OPEC oil production cut: तेल उत्पादन में कटौती, अब सऊदी अरब के प्रति जवाब दे गया है अमेरिका सब्र?
OPEC oil production cut: विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि सऊदी अरब युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने बीते जुलाई में भी जो बाइडन को नाराज किया था। तब बाइडन ने तेल उत्पादन बढ़ाने पर सलमान को राजी करने के लिए सऊदी अरब की यात्रा की थी। प्रिंस सलमान हालांकि अभी युवराज हैं, लेकिन उनके हाथ में ही सऊदी अरब की असल सत्ता है...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तेल उत्पाद देशों के संगठन ओपेक के तेल उत्पादन में कटौती के फैसले से अमेरिका में जो बाइडन प्रशासन बेहद गुस्से में है। खास कर वह सऊदी अरब से नाराज है। उसकी राय है कि इस फैसले का नेतृत्व कर सऊदी अरब ने राष्ट्रपति बाइडन की संबंध सुधारने की कोशिशों को नजरअंदाज किया है। व्हाइट हाउस ने इस घटना पर अपनी नाराजगी छिपाने की कोई कोशिश नहीं की। बल्कि आरोप लगाया कि ओपेक+ अब खुल कर रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के साथ खड़ा हो गया है।
ओपेक+ ने बुधवार को तेल उत्पादन में रोजाना 20 लाख बैरल की कटौती करने का फैसला किया। जो बाइडन अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिशों में जुटे रहे हैं। ओपेक+ ने उनके इस मकसद के विपरीत निर्णय लिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में तुरंत बढ़ोतरी देखने को मिली। बाइडन प्रशासन रूस के तेल पर मूल्य नियंत्रण लगाने की पैरोकारी भी करता रहा है, ताकि निर्यात से हो रही उसकी आमदनी घटाई जा सके। जबकि ओपेक के ताजा फैसले से रूस को भी अन्य उत्पादक देशों की तरह कम तेल निर्यात कर अधिक आमदनी होगी।
विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि सऊदी अरब युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने बीते जुलाई में भी जो बाइडन को नाराज किया था। तब बाइडन ने तेल उत्पादन बढ़ाने पर सलमान को राजी करने के लिए सऊदी अरब की यात्रा की थी। प्रिंस सलमान हालांकि अभी युवराज हैं, लेकिन उनके हाथ में ही सऊदी अरब की असल सत्ता है। आरोप है कि 2018 में अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार जमाल खशोगी की हत्या का आदेश सलमान ने दिया था। राष्ट्रपति बाइडन इसको लेकर सलमान की कड़ी आलोचना करते थे। लेकिन तेल उत्पादन बढ़वाने के मकसद से वे उनसे मिलने जेद्दाह गए।
ओपेक के ताजा फैसले के बाद व्हाइट हाउस की प्रवक्ता केरिन ज्यां-पियरे ने कहा- ‘इस घोषणा से साफ है कि ओपेक+ ने रूस के साथ गठजोड़ कर लिया है।’ ओपेक पुराना संगठन है। कुछ वर्ष पहले उसकी बैठकों में रूस को भी बुलाया जाने लगा। तब से इसे ओपेक प्लस के नाम से जाना जाता है।
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन की तरफ से भी इस मसले पर एक बयान जारी किया गया। इसे अमेरिका की नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के निदेशक ब्रायन डीज ने जारी किया। बयान में कहा गया- ‘राष्ट्रपति बाइडन इस अल्पदृष्टि वाले निर्णय से निराश हैं। ये फैसला उस समय लिया गया है, जब सारी दुनिया पुतिन के यूक्रेन पर हमले के प्रभाव को भुगत रही है। मेरी राय में ओपेक+ ने गलती की है। मेरी राय में अब समय आ गया है, जब अमेरिका सऊदी अरब के साथ अपने गठजोड़ का पूरा पुनर्मूल्यांकन करे।’
इस बीच अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य टॉम मलिनोवस्की ने एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें सऊदी अरब से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने का प्रावधान है। उन्होंने एक ट्विट मे कहा- ‘प्रिंस सलमान को साफ संदेश दिया जाना चाहिए। अगर वे पुतिन के साथ खड़े होना चाहते हैं, तो फिर उन्हें पुतिन से अपने लिए सुरक्षा मांगनी चाहिए।’