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Hindi News ›   World ›   Japan new PM Fumio Kishida held a phone call with Chinese President Xi Jinping shortly after delivering his first policy speech

फुमियो किशिदा की शी जिनपिंग से बातचीत: क्या चीन के प्रति नरम रुख अपनाएंगे जापान के नए प्रधानमंत्री?

Sat, 09 Oct 2021 04:57 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 09 Oct 2021 04:57 PM IST
सार

विश्लेषकों का कहना है कि किशिदा के इस भाषण में चीन के प्रति जापान की नीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं मिला। लेकिन उन्होंने चीन के खिलाफ आक्रामक रुख भी नहीं अपनाया। संभवतया इसे ही चीन ने एक सकारात्मक संकेत माना है...

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Japan new PM Fumio Kishida held a phone call with Chinese President Xi Jinping shortly after delivering his first policy speech
फुमियो किशिदा और शी जिनपिंग - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

जापान के नए प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने शुक्रवार को अपना नीति संबंधी पहला भाषण देने के कुछ देर बाद ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों पक्षों ने आपसी संवाद और सहयोग बढ़ाने, मतभेदों को नियंत्रित करने, और चुनौतियों का मिलजुल कर मुकाबला करने पर सहमति जताई। चीनी मीडिया में किशिदा के इस रुख का उत्साह के साथ स्वागत किया गया है।

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चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट में चीनी पर्यवेक्षकों के हवाले से कहा गया है कि किशिदा के नीतिगत भाषण और शी के साथ फोन वार्ता इस बात का संकेत है कि अब चीन-जापान संबंधों में एक नई शुरुआत होगी। चीनी पर्यवेक्षकों ने कहा- ‘ऐसा लगता है कि किशिदा सरकार की नजर भविष्य पर है और उसका नजरिया रचनात्मक और सहयोग वाला है। उसके कार्यकाल में नीतियों में बदलाव से चीन-अमेरिका संबंधों में कुछ नई स्थितियां पैदा होंगी और जापान अपने हितों पर पुनर्विचार करेगा।’
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चीनी मीडिया के मुताबिक किशिदा ने शी से बातचीत के दौरान ‘इतिहास से सीखते हुए रचनात्मक और स्थिर संबंध विकसित करने’ की इच्छा जताई। उन्होंने कहा- ‘जापान-चीन के साथ आर्थिक और जनता के स्तर पर संबंध बढ़ाने, महामारी नियंत्रण और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग करने का इच्छुक है।’ इसके जवाब में शी कहा कि चीन और जापान निकट पड़ोसी हैं।  
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किशिदा ने शुक्रवार को दिए अपने नीतिगत भाषण में ‘पूंजीवाद के नए मॉडल’ पर अमल करते हुए जापानी अर्थव्यवस्था का रूप बदलने का संकल्प जताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ-साथ धन का बंटवारा भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने देश में मध्य वर्ग का दायरा बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया। किशिदा ने प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार देश की संसद को संबोधित किया।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीनी राष्ट्रपति के साथ बातचीत में जो भावना किशिदा ने दिखाई, उसका वैसा मजबूत संकेत उनके नीतिगत भाषण में नहीं था। इसमें उन्होंने जापान-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने की बात कही। साथ ही ‘मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए समान सोच वाले देशों के साथ’ मिल कर काम करने का इरादा जताया। उन्होंने क्वाड्रेंगुलर सिक्योरिटी डायलॉग (क्वॉड) में शामिल देशों- अमेरिका, भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ जापान का सहयोग बढ़ाने की घोषणा भी की।

मानव अधिकारों के मुद्दे पर किशिदा ने कहा कि उनकी सरकार इस मामले में जापान की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी बढ़ाएगी। साथ ही जलवायु परिवर्तन और परमाणु अप्रसार के मसलों को हल करने के लिए सक्रिय भागीदारी निभाएगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक मानव अधिकार के मसले को आम तौर पर चीन से जोड़ कर देखा जाता है।

विश्लेषकों का कहना है कि किशिदा के इस भाषण में चीन के प्रति जापान की नीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं मिला। लेकिन उन्होंने चीन के खिलाफ आक्रामक रुख भी नहीं अपनाया। संभवतया इसे ही चीन ने एक सकारात्मक संकेत माना है। इस मामले में चीन की उम्मीदें कितनी पूरी होंगी, फिलहाल इस बारे में कुछ ठोस रूप से नहीं कहा जा सकता।

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