तीन दशक बाद पूरा हुआ बाइडन का सपना, 50 साल लंबा है राजनीतिक करियर
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साल 1972 की बात है। व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति पद पर रिचर्ड निक्सन बैठे थे और अमेरिका अब भी चांद पर इंसानों को भेजने के अभियानों को चला रहा था। इस बीच अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले जो बाइडन करीब 50 साल लंबा राजनीतिक करियर बिता चुके हैं। इस दौरान तीन दशक में तीन बार देश का सर्वोच्च नेता बनने की आकांक्षा जताने वाले बाइडन का सपना शनिवार को तब पूरा हुआ, जब वे अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति चुने गए।
पेनिसिल्वेनिया में 1942 में एक कैथोलिक परिवार में जन्मे जो रोबिनेट बाइडन जूनियर ने डेलावेयर यूनिविर्सिटी से पढ़ाई पूरी की और इसके बाद सिएराक्यूज यूनिवर्सिटी से 1968 में वकालत की डिग्री लेकर करियर शुरू किया। 78 वर्षीय डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बाइडन राष्ट्रपति पद पर पहुंचने वाले अपने देश के अब तक के सबसे बुजुर्ग नेता भी बन गए हैं। लेकिन उम्र के रिकॉर्ड बनाने का जो बाइडन के लिए यह पहला मौका नहीं है।
अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करते हुए 1972 में वे 30 साल की उम्र में पहली बार डेलावेयर से देश के पांचवे सबसे कम उम्र सीनेटर के तौर पर चुने गए। इस सीट से छह बार सीनेटर चुने जा चुके बाइडन ने पहली बार राष्ट्रपति बनने का सपना 1988 में देखा था। इसके बाद 2008 में वह दोबारा डेमोक्रेटिक उम्मीदवार चुने जाने की होड़ में उतरे, लेकिन इस बाद उन्हें देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने बराक ओबामा से पिछड़ना पड़ा। हालांकि ओबामा ने बाइडन के लंबे अनुभव और उनके देश विदेश में सम्मान को देखते हुए उन्हें अपने उपराष्ट्रपति के तौर पर साथ जोड़ा और यह साथ ओबामा के राष्ट्रपति पद पर दोनों कार्यकाल में जारी रहा। ओबामा ने बाइडन को देश का आज तक का सर्वश्रेष्ठ उपराष्ट्रपति घोषित किया था। 2017 तक उपराष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभालने वाले बाइडन इस बार तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के लिए मैदान में उतरे थे। इस बार डोनाल्ड ट्रंप से नाराज अश्वेत समुदाय ने बाइडन को चुनने के लिए उनकी तरफ से अश्वेत राष्ट्रपति ओबामा को उनके दो कार्यकाल में दिए समर्थन का भी ध्यान रखा।
विवादों से भी रहा नाता
बाइडन का विवादों से भी नाता रहा। अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में उन्होंने स्कूलों को नस्लीय रूप से संगठित करने के लिए किए जा रहे प्रयास का विरोध कर रहे दक्षिणपंथी अलगाववादियों का समर्थन किया। 1988 में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के दौरान उन पर ब्रिटिश लेबर पार्टी के तत्कालीन नेता नील किनॉक के भाषण की लाइनें चुराने का आरोप लगा। इसके बाद 1991 में वे सीनेट की न्यायिक समिति के चेयरमैन के तौर पर भी दो मामलों के निस्तारण को लेकर विवादित रहे। इनमें से एक अनीता हिल का अपने साथ यौन उत्पीड़न का आरोप था। 1993 में बाइडन पर सीनेट की पूर्व कर्मचारी तारा रेडे ने यौन हमले का आरोप लगाया था। बाइडन 1994 का विवादित क्राइम बिल तैयार करने वालों में से एक रहे, जिसे बड़े पैमाने पर बंदियों की संख्या बढ़ने, लंबी सजाएं सुनाए जाने और अधिक से अधिक जेलों की बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार माना जाता है। 2012 में उन्होंने एलजीबीटी लोगों के अधिकारों की वकालत भी की और कहा कि उन्हें एक ही लिंग के लोगों के आपस में शादी करने पर कोई ऐतराज नहीं है।
जब अस्पताल से ली थी शपथ
बाइडन के लिए पहली बार सीनेटर बनने की खुशी बड़ा दुख भी लेकर आई थी। इसके तत्काल बाद उनकी पहली पत्नी नीलिया और बेटी नाओमी सड़क दुर्घटना में मारे गए। हालांकि उनके दोनों जुड़वां नवजात बेटे बियू और हंटर इस दुर्घटना में सुरक्षित बच गए। बाइडन ने इसके बाद अस्पताल में अपने बच्चों के साथ मौजूद रहते हुए सीनेटर के तौर पर शपथ लेकर बेहद प्रसिद्धि बटोरी थी। बियू को उनके राजनीतिक करियर का उत्तराधिकारी माना जाता था, लेकिन उनकी 2015 में महज 46 साल की उम्र में ब्रेन कैंसर के कारण मौत हो गई। इन दो घटनाओं के कारण ही बाइडन को ओबामा की मशहूर ‘पर्सनल हेल्थ केयर पॉलिसी’ का बड़ा समर्थक माना जाता है, जिसे उन्होंने राष्ट्रपति बनने पर वापस लाने का वादा अपने अभियान के दौरान किया था।
इन पदों पर रहे
- 2009 से 2017 तक अमेरिका के उपराष्ट्रपति पद पर तैनात रहे
- 2007 से 2009 तक इंटरनेशनल नारकोटिक्स कंट्रोल कॉकस के चेयरमैन
- 2007 से 2009 तक अमेरिकी सीनेट विदेशी संबंध समिति के चेयरमैन
- 2001 से 2003 तक अमेरिकी सीनेट विदेशी संबंध समिति के चेयरमैन
- 1987 से 1995 तक अमेरिकी सीनेट न्यायिक समिति के चेयरमैन