जापान: प्यार के लिए ठुकराया राजकुमारी ने शाही परिवार, आम शख्स से शादी कर छोड़ दी राजशाही
लंबे इंतजार के बाद जापान की राजकुमारी ने अपने प्रेमी से विवाह रचा लिया है। उन्होंने जिस व्यक्ति से शादी की है वह एक आम शख्स है और उसका शाही परिवार से कोई संबंध नहीं है। इसके चलते माको को अपना शाही दर्जा भी छोड़ना पड़ा है।
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जापान की राजकुमारी माको ने अपने शाही दर्जे को अलविदा कहते हुए मंगलवार को उस आम व्यक्ति से शादी कर ली, जिसे वह प्रेम करती हैं। सम्राट नारुहितो की भतीजी माको ने अपने ब्वॉयफ्रेंड केई कोमुरो से विवाह कर लिया है। दोनों इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी में साथ पढ़ाई करते थे। दोनों ने सितंबर 2017 में शादी करने का एलान किया था।
शाही परिवार के कानूनों के अनुसार केई से शादी करने के बाद अब माको का राजशाही का दर्जा छोड़ना पड़ा है। अब वह राजकुमारी नहीं बल्कि न्यूयॉर्क में एक आम नागरिक की तरह रहेंगी। माको ने अपनी मर्जी से आम आदमी से शादी रचाने के लिए परिवार छोड़ने वाली महिलाओं को दिए जाने वाले सामान्य 13 लाख डॉलर के भुगतान को भी ठुकरा दिया था।
चार साल पहले प्रेम, खूब सही आलोचना
जापान की राजकुमारी माको ने शाही दर्जे को ठुकराते हुए अरबों की दौलत छोड़कर अपने प्रेम की खातिर एक आम नागरिक से ब्याह रचा लिया है। चार साल पहले कॉलेज के दिनों में प्रेमी केई कोमुरो से सगाई का एलान करने के बाद माको को इतनी आलोचना सहनी पड़ी कि उन्हें पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर तक हो गया, लेकिन उन्होंने अंतत: कोमुरो से शादी की और शाही परिवार छोड़ दिया।
पिछले हफ्ते ही 30 साल की हुई हैं माको
बीते शनिवार 30 साल की हुई माको ने अपने 30 वर्षीय प्रेमी केई कोमुरो की खातिर शाही परिवार से मिलने वाले 13 लाख डॉलर भी ठुकरा दिए, जो आमतौर पर शाही दर्जा छोड़ने पर आम जापानी नागरिक बनने पर राजकुमारियों को दिए जाते हैं। अब उनका शाही परिवार से पूरी तरह नाता टूट चुका है। ‘इंपीरियल हाउसहोल्ड एजेंसी’ ने बताया कि माको और उनके प्रेमी केई कोमुरो के शादी के दस्तावेज मंगलवार सुबह महल के एक अधिकारी ने प्रस्तुत किए।
नवयुगल ने बयान जारी किया
शादी के बाद दोनों ने संवाददाता सम्मेलन में अपना बयान जारी किया लेकिन इस दौरान पत्रकारों की तरफ से कोई सवाल नहीं किए गए। विवाह के बाद न तो किसी तरह का भोज कार्यक्रम आयोजित किया गया और न ही कोई अन्य रस्में हुईं। शाही राजकुमारी का विवाह बेहद ही सामान्य तरीके से हुआ। दस्तावेजों पर दस्तखत के साथ ही दूल्हा-दुल्हन औपचारिक रूप से एक-दूजे के हो गए।
हाथ में गुलदस्ता लिए शाही महल से बाहर आईं
मंगलवार सुबह राजकुमारी माको हल्के नीले रंग की पोशाक पहने और हाथ में एक गुलदस्ता लिए शाही महल से बाहर आईं। वहां वह अपने माता-पिता क्राउन प्रिंस अकिशिनो, क्राउन प्रिंसेस किको और अपनी बहन काको से मिलीं। वे बहुत ही सामान्य दिख रही थीं। हालांकि महल के डॉक्टरों ने बताया कि माको इस माह की शुरुआत में तनाव से जूझ रही थीं और अब वह उससे उबर रही हैं। वे उनके मंगेतर कोमुरो को निशाना बनाए जाने की खबरों से काफी तनाव में थीं। 2017 में सगाई के बाद 2018 में कोमुरो कानून की पढ़ाई करने न्यूयॉर्क चले गए थे और अब डिग्री लेकर लौटे हैं।
घोटाले की वजह से हुई थी विवाह में देरी
बता दें कि उनकी सगाई के बाद शादी में देरी माको की सास के पैसे से जुड़े एक घोटाले की वजह से हुई। शाही परिवार इस मामले को अपने लिए एक शर्मिंदगी की तरह मानता है। माको और केई कोमुरो के बीच प्रेम उस वक्त पनपा जब 2017 में वे दोनों कॉलेज में पढ़ते थे। दोनों की शादी बिना शाही तौर-तरीकों के बेहद सामान्य तरीके से आयोजित हुई।
कोमुरो की मां का पूर्व मंगेतर से था विवाद
माको ने जब तीन साल पहले कोमुरो से शादी की घोषणा की थी तब एक अखबार के जरिए पता लगा था कि कोमुरो की मां और उसके पूर्व मंगेतर के बीच एक वित्तीय विवाद है। इसमें दावा किया गया कि मां और बेटे ने करीब 35,000 डॉलर का कर्ज नहीं चुकाया था। कोमुरो ने कहा था कि यह पैसा उपहार स्वरूप दिया गया था, किसी ऋण के रूप में नहीं।
जिंदगी का पहला पासपोर्ट बनवाएंगी माको
माको और उनके पति केई कोमुरो ने शादी के बाद न्यूयॉर्क में रहने का फैसला किया है। हालांकि माको अभी कुछ समय तक जापान में ही रहेंगी और शाही परिवार छोड़ने से संबंधी कामकाज निपटाएंगी। इसके अलावा उन्हें अपनी जिंदगी का पहला पासपोर्ट भी बनवाना है।
कम हो रहे शाही सदस्य, उत्तराधिकारियों की कमी
‘इंपीरियल हाउस’ कानून के अनुसार, शाही परिवार की महिला सदस्यों के एक आम नागरिक से शादी करने पर, उन्हें अपना शाही दर्जा खोना पड़ता है। इस प्रथा के कारण शाही परिवार के सदस्य कम होते जा रहे हैं और सिंहासन के उत्तराधिकारियों की कमी है। नारुहितो के बाद, उत्तराधिकार की दौड़ में सिर्फ अकिशिनो और उनके पुत्र प्रिंस हिसाहितो हैं। सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों की एक समिति इस संबंध में चर्चा कर रही है, लेकिन रूढ़िवादी अब भी महिला उत्तराधिकार या महिला सदस्यों को शाही परिवार का मुखिया ना बनाने पर अड़े हैं।