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ड्रैगन से टकराव नहीं: चीन समर्थक नेता को क्यों विदेश मंत्री बनाया जापान के प्रधानमंत्री ने?

Thu, 11 Nov 2021 06:23 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 11 Nov 2021 06:23 PM IST
सार

जापान में नई नियुक्ति पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किशिदा सरकार से अपील की कि वह चीन के साथ अपने मतभेदों पर सही रुख ले और चीन-जापान संबंधों को मिलजुल कर आगे बढ़ाए...

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Japan's Prime Minister Fumio Kishida has appointed Yoshimasa Hayashi as foreign minister, whose image is considered pro-China
योशिमासा हयाशी - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने एक ऐसे नेता को विदेश मंत्री नियुक्त किया है, जिनकी छवि चीन-समर्थन की मानी जाती है। किशिदा ने बीते 31 अक्तूबर को हुए आम चुनाव में वादा किया था कि दोबारा सत्ता में आने पर वे राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेंगे। इस बीच विदेश मंत्री के उनके चयन को लेकर अब यहां कयास लगाए जा रहे हैं।

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योशिमासा हयाशी को नया विदेश मंत्री बनाया गया है। वे पहले रक्षा मंत्री और शिक्षा मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। विश्लेषकों के मुताबिक ये चयन यह संकेत देता है कि किशिदा अमेरिका के साथ जापान के संबंध और मजबूत करना चाहते हैं, लेकिन साथ ही वे चीन से टकराव लेने के पक्ष में नहीं हैँ। 60 वर्षीय हयाशी ने अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षित हैँ। उन्हें देश के भावी प्रधानमंत्रियों में गिना जाता है। वे सांसदों के उस संघ के प्रमुख हैं, जिसका मकसद चीन के साथ रिश्ते को प्रोत्साहन देना है।

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चीन के प्रति दोस्ताना रुख

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में कुछ विश्लेषकों को यह कहते बताया गया है कि हयाशी चीन और ताइवान के मामले में बारीक नीति अपनाएंगे। अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन को बिना नाराज किए वे चीन और ताइवान के साथ संबंधों को सामान्य रखने की कोशिश करेंगे।

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सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी में काम कर चुके विश्लेषक अत्सुओ इतो ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा- ‘हयाशी का चीन के प्रति दोस्ताना रुख है। लेकिन उन्हें चीन के प्रति बाइडेन प्रशासन की रणनीति की पूरी समझ भी है। उनके ऐसी नीति अपनाने की संभावना नहीं है, जिससे अमेरिका के साथ जापान के रिश्तों में तनाव पैदा हो।’

किशिदा ने पूर्व रक्षा मंत्री जनरल नाकातानी को मानवाधिकारों पर अपना विशेष सलाहकार नियुक्त किया है। समझा जाता है कि नाकातानी की प्रमुख जिम्मेदारी चीन में उइघुर मुस्लिम आबादी के कथित मानव अधिकार हनन की निगरानी करना होगी। किशिदा ने एक प्रेस वार्ता में कहा- ‘चीन और रूस से अपने संबंधों के मामले में हम वो बातें दो टूक कहेंगे, जिन्हें कहने की जरूरत है। हम एक दृढ़ कूटनीतिक रुख तय करेंगे।’

जिन्होंने की मदद, उन्हें दिए पद

जापान में नई नियुक्ति पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किशिदा सरकार से अपील की कि वह चीन के साथ अपने मतभेदों पर सही रुख ले और चीन-जापान संबंधों को मिलजुल कर आगे बढ़ाए।

जापानी और विदेशी मीडिया में हयाशी की नियुक्ति ने काफी दिलचस्पी देखी गई है। मीडिया टिप्पणियों में कहा गया है कि ये नियुक्ति बताती है कि प्रधानमंत्री किशिदा अपनी राजनीतिक हैसियत को लेकर अब अधिक आश्वस्त हैं। उन्होंने इस नियुक्ति से यह संदेश दिया है कि उन्हें अपने खास लोगों को महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करने की पूरी आजादी हासिल है। हयाशी को सत्ताधारी पार्टी में किशिदा के गुट का ही नेता माना जाता है।



पूर्व प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा के इस्तीफा देने पर किशिदा अक्तूबर के आरंभ में प्रधानमंत्री बने थे। तब उन्होंने ज्यादातर अहम पद उन गुटों के नेताओं की दिए, जिन्होंने नेता पद के चुनाव में उनकी मदद की थी। लेकिन आम चुनाव के बाद जो मंत्रिमंडल उन्होंने बनाया है, उनमें ज्यादातर खास पद उन्होंने अपने विश्वस्त नेताओं को दिए हैं।

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