नामों की सूची मांगी थी, जो एक असामान्य कदम था।