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गरीब हो रहे अरबपति: महंगाई से टूटती जा रही है अमेरिका की आम जनता की कमर

Tue, 24 May 2022 02:09 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 24 May 2022 02:09 PM IST
सार

विश्लेषकों का कहना है कि अभी तक इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर अमेरिकी अरबपतियों पर हुआ था। शेयर, क्रिप्टो करेंसी, और अन्य वित्तीय संपत्तियों का भाव गिरने से उन्हें 800 बिलियन डॉलर का नुकसान हो चुका है। अब ये मार मध्य और श्रमजीवी वर्ग के लोगों पर भी पड़ने लगी है...

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JPMorgan Chase & Co said, solid decline in the collective wealth of the American public since the beginning of this year
न्यूयॉर्क का मैनहट्टन - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

दुनिया के धनी देशों के लोग तेजी से गरीब हो रहे हैं। यह बात इन्वेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन चेज एंड कंपनी के एक विश्लेषण में कही गई है। इसके मुताबिक पिछले इस वर्ष के आरंभ से अमेरिकी जनता के सामूहिक धन में ठोस गिरावट आई है। उनका कुल धन पांच ट्रिलियन डॉलर कम हो गया है। इस साल के अंत तक ये गिरावट नौ ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।

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विश्लेषकों का कहना है कि अभी तक इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर अमेरिकी अरबपतियों पर हुआ था। शेयर, क्रिप्टो करेंसी, और अन्य वित्तीय संपत्तियों का भाव गिरने से उन्हें 800 बिलियन डॉलर का नुकसान हो चुका है। अब ये मार मध्य और श्रमजीवी वर्ग के लोगों पर भी पड़ने लगी है। बढ़ती ब्याज दर का असर आवासीय जायदाद पर दिखने लगा है, जिसमें मध्य वर्ग और श्रमजीवी वर्ग के ज्यादातर धन का निवेश है।

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39 फीसदी अमेरिकी राष्ट्रपति के काम से खुश

अर्थशास्त्री डेविड पी गोल्डमैन ने एक टिप्पणी में लिखा है- ‘अमेरिका में शेयरों के भाव और राष्ट्रपति बाइडन की एप्रूवल रेटिंग (उनके काम को पंसद करने वाले लोगों की संख्या) में गिरावट जारी है, जबकि मुद्रास्फीति परिवारों की आमदनी को डकारती जा रही है। सिर्फ 39 फीसदी अमेरिकी राष्ट्रपति के काम से खुश हैं। उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी के सिर्फ 33 फीसदी समर्थक मानते हैं कि देश सही दिशा में है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। खुदरा कारोबार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों के भाव में इस साल 40 फीसदी गिरावट आ चुकी है। एसएंडपी 500 की कंपनियों के शेयर भाव में 20 फीसदी तक गिरावट आई है।’

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अमेरिका में बीते अप्रैल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 8.3 फीसदी तक पहुंच गया। लेकिन कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ये असल आंकड़ा नहीं है। महंगाई की असल दर 12 फीसदी तक है। इसकी वजह यह है कि मुद्रास्फीति के सरकारी आंकड़े में सालाना आवास महंगाई का हिस्सा सिर्फ पांच फीसदी दिखाया गया है। जबकि रियल एस्टेट सेक्टर बाजार के दो सूचकांकों- जिलॉ और अपार्टमेंट लिस्ट.कॉम के मुताबिक इस क्षेत्र में वार्षिक महंगाई दर 16 प्रतिशत है। अगर इस आंकड़े को शामिल किया जाए, तो मुद्रास्फीति दर 12 फीसदी के करीब नजर आएगी।

वेबसाइट एशिया टाइम्स के विश्लेषण के मुताबिक अगर 12 फीसदी महंगाई दर को ध्यान में रखा जाए, तो उसका मतलब हुआ कि आम अमेरिकी नागरिक की आदमनी में अभी जितनी सेंध लगी है, वैसा 1979-80 की मंदी के बाद कभी नहीं हुआ। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक यही ऊंची महंगाई रिटेल सेक्टर की घटी आमदनी का कारण है।

कारखाना उत्पादन में अमेरिका पिछड़ा

फिलाडेल्फिया फेडरल रिजर्व के मासिक मैनुफैक्चरिंग सर्वे के मुताबिक मुद्रास्फीति की ऊंची दर के कारण पूंजी निवेश और उपभोग दोनों घट रहे हैं। इस सर्वे में आर्थिक गतिविधियों से संबंधित आंकड़े जुटाए जाते हैं। इसकी ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल कच्चे माल और मजदूरी पर कंपनियों को अधिक खर्च करना पड़ रहा है। इसलिए वे पूंजीगत खर्च में कटौती कर रही हैं।



अर्थशास्त्री गोल्डमैन ने कहा है कि पूंजीगत खर्च घटने से महंगाई की सूरत और बिगड़ेगी। अगर वित्तीय क्षेत्र को छोड़ दें, तो 2021 में अमेरिका में शायद ही कहीं और निवेश हुआ। देश में ट्रेंड यह है कि कंपनियां अधिक से अधिक वित्तीय क्षेत्र में पैसा लगा रही हैं। उससे कारखाना उत्पादन में अमेरिका पिछड़ रहा है। इसका दीर्घकालिक असर आम अमेरिकियों की माली हालत और बिगड़ने के रूप में सामने आएगा।

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