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जापान में आपातकाल: कितना 'महंगा' पड़ेगा टोक्यो ओलंपिक, उसका अभी अंदाजा ही नहीं

Fri, 23 Jul 2021 05:10 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 23 Jul 2021 05:10 PM IST
सार

टोक्यो से प्रकाशित अखबार जापान टाइम्स की एक टिप्पणी में कहा गया है कि खेलों के आयोजन पर अड़े रहने के कारण प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा इस वक्त देश में कड़ी आलोचना का शिकार हो रहे हैं। उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने लोगों की सेहत की परवाह ना करके ओलंपिक से होने वाले आर्थिक लाभों पर नजर टिकाए रखी...

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japan media said, the priority of the Japanese government not to control the pandemic, but to get the Olympic Games completed
तोक्यो ओलंपिक में प्रदर्शनकारी - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

जापान सरकार ने ओलंपिक और पैरा ओलंपिक खेलों के आयोजन के लिए उस समय अपने ज्यादातर संसाधन झोंक दिए, जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक हाल के महीनों में जापान सरकार की प्राथमिकता महामारी पर काबू पाना नहीं, बल्कि ओलंपिक खेलों को संपन्न कराना रही है। इसके लिए ओलंपिक आयोजन से जुड़े कर्मचारियों, ठेका मजदूरों, और पत्रकारों को कोरोना वैक्सीन लगाने को तरजीह दी गई। बाकी देश की कीमत पर दूसरे मेडिकल संसाधन भी इसमें झोंके गए।

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जापान में ज्यादातर लोगों को अभी भी वैक्सीन नहीं लग पाया है। जबकि टोक्यो ओलंपिक के आयोजन से जुड़े लोगों के टीकाकरण पर पूरा ध्यान केंद्रित रहा है। खेलों के आयोजन के लिए सात हजार नर्सों और डॉक्टरों की सेवा ली गई हैं। कई अस्पतालों को सिर्फ एथलीटों के लिए रिजर्व कर दिया गया है। कोरोना संक्रमण के कारण इन खेलों के आयोजन की लागत भी काफी बढ़ गई है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के मुताबिक इन खेलों के आयोजन पर 2.7 खरब येन खर्च होंगे। इनमें से 1.6 खरब येन जापान सरकार के खजाने से आएगा।
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टोक्यो में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण अभी आपातकाल लगा हुआ है। इस बीच ओलंपिक खेल कराने की जिद को लेकर जापान में नाराजगी अभी भी बनी हुई है। टोक्यो से प्रकाशित होने वाले अखबार अशाही शिम्बुन ने इसी हफ्ते एक सर्वे प्रकाशित किया। उसके मुताबिक जापान के 55 फीसदी लोग इस आयोजन के खिलाफ हैं। 68 फीसदी लोगों ने राय जताई कि मौजूदा माहौल में सुरक्षित ढंग से खेलों को संपन्न करा पाना संभव नहीं होगा।
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टोक्यो से प्रकाशित अखबार जापान टाइम्स की एक टिप्पणी में कहा गया है कि खेलों के आयोजन पर अड़े रहने के कारण प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा इस वक्त देश में कड़ी आलोचना का शिकार हो रहे हैं। उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने लोगों की सेहत की परवाह ना करके ओलंपिक से होने वाले आर्थिक लाभों पर नजर टिकाए रखी। लेकिन संक्रमण बढ़ने पर उनकी सरकार को दर्शकों के आने पर रोक लगानी पड़ी। इससे संभावित आर्थिक लाभ भी हाथ से निकल गया है।

मार्केट एजेंसी नोमुरा रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक दर्शकों पर रोक लगने के बाद ओलंपिक आयोजन के कारण अर्थव्यवस्था को होने वाले लाभ में 7.2 फीसदी की गिरावट आ गई है। पहले इन खेलों से 1.68 खरब येन की आमदनी होने की संभावना थी। टिकट, होटल बुकिंग और परिवहन से जो आय होती, दर्शकों पर रोक लगने के कारण अब नहीं होगी। ये नुकसान 131 अरब येन के बराबर का होगा।

होटलों से कहा गया है कि वे शाम सात बजे के बाद अल्कोहल मुहैया ना कराएं। इससे भी आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है। बीते दिनों में टोक्यो पर कोरोना संक्रमण का साया गहराया है। गुरुवार को वहां 1,979 नए मामले सामने आए। कम से कम तीन एथलीट यहां आने के बाद कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। संक्रमित एथलीटों के बारे में कहा गया है कि उनकी ओलंपिक यात्रा सिर्फ इतनी है कि वे टोक्यो आए, यहां आइसोलेशन में रहे और फिर अपने देश लौट जाएंगे।


आंशका है कि खेलों के आगे बढ़ने और उनकी समाप्ति के बाद तोक्यो में संक्रमण की स्थिति और गंभीर होगी। उसकी कीमत भी जापान को चुकानी होगी। जानकारों ने कहा है कि असल में ये खेल जापान के लिए कितने महंगे साबित होंगे, उसका अनुमान लगाना भी अभी संभव नहीं है।

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