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जापान में कोरोना की दूसरी लहर, विशेषज्ञ बोले इन पांच गलतियों की वजह से बढ़े मामले

Wed, 19 Aug 2020 12:22 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Tanuja Yadav Updated Wed, 19 Aug 2020 12:22 PM IST
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Japanese experts says due to five mistakes surge in corona virus cases second wave of corona
कोरोना की जांच करता एक स्वास्थ्यकर्मी - फोटो : Social media/Japan News
जापान में एक बार फिर कोरोना वायरस के मामले बढ़ने लगे हैं। जापान ने इस महामारी को रोकने के लिए 3-सी फॉर्मूले पर जोर दिया था लेकिन देश में एक बार फिर कोविड-19 का प्रकोप बढ़ रहा है। हफ्ते भर से जापान में रोजाना कोरोना के एक हजार मामले सामने आ रहे हैं। 
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जापान ने कोरोना महामारी को रोकने के लिए 3-सी यानि फॉर्मूला यानि कि क्लोज्ड स्पेस, क्राउडेड स्पेस और क्लोज कॉन्टैक्ट को अपनाया था। महामारी की शुरुआत में इस फॉर्मूले से काफी मदद मिली लेकिन मार्च में कोरोना के मामले बढ़ने लगे। जापान ने अप्रैल में आपातकाल घोषित कर दिया लेकिन मई में इसे हटा लिया गया। 
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इसके अलावा जापान में जुलाई में दावा किया था कि देश ने कोरोना पर काबू पा लिया है लेकिन अब हफ्ते भर से कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसके बाद देश में कोरोना की दूसरी लहर के होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि जानकारों ने इसका विश्लेषण किया है कि आखिर किन गलतियों की वजह से कोरोना के मामलों में तेजी आई...
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लैब टेस्टिंग नहीं बढ़ाई
जापान में कोरोना की पहली लहर के बाद लैब टेस्टिंग नहीं बढ़ाई गई थी। डॉक्टर्स की अपील के बाद जापान में कोरोना के आरटी-पीसीआर टेस्ट नहीं किए गए थे, जिससे देश में कोविड-19 का सामुदायिक फैलाव हुआ। इसके अलावा कोरोना मरीजों का डॉक्यूमेंटेशन मैनुअली किया गया, जिसमें भी कई तरह की गलतियां हुईं।

लोगों को समझाने में असफल रही सरकार
सरकारी अधिकारी लोगों को महामारी को लेकर जागरुक और सख्त नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित नहीं कर सके। जापान में लोगों ने सामान्य दिनचर्या की तरह ही काम किया। कोरोना से बचाव के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी गाइडलाइंस का भी पालन जापान में उचित ढंग से नहीं हुआ। इसमें बार-बार साबुन से हाथ धोना, घर पर रहने की अनिवार्यता, खान-पान सही रखना जैसी आदतें थीं।

पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी
जापान ने टोक्यो ओलंपिक बढ़ाने का फैसला अचानक से ले लिया, जिसके बाद सरकार के प्रति लोगों का भरोसा घटा। जापान सरकार ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि टोक्यो ओलंपिक में देरी क्यों हुई और इसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई।

तालमेल का अभाव
कोरोना वायरस में दूसरी लहर के पीछे सरकार और महामारी विशेषज्ञ समिति के बीच तालमेल की भी कमी रही। महामारी विशेषज्ञ समिति ने संक्रमण की शुरुआत के दौरान ही सामाजिक संपर्क 80 फीसदी घटाने की सिफारिश की थी और इसे और बढ़ाने के लिए भी कहा था। 


लेकिन सरकार ने इस संख्या को घटाकर 70 फीसदी और बाद में 60 फीसदी कर दिया, जिसकी वजह से लोगों ने भी इस बात को गंभीरता से नहीं लिया। 

मामले बढ़ने पर समिति को भंग कर दिया
सरकार ने जून में महामारी विशेषज्ञ समिति भंग कर दी, जबकि इस दौरान मामले बढ़ने लगे थे। जापान में जुलाई में कोरोना वायरस के मामलों की स्थिति और खराब हो गई थी। वहीं घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अभियान शुरू कर दिया गया। अभी देश में कोविड-19 के 55,667 मरीज हैं और 1,099 मौतें हो चुकी हैं।             
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