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Hindi News ›   World ›   Jean-Marie Le Pen, French far-right leader, dies at 96

France: दक्षिणपंथी नेता जीन-मैरी ले पेन नहीं रहे, 96 साल की उम्र में निधन; विवादों से भरा रहा राजनीतिक करियर

Tue, 07 Jan 2025 07:12 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 07 Jan 2025 07:12 PM IST
सार

France: अपने विवादित बयानों से चर्चाओं में रहने वाले फ्रांस के दक्षिणपंथी नेता जीन-मैरी ले पेन का 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अपने राजनीतिक जीवन में विवादित बयानों के लिए उन्हें कई बार सजा का सामना करना पड़ा। 

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Jean-Marie Le Pen, French far-right leader, dies at 96
Jean-Marie Le Pen - फोटो : X/Jean-Marie Le Pen

विस्तार

फ्रांस के दक्षिणपंथी नेता और नेशनल फ्रंट पार्टी के संस्थापक जीन-मैरी ले पेन का 96 की उम्र में निधन हो गया। वह अपनी सख्त आव्रजन नीति और बहुसंस्कृतिवाद के खिलाफ बयानबाजी से चर्चाओं में रहते थे। इनकी वजह से उन्हें आलोचकों के साथ-साथ समर्थकों की की आलोचना का सामना करना पड़ा था। 

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ले पेन का राजनीतिक करियर विवादों से भरा रहा। अपने कई बयानों के कारण उन्हें बार-बार कानूनी सजाओं और राजनीतिक आलोचना का सामना करना पड़ा था। 2002 के राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में उन्होंने जगह बनाई थी। लेकिन उनके संबंध उनकी बेटी के साथ बिगड़ गए थे। मरीन ने अपनी पार्टी का नाम बदलकर 'नेशनल रैली' रखा था और फिर इसे फ्रांस के सबसे ताकतवर राजनीतिक दल में बदल दिया। इसके साथ ही मरीन ने खुद को अपने पिता की कट्टरपंथ वाली छवि से अलग कर दिया। 
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नेशनल रैली पार्टी के अध्यक्ष जॉर्डन बार्डेला ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर ले पेन के निधन की पुष्टि की और उन्हें 'जनता का प्रवक्ता' और 'फ्रांस की सेवा करने वाला व्यक्ति' करार दिया। हालांकि, बार्डेला ने यह भी कहा कि पार्टी ने अपने संस्थापक के कट्टरपंथी अतीत से अलग एक नई दिशा को चुना था। बार्डेला ने मरीन और उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई। 
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जीन-मैरी ले पेन ने फ्रांस की राजनीति पर गहरी छाप छोड़ी। वह अपनी रैलियों में आव्रजन विरोधी संदेश देते थे और मुसलमानों के आव्रजन को फ्रांस की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराते थे। वह पहले एक पैराट्रूपर और दूसरे देशों की सेना के सदस्य रहे। उन्होंने भारत-चीन और अल्जीरिया की लड़ाई में हिस्सा लिया था। उनका एक प्रसिद्ध नारा था- 'अगर मैं आगे बढ़ूं, तो मेरा अनुसरण करो। अगर मैं मरूं, तो मेरा बदला लो। अगर मैं पीछे हटूं, तो मुझे मार डालो।' इस नारे को वह अपने समर्थकों में उत्साह बनाए रखने के लिए लगाते थे। 


ले पेन को कई बार नस्लवाद और यहूदी समुदाय से नफरत (एंटी-सेमेटिज्मम) के लिए दोषी ठहराया गया। उन्होंने कई मौकों पर कहा कि वह केवल फ्रांस की अटल पहचान की रक्षा कर रहे हैं। 1990 में उन्होंने नाजी गैस चैंबर की घटना को द्वितीय विश्व युद्ध का एक विवरण कहा था। उन्होंने यहूदियों के नरसंहार (होलोकॉस्ट) को मानने से इनकार किया था, जिसके लिए उन्हें सजा हुई थी। उन्हें 2015 में उन्हें यूरोपीय संसद की निधियों में धांधली के मामले में मुकदमे से छूट मिल गई थी। फ्रांसीसी न्यायिक अधिकारियों ने उन्हें इस साल फरवरी में कानूनी संरक्षण में डाल दिया था, क्योंकि उनका स्वास्थ काफी बिगड़ चुका था।

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