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म्यांमार: तख्तापलट से पहले कैरन समूह पर अत्याचार, 8 हजार लोग घर छोड़ने को मजबूर

Tue, 23 Mar 2021 01:45 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, बैंकॉक
एजेंसी, बैंकॉक Published by: देव कश्यप Updated Tue, 23 Mar 2021 01:45 AM IST
सार

  • तख्तापलट से पहले ही सेना ने लोगों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था।
  • दक्षिण-पूर्वी दूर-दराज के क्षेत्रों में बसे जातीय समुदाय कैरन पर हुआ अत्याचार।

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Karen Community tortured before Military coup in Myanmar
Protest in Myanmar - फोटो : PTI

विस्तार

म्यांमार में एक फरवरी को हुए तख्तापलट से पहले ही सेना ने देश के दक्षिण-पूर्वी दूर-दराज के इलाके में लोगों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। यह दावा सहायता समूहों ने किया है। इस पूरे घटनाक्रम में सर्वाधिक अत्याचार देश के दक्षिण-पूर्वी दूर-दराज के क्षेत्रों में बसे जातीय समुदाय कैरन पर हुआ जिसके कारण समुदाय के करीब आठ हजार लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

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सहायता समूहों ने बताया कि पिछले 10 साल में यहां हुई यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। ये लोग अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा की चिंता के बीच जंगलों में रह रहे हैं और वहां से लौटने की कोई उम्मीद उन्हें नजर नहीं आ रही। देश में तख्तापलट के बाद सड़कों पर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों का यह संकट सामने नहीं आ पा रहा है।
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कैरन का प्रमुख राजनीतिक संगठन ‘कैरन नेशनल यूनियन’ (केएनयू) फिलहाल सभी विस्थापित लोगों को खाना मुहैया कराने, पनाह देने और सुरक्षा प्रदान करने जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी कर रहा है। केएनयू के विदेश विभाग के प्रमुख पैडो सॉ ने बताया, आगे चलकर समूह की चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इसे देखते हुए उन्होंने विश्व बिरादरी से इन लोगों को जल्द मानवीय मदद पहुंचाने की अपील की है।
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म्यांमार राजदूत का सेना पर प्रतिबंध का आह्वान
संयुक्त राष्ट्र में म्यांमार के राजदूत क्यॉ मो तुने ने सैन्य तख्तापलट के बाद बढ़ती हिंसा के चलते विश्व समुदाय से देश की सेना के खिलाफ प्रतिबंधों को सख्त करने का आह्वान किया है। एनएचके वर्ल्ड के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, प्रतिबंधों को समन्वित और सख्त होना चाहिए। जबकि म्यांमार में सेना के टीवी ने कहा है कि क्यॉ को देश के दूत पद से हटाया जा चुका है वे फिर भी वहां रह रहे हैं।

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