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अब अमेरिकियों को अफगानिस्तान में अपनी ही जान की पड़ी है! अपने लोगों को निकालने के लिए भेजे 7000 सैनिक

Fri, 13 Aug 2021 01:17 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 13 Aug 2021 01:17 PM IST
सार

हवाई हमलों की सहायता के बारे में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने सिर्फ यह कहा है- ‘जहां भी संभव होगा, हम उसे उपलब्ध कराएंगे।’ पेंटागन ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि क्या 31 अगस्त के बाद भी अफगानिस्तान में हवाई हमले किए जाएंगे...

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Joe biden sent 7,000 troops to evacuate stranded American civilians and its Afghan allies from Afghanistan
अफगानिस्तान में तालिबानी - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

अफगानिस्तान में एक के बाद दूसरे शहरों पर तालिबान के तेजी से हो रहे कब्जे के बीच अब अमेरिका सरकार की चिंता पहले अपने नागरिकों की जान बचा लेने तक सिमट गई है। राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन ने अफगानिस्तान में अमेरिकी राजनयिकों को वहां से सुरक्षित निकाल लेने के लिए 3000 हजार सैनिकों को वहां भेजने का फैसला किया है। ये फौजी उन अफगान नागरिकों को भी वहां से निकालने में मदद करेंगे, जिन्होंने गुजरे 20 वर्षों में अमेरिकी फौज के अफगानिस्तान में रहने के दौरान उनकी मदद की थी।

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अमेरिकी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक राष्ट्रपति जो बाइडन ने गुरुवार को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक की। उसमें आम राय से बचाव कार्य के लिए सेना भेजने का फैसला हुआ। इसके बावजूद अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने दावा किया कि अमेरिका सरकार के इस कदम से यह नहीं समझा जाना चाहिए कि अमेरिका ने अफगानिस्तान को अकेला छोड़ दिया है और अपने लोगों को अफगानिस्तान से निकाल लेने की कार्रवाई भी नहीं है। इससे तालिबान को यह संदेश नहीं लेना चाहिए कि अब वह जो चाहे कर सकता है।
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लेकिन कई विशेषज्ञों की राय है कि अमेरिका के इस कदम से अफगानिस्तान में और अफरातफरी फैलेगी। साथ ही उसके पास-पड़ोस के देशों में चिंता और गहराएगी। बाइडन प्रशासन लगातार यह कह रहा है कि अगर तालिबान ने ताकत के जोर से सत्ता हथियाई तो वह अंतरराष्ट्रीय वैधता खो देगा। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए अमेरिका के ऐसे बयानों का अब शायद ही कोई मतलब बचा है।

इस बीच वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने अफगानिस्तान में वहां के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच सर्कुलेट हो रहे एक व्हाट्सएप मैसेज के बारे में खबर दी है। उस मैसेज में ये इच्छा जताई गई है कि अमेरिका हवाई हमलों के जरिए उनकी मदद करे। साथ ही उन अधिकारियों ने तालिबान पर जवाबी हमला करने का इरादा जताया है। संदेश में कहा गया है- ‘हमें अधिक हवाई शक्ति की जरूरत है। तालिबान अब खुल कर सामने आ गया है। अब इससे ज्यादा उसे बेनकाब नहीं किया जा सकता। अगर हमें दो हफ्तों तक लगातार हवाई हमलों की सहायता हमें मिले, तो उसका मतलब होगा कि तालिबान को पीछे हटने के लिए मजबूर हो जाएगा और उसे बातचीत की मेज पर लौटने के लिए मजबूर कर दिया जाएगा।’

लेकिन हवाई हमलों की सहायता के बारे में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने सिर्फ यह कहा है- ‘जहां भी संभव होगा, हम उसे उपलब्ध कराएंगे।’ पेंटागन ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि क्या 31 अगस्त के बाद भी अफगानिस्तान में हवाई हमले किए जाएंगे। बाइडन प्रशासन की तरफ से तय समयसीमा के मुताबिक 31 अगस्त तक सारे अमेरिकी फौजियों को वापस बुला लिया जाएगा।  

खबरों के मुताबिक पेंटागन ने अफगानिस्तान से अमेरिकी नागरिकों और अपने अफगान सहायकों को निकालने के लिए सात हजार सैनिकों को तैयार रहने को कहा है। उनमें से 3000 सैनिक रविवार सुबह तक काबुल पहुंच जाएंगे। अमेरिका कुछ सैनिक अपने कुवैत स्थित अड्डे से भी भेजेगा।

इस बीच एक अमेरिकी खुफिया आकलन में कहा गया है कि काबुल पर अगले 30 से 90 दिन के भीतर तालिबान का कब्जा हो सकता है। इन खुफिया एजेंसियों ने पहले अनुमान लगाया था कि ऐसा अमेरिकी फौज की वापसी के छह से 12 महीनों के बाद जाकर हो पाएगा।

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