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फुमियो किशिदा को चुनौती: विपक्ष ने मोर्चा बनाया, क्या इस बार जापान में होगा सत्ता परिवर्तन?

Thu, 14 Oct 2021 03:31 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 14 Oct 2021 03:31 PM IST
सार

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कम्युनिस्ट पार्टी और बाकी तीन दलों के बीच गहरे मतभेद हैं। इसके बावजूद वे विपक्षी वोटों का बंटवारा रोकने के मकसद से एक मंच पर आई हैं। पहले के चुनावों में विपक्षी वोटों के बंटवारे के कारण एलडीपी कई सीटें जीतती रही है...

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Japan's main opposition parties have rallied against the ruling Liberal Democratic Party for the October 31 parliamentary election
फुमियो किशिदा - फोटो : Twitter@ Fumio Kishida

विस्तार

जापान में 31 अक्तूबर को होने वाले संसदीय चुनाव के लिए देश की प्रमुख विपक्षी पार्टियां लामबंद हो गई हैं। इससे सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) को तगड़ी चुनौती मिलने की संभावना है। बताया जाता है कि नए प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा को इस चुनौती का अंदाजा है। उन्होंने कहा है कि एलडीपी और उसके गठबंधन सहयोगी कोमीतो का मकसद इस बार साधारण बहुमत हासिल करना है। जबकि 465 सदस्यीय पिछले सदन में इस गठबंधन के पास 304 सीटें थीं। अकेले एलडीपी के पास 275 सीटें थीं।

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विपक्षी गठबंधन कॉन्स्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान (सीडीपी) और जापान की कम्युनिस्ट पार्टी के इर्द-गिर्द बना है। इन दलों में सहमति बनी है कि हर चुनाव क्षेत्र में वे किसी एक साझा उम्मीदवार का सर्मथन करेंगी। पिछले सदन में सीडीपी के पास 112 और कम्युनिस्ट पार्टी के पास 12 सीटें थीं। अब उनके साथ विपक्षी गठबंधन में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी और रीवा शिनसेनगुमी भी शामिल हो गई हैं। ये चारों पार्टियां 19 अक्तूबर से साझा चुनाव अभियान शुरू करेंगी।
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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कम्युनिस्ट पार्टी और बाकी तीन दलों के बीच गहरे मतभेद हैं। इसके बावजूद वे विपक्षी वोटों का बंटवारा रोकने के मकसद से एक मंच पर आई हैं। पहले के चुनावों में विपक्षी वोटों के बंटवारे के कारण एलडीपी कई सीटें जीतती रही है। अब विपक्षी गठबंधन में शामिल पार्टियों ने कहा है कि वे सभी एक दूसरे की नीतियों का सम्मान करेंगी और साझा उम्मीदवार को विजयी बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाएंगी।

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सीडीपी और कम्युनिस्ट पार्टी में पिछले 30 सितंबर को इस बात पर सहमति बनी थी कि अगर विपक्षी मोर्चा सत्ता में आया और सीडीपी को सबसे ज्यादा सीटें मिलीं, तो कम्युनिस्ट पार्टी सरकार बनाने के लिए उसे उसे अपना सीमित समर्थन देगी। कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि वह नई सरकार में किसी पद की मांग नहीं करेगी। अखबार जापान टाइम्स की एक टिप्पणी में इस समझौते को एतिहासिक बताया गया है। अखबार ने ध्यान दिलाया है कि पहली बार कम्युनिस्ट पार्टी ने चुनाव के बाद किसी पार्टी के साथ सहयोग करने का वादा किया है।

विश्लेषकों के मुताबिक कम्युनिस्ट पार्टी और बाकी पार्टियों के बीच कई अहम मुद्दों पर गंभीर मतभेद हैं। कम्युनिस्ट पार्टी अमेरिका के साथ जापान के सुरक्षा समझौते को वैध नहीं मानती। इसी समझौते के तहत जापान में अमेरिकी सैनिक अड्डे मौजूद हैं।

गठबंधन बनाने के लिए सीडीपी, कम्युनिस्ट पार्टी और बाकी दोनों छोटी पार्टियों ने एक संकल्प पत्र पर दस्तखत किए हैं। उसमें 2013 में पारित गोपनीयता कानून और 2015 में पारित सुरक्षा कानून को रद्द करने का वादा शामिल है। ये दोनों कानून पूर्व प्रधानमंत्री शिन्जो आबे के शासनकाल में बने थे। चारों दलों ने वादा किया है कि उनकी सरकार बनी तो वे ओकिनावा से हटा कर अमेरिकी सैनिक अड्डे को हेनोको इलाके में ले जाने के प्रस्ताव का विरोध करेगे। चारों दलों ने देश में न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि और आय कर और कॉरपोरेट टैक्स दरों की समीक्षा करने का वादा भी किया है। जापान का ट्रेड यूनियन फेडरेशन सीडीपी का एक बड़ा समर्थन आधार रहा है।

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