Shinzo Abe Shot Dead: शिंजो आबे की हत्या से लगे झटके से उबरने में लंबा वक्त लगेगा जापान को
साल 2017 के आंकड़ों के मुताबिक जापानी नागरिकों में से सिर्फ लगभग तीन लाख 77 हजार के पास बंदूकें थीं। यानी हर 100 व्यक्ति में सिर्फ 0.25 के पास हथियार थे। जबकि अमेरिका में हर सौ व्यक्ति पर 120 बंदूकें मौजूद हैं। जापान में राजनेताओं को हिंसा का शिकार बनाने की घटनाएं भी कभी-कभार ही हुई हैं...
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पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या से जापान लोग गहरे सदमे में हैं। लोग यह सोच कर आवाक हैं कि देश में हथियार नियंत्रण की इतनी सख्त नीति लागू होने के बावजूद कैसे एक व्यक्ति ने देश के सबसे ऊंचे कद वाले नेता को मार डाला। आबे की शुक्रवार को नारा शहर में उस समय गोली मार कर हत्या कर दी गई, जब वे वहां एक चुनाव सभा को संबोधित कर रहे थे।
ऐसी हत्याएं जापान में कभी कभार ही होती हैं। साढ़े 12 करोड़ आबादी वाले इस देश में 2018 में बंदूक से हुई हिंसा में नौ लोगों की जान गई थी। ऑस्ट्रेलिया में सिडनी यूनिवर्सिटी स्थित स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने उस वर्ष अलग-अलग देशों में ऐसी हिंसा में हुई मौतों के बारे में एक रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक उस वर्ष अमेरिका में 39,740 लोग फायरिंग में मारे गए थे। उसके बाद के वर्षों में भी जापान में ऐसी हिंसा की खबरें इक्की-दुक्की ही रहीं। इसीलिए लोगों के लिए आबे की हत्या की खबर को गले उतार पाना मुश्किल हो रहा है।
जापान में नहीं है गन कल्चर
थिंक टैंक इंटरनेशनल सिक्योरिटी इंडस्ट्रियल काउंसिल की जापान शाखा की निदेशक नैंसी स्नो ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा कि इस हत्या के बाद जापान की सूरत हमेशा के लिए बदल जाएगी। उन्होंने कहा- ‘यह न सिर्फ एक असामान्य घटना है, बल्कि जापान की संस्कृति को देखते हुए इसे गले उतार पाना भी कठिन है। जापान के लोग अमेरिका जैसे गन कल्चर की बात सोच भी नहीं पाते। इसीलिए ये खबर आने पर लोग आवाक रह गए।’
जापान के टीवी चैनल एनएचके ने शुक्रवार को बताया था कि 41 वर्षीय जिस व्यक्ति ने आबे की हत्या की, उसने हैंडगन खुद बनाई थी। जापान के कानून के तहत सिर्फ शॉटगन और एयर राइफल रखने की इजाजत लोगों की दी जाती है। हैंडगन का लाइसेंस यहां नहीं मिलता। इसलिए समझा जाता है कि आरोपी हत्यारे ने बेहद जटिल प्रक्रिया से गुजरते हुए हैंडगन बनाने की चीजें जुटाई होंगी।
2007 में मेयर को मारी थी गोली
साल 2017 के आंकड़ों के मुताबिक उस वर्ष जापानी नागरिकों में से सिर्फ लगभग तीन लाख 77 हजार के पास बंदूकें थीं। यानी हर 100 व्यक्ति में सिर्फ 0.25 के पास हथियार थे। जबकि अमेरिका में हर सौ व्यक्ति पर 120 बंदूकें मौजूद हैं। जापान में राजनेताओं को हिंसा का शिकार बनाने की घटनाएं भी कभी-कभार ही हुई हैं। आबे के पहले ऐसी आखिरी घटना 2007 में हुई थी, जब नाकासाकी शहर के मेयर इछो इटो की हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या के लिए एक गैंगेस्टर को दोषी ठहराया गया था।
नागासाकी की उस घटना के बाद जापान में बंदूक नियंत्रण के उपाय और सख्त कर दिए गए। बंदूक रखने वाले लोगों के लिए सजा सख्त कर दी गई। इसके तहत अगर आपराधिक गिरोह से जुड़ा कोई व्यक्ति हथियार रखता है, तो उसे 15 साल की सजा दी जाती है। अगर सार्वजनिक स्थल पर बंदूक का प्रदर्शन किया गया, तो दोषी व्यक्ति को उम्र कैद हो सकती है। ऐसे कड़े उपायों के बावजूद शिंजो आबे की हत्या की हो गई। इसके झटके से जापान हिल गया है।