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त्रिनिदाद में बोले जयशंकर: गिरमिटिया को मिलेगा भारत का साथ, दस्तावेजों की कमी के बावजूद OCI में मिलेगी मदद

Mon, 11 May 2026 05:46 AM IST
राकेश कुमार अमर उजाला, पोर्ट ऑफ स्पेन।
अमर उजाला, पोर्ट ऑफ स्पेन। Published by: राकेश कुमार Updated Mon, 11 May 2026 05:46 AM IST
सार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने त्रिनिदाद और टोबैगो की यात्रा के दौरान भारतीय मूल के लोगों विशेषकर गिरमिटिया समुदाय के साथ भारत के रिश्तों को नई ऊंचाई दी। उन्होंने घोषणा की कि जिन प्रवासियों के पास नागरिकता के पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं, भारत सरकार उनकी ओसीआई कार्ड प्राप्त करने में मदद करेगी। जयशंकर ने और क्या-क्या कहा? खबर में जानिए...

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त्रिनिदाद एवं टोबैगो की प्रधानमंत्री के साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कैरेबियाई देश त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय मूल के लोगों के साथ भारत के गहरे होते संबंधों को रेखांकित किया। जयशंकर ने कहा कि ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया (ओसीआई) योजना के प्रति विदेश में रह रहे भारतीय मूल के लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और भारतीय उच्चायोग को बड़ी संख्या में आवेदन मिल रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन लोगों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, उनकी मदद के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। जयशंकर ने त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर के साथ ऐतिहासिक नेल्सन द्वीप का दौरा किया, जहां कभी गिरमिटिया भारतीय पहली बार पहुंचे थे।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने 180 वर्ष पहले त्रिनिदाद और टोबैगो पहुंचे पहले भारतीय मजदूरों को याद किया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में नया जीवन बसाने वाले भारतीय प्रवासियों की दृढ़ता, संकल्प और साहस को श्रद्धांजलि दी। जयशंकर ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भारतीय प्रवासी समुदाय की छठी पीढ़ी तक ओसीआई कार्ड देने की घोषणा ने दोनों देशों के सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्तों को नई मजबूती दी है। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, भारत की सहायता से नेल्सन द्वीप पर शुरू की गई क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट साझा विरासत और ऐतिहासिक यात्रा को संरक्षित करने में मदद करेगी। जयशंकर 2 मई से 10 मई तक तीन देशों की यात्रा पर थे। दौरे के अंतिम दिन उन्होंने त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की और दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों की सराहना की।
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गिरमिटिया समुदाय की विरासत संरक्षित करने का लगातार किया जा रहा प्रयास
जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुआ अभिलेखीय सहयोग समझौता भारतीय मूल के लोगों को अपनी पैतृक जड़ों  की पहचान करने और भारत में अपने परिवारों से दोबारा जुड़ने  में मदद करेगा। भारत सरकार गिरमिटिया समुदाय की विरासत को संरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। विदेश मंत्री ने कहा, ये प्रवासी अपने साथ भारतीय परंपराएं, आस्था और जीवन शैली लेकर आए थे, इसलिए इस इतिहास को विरासत स्थल के रूप में संरक्षित किया जाना महत्वपूर्ण है। समझौते से भारतीय मूल के लोगों को अपने पूर्वजों और भारत स्थित रिश्तेदारों की जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
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भारत की मदद से हुई कई परियोजनाओं की शुरुआत
जयशंकर ने अपनी यात्रा के दौरान कृषि प्रसंस्करण केंद्र की शुरुआत की और स्थायी कृत्रिम अंग केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर के साथ दक्षिण त्रिनिदाद में भारत की सीड्स पहल से संचालित एग्रो-प्रोसेसिंग सुविधा का संयुक्त रूप से लोकार्पण किया। जयशंकर ने कहा कि यह परियोजना  लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र को मजबूती देगी और कृषि क्षेत्र को नई गति प्रदान करेगी।


जुलाई, 2025 में पीएम मोदी ने की थी यात्रा
पिछले साल जुलाई में पीएम मोदी ने त्रिनिदाद व टोबैगो की यात्रा के दौरान वहां के भारतीय मूल के लोगों की छठी पीढ़ी तक ओसीआई कार्ड की घोषणा की थी। इसे भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। बता दें कि 1845 से 1917 के बीच भारतीय उपमहाद्वीप से करीब 1.43 लाख मजदूर त्रिनिदाद पहुंचे थे, जिनमें अधिकांश उत्तर भारत व बिहार से थे। आज उनकी पांचवीं व छठी पीढ़ी देश की कुल आबादी का लगभग 40-45 प्रतिशत हिस्सा है।

भारत-त्रिनिदाद के बीच 8 समझौते
जयशंकर के दौरे पर भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने पर्यटन, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और आयुर्वेद समेत विभिन्न क्षेत्रों में आठ समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौतों में पर्यटन सहयोग, त्रिनिदाद एवं टोबैगो के विदेश व कैरिकॉम मामलों के मंत्रालय भवन का सौर ऊर्जा से संचालन, वेक्टर नियंत्रण, नेल्सन द्वीप के बुनियादी ढांचे के उन्नयन व यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट इंडीज में आयुर्वेद पर भारतीय चेयर स्थापित करना शामिल है। जयशंकर ने प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर की मौजूदगी में स्कूली बच्चों को 2,000 लैपटॉप की पहली खेप सौंपी।

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