अब साफ हुआ ‘अमेरिका इज बैक’ का मतलब, बाइडन ने दिया विदेश नीति पर पहला भाषण
बाइडन प्रशासन ने रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन विरोधी नेता अलेक्सी नवालनी की गिरफ्तारी और उनके समर्थकों पर जारी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन इसी हफ्ते कह चुके हैं कि रूस पर और अधिक प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना बनी हुई है...
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जो बाइडन ने राष्ट्रपति बनने के बाद गुरुवार रात (भारतीय समय के अनुसार) अपना पहला विदेश नीति संबंधी भाषण दिया, तो उससे उनके अगले चार साल की प्राथमिकताओं का साफ अंदाजा दुनिया को लगा है। बाइडन गुरुवार रात उप राष्ट्रपति कमला हैरिस के साथ विदेश मंत्रालय गए और वहां के कर्मचारियों को संबोधित किया। उस दौरान बाइडन ने एलान किया कि अमेरिका वापस आ गया है (अमेरिका इज बैक) और कूटनीति अमेरिकी विदेश नीति के केंद्र में वापस आ गई है। मतलब साफ है कि बाइडन प्रशासन अपने सामने मौजूद चुनौतियों को हल करने में कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देगा।
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीतियों के विपरीत जो घोषणाएं उन्होंने दो टूक की, उनमें जर्मनी से अमेरिकी सेना की वापसी पर रोक लगाना, अमेरिका में आने वाले शरणार्थियों की संख्या पर लगी सीमा में छूट देना, और दुनिया भर में समलैंगिकों के अधिकारों को समर्थन देना शामिल है। उनका यह भी कहना था कि दुनिया में 'बढ़ रही तानाशाही' का मुकाबला सभी देशों को मिल-जुल कर करना होगा। उनके इस बयान को चीन के लिए यह संदेश माना गया है कि चीन के प्रति अमेरिकी नीति में ज्यादा बदलाव नहीं आएगा। साथ ही अमेरिकी कूटनीति में लोकतंत्र को केंद्रीय महत्व दिया जाएगा। बाइडन ने कहा कि अमेरिका में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष से ऐसी कूटनीति को प्रेरणा मिलेगी। विश्लेषकों का कहना है कि इस बयान को छह जनवरी को कैपिटल हिल पर हुए हमले की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए।
इस बयान का यह भी मतलब समझा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने चीन, रूस, उत्तर कोरिया और वेनेजुएला पर जो प्रतिबंध लगाए थे, उनमें ज्यादा ढील दिए जाने की गुंजाइश नए प्रशासन के समय भी नहीं है। ये सभी देश लोकतंत्र की अमेरिकी समझ के खाके में फिट नहीं बैठते। बाइडन प्रशासन ने रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन विरोधी नेता अलेक्सी नवालनी की गिरफ्तारी और उनके समर्थकों पर जारी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन इसी हफ्ते कह चुके हैं कि रूस पर और अधिक प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा सर्वोच्च अधिकारियों ने यह साफ कर दिया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को भी ‘तानाशाह’ मानने की नीति पर बाइडन प्रशासन चलता रहेगा।
लेकिन यह जरूर साफ किया गया है कि अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति में बड़ा बदलाव आएगा। गुरुवार को बाइडन के भाषण के पहले ही विदेश मंत्री ब्लिंकेन ने एलान किया कि अब अमेरिका यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन की आक्रामक कार्रवाइयों का समर्थन नहीं करेगा। ट्रंप प्रशासन यमन में सऊदी गठबंधन का खुल कर समर्थन कर रहा था। जबकि सऊदी गठबंधन के ऊपर यमन में मानवाधिकारों का घोर हनन करने का आरोप है। उस पर इल्जाम है कि उसकी कार्रवाइयों में मरने वाले आम नागरिकों की संख्या बढ़ती गई है। साथ ही सऊदी नेतृत्व वाली फौज ने हाउथी बागियों के नियंत्रण वाले इलाकों के जरूरी चीजों, यहां तक कि खाने-पीने की वस्तुओं की सप्लाई भी रोक रखी है।
अब यह भी साफ कर दिया है कि अमेरिका, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ हुए ट्रंप काल में हथियार सौदों के लिए हुए करार की समीक्षा करेगा। बाइडन प्रशासन ने इन अनुबंधों के तहत हथियारों की बिक्री पहले ही रोक चुका है। राष्ट्रपति बाइडन और ब्लिंकेन अमेरिका को ईरान के साथ परमाणु समझौते में शामिल करने के पक्षधर हैं। उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाने की घोषणा भी की है। सऊदी अरब और यूईए के ईरान के साथ तनावपूर्ण रिश्ते हैं। इसलिए उन्हें हथियारों की बिक्री रोकने की घोषणा को महत्पूर्ण कदम समझा गया है।
बाइडन ने अपने भाषण में दक्षिण एशिया के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन इस क्षेत्र के लिहाज से चीन के खिलाफ उनके सख्त रुख को अहम समझा गया है। उन्होंने कहा कि चीन के आर्थिक दुर्व्यवहार और आक्रमक रुख का मुकाबला किया जाएगा, हालांकि उन्होंने यह संकेत भी दिया कि उनके कार्यकाल में अमेरिका चीन के साथ सहयोग के नए रास्ते भी तलाश करेगा।