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लगन: कभी पढ़ने में भी असमर्थ जैसन अब कैम्ब्रिज में प्रोफेसर, कम उम्र में गंभीर बीमारी से हो गए थे पीड़ित
Wed, 01 Mar 2023 05:18 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Wed, 01 Mar 2023 05:18 AM IST
सार
आर्डे कहते हैं, मेरा काम मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि कैसे हम वंचित लोगों के लिए दरवाजे खोल सकते हैं, ताकि उन्हें उच्च शिक्षा मिल सके। आर्डे 11 साल की उम्र तक बोल नहीं पाते थे, लेकिन सैंड्रो सैंड्री की मदद से उन्होंने किशोरावस्था में पढ़ना और लिखना शुरू कर दिया था।
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जेसन आर्डे
- फोटो : social media
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विस्तार
इन्सान कुछ कर गुजरने की ठान ले, तो कोई मंजिल मुश्किल नहीं होती। इसे जेसन आर्डे ने सच कर दिखाया है। 18 साल की उम्र तक आर्डे पढ़ने-लिखने में असमर्थ थे, लेकिन आज वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनने जा रहे हैं। 37 वर्षीय आर्डे अब तक के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर होंगे।
तीन साल की उम्र में बीमारी का पता चला...द गार्डियन के मुताबिक, आर्डे को तीन साल की उम्र में ग्लोबल डेवलपमेंट डिले और ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम बीमारी का पता चला था। उनके परिवार को बताया गया था कि आर्डे को पूरी जिंदगी किसी के सहारे की जरूरत होगी। हालांकि, जेसन ने सभी बाधाओं को खत्म कर दिया। उन्होंने बचपन से ही कड़ी मेहनत की। अब 6 मार्च को अपनी प्रोफेसरशिप ग्रहण करेंगे। आर्डे उच्च शिक्षा में जातीय अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व में सुधार करना चाहते हैं।
आर्डे कहते हैं, मेरा काम मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि कैसे हम वंचित लोगों के लिए दरवाजे खोल सकते हैं, ताकि उन्हें उच्च शिक्षा मिल सके। आर्डे 11 साल की उम्र तक बोल नहीं पाते थे, लेकिन सैंड्रो सैंड्री की मदद से उन्होंने किशोरावस्था में पढ़ना और लिखना शुरू कर दिया था। सैंड्रो उनके गुरु हैं, उनके दोस्त रहे और उनके कॉलेज शिक्षक के रूप में काम किया। आर्डे ने सरे विश्वविद्यालय से शारीरिक शिक्षा और शिक्षण में डिग्री हासिल की और शिक्षक बन गए। इसके अलावा, उन्होंने शैक्षिक अध्ययन में दो मास्टर डिग्री और पीएचडी की है। 2021 में वह ब्रिटेन के दरहम विश्वविद्यालय में सबसे कम उम्र के प्रोफेसर बन गए।
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10 साल पहले देखा था कैि म्ब्रज में काम करने का सपना
आर्डे ने खुलासा किया कि 10 साल पहले जब वह पीएचडी कर रहे थे, तब उन्होंने अपनी मां के बेडरूम की दीवार पर एक लिस्ट बनाई थी और तय किया कि जीवन में उनके क्या लक्ष्य हैं। उनकी सूची में तीसरा लक्ष्य था, ऑक्सफोर्ड या कैम्ब्रिज में काम करना। उस पल को याद करते हुए उन्होंने कहा, मैं जितना आशावादी हूं, मैंने सोचा भी नहीं था कि ऐसा होगा। उन्होंने इच्छाशक्ति के मूल्य पर भी जोर दिया और कहा, मुझे पता था कि मेरे पास बहुत ज्यादा प्रतिभा नहीं है, लेकिन मुझे पता था कि मैं इसे कितनी बुरी तरह से चाहता था और जानता था कि इसके लिए मैं कितनी मेहनत करना चाहता हूं और आज मैंने वह सब कर दिखाया।
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तीन साल की उम्र में बीमारी का पता चला...द गार्डियन के मुताबिक, आर्डे को तीन साल की उम्र में ग्लोबल डेवलपमेंट डिले और ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम बीमारी का पता चला था। उनके परिवार को बताया गया था कि आर्डे को पूरी जिंदगी किसी के सहारे की जरूरत होगी। हालांकि, जेसन ने सभी बाधाओं को खत्म कर दिया। उन्होंने बचपन से ही कड़ी मेहनत की। अब 6 मार्च को अपनी प्रोफेसरशिप ग्रहण करेंगे। आर्डे उच्च शिक्षा में जातीय अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व में सुधार करना चाहते हैं।
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आर्डे कहते हैं, मेरा काम मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि कैसे हम वंचित लोगों के लिए दरवाजे खोल सकते हैं, ताकि उन्हें उच्च शिक्षा मिल सके। आर्डे 11 साल की उम्र तक बोल नहीं पाते थे, लेकिन सैंड्रो सैंड्री की मदद से उन्होंने किशोरावस्था में पढ़ना और लिखना शुरू कर दिया था। सैंड्रो उनके गुरु हैं, उनके दोस्त रहे और उनके कॉलेज शिक्षक के रूप में काम किया। आर्डे ने सरे विश्वविद्यालय से शारीरिक शिक्षा और शिक्षण में डिग्री हासिल की और शिक्षक बन गए। इसके अलावा, उन्होंने शैक्षिक अध्ययन में दो मास्टर डिग्री और पीएचडी की है। 2021 में वह ब्रिटेन के दरहम विश्वविद्यालय में सबसे कम उम्र के प्रोफेसर बन गए।
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10 साल पहले देखा था कैि म्ब्रज में काम करने का सपना
आर्डे ने खुलासा किया कि 10 साल पहले जब वह पीएचडी कर रहे थे, तब उन्होंने अपनी मां के बेडरूम की दीवार पर एक लिस्ट बनाई थी और तय किया कि जीवन में उनके क्या लक्ष्य हैं। उनकी सूची में तीसरा लक्ष्य था, ऑक्सफोर्ड या कैम्ब्रिज में काम करना। उस पल को याद करते हुए उन्होंने कहा, मैं जितना आशावादी हूं, मैंने सोचा भी नहीं था कि ऐसा होगा। उन्होंने इच्छाशक्ति के मूल्य पर भी जोर दिया और कहा, मुझे पता था कि मेरे पास बहुत ज्यादा प्रतिभा नहीं है, लेकिन मुझे पता था कि मैं इसे कितनी बुरी तरह से चाहता था और जानता था कि इसके लिए मैं कितनी मेहनत करना चाहता हूं और आज मैंने वह सब कर दिखाया।