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Laos: जयशंकर ने की चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात, बोले- एलएसी और पूर्व में हुए समझौतों का हो पूर्ण सम्मान
Thu, 25 Jul 2024 08:53 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वियनतियाने (लाओस)
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वियनतियाने (लाओस)
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 25 Jul 2024 08:53 PM IST
सार
Laos: आसियान के विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की। जयशंकर ने कहा कि एलएसी और पूर्व में हुए समझौतों के प्रति पूर्ण सम्मान जरूरी है।
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एस जयशंकर, वांग यी
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को अपने चीनी समकक्ष वांग से मुलाकात की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) व पूर्व में हुए समझौतों के प्रति 'पूर्ण सम्मान' सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। दोनों नेताओं की एक महीने के भीतर यह दूसरी मुलाकात है। उन्होंने सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मजबूत दिशानिर्देश देने की जरूरत पर भी सहमति जताई।
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आसियान के विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर वांग यी से मुलाकात के बाद जयशंकर ने एक्स पर कहा, "आज वियनतियाने में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के पोलित ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। हमने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा को जारी रखा। सीमा की स्थिति निश्चित रूप से हमारे संबंधों की स्थिति पर प्रतिबिंबित होगी।"
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जयशंकर-वागं की यह मुलाकात पूर्वी लद्दाख में पांच साल पहले से जारी सीमा विवाद के बीच हुई है। विदेश मंत्री आगे कहा, हमने सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दिशानिर्देश देने की जरूरत पर सहमति जताई। एलएसी और पिछले समझौतों के लिए पूर्ण सम्मान सुनिश्चित होना चाहिए। हमारे संबंधों को स्थिर करना हमारे पारस्परिक हित में है। हमें तात्कालिक मुद्दों पर तात्कालिकता की भावना के साथ विचार करना चाहिए।
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इस महीने की शुरुआत में दोनों नेताओं ने कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन के मौके पर मुलाकात की थी। भारत का कहना है कि चीन के साथ उसके संबंध तब तक सामान्य नहीं हो सकते, जब तक कि सीमावर्ती इलाकों में शांति न हो।
दोनों देशों की सेनाओं के बीच मई 2020 से गतिरोध चल रहा है। सीमा विवाद का अभी तक पूरी तरह से समाधान नहीं हो पाया है। हालांकि, दोनों पक्ष टकराव वाली जगहों से पीछे हटे हैं। जून 2020 गलवान घाटी में खूनी झड़प के बाद दोनों देशों के संबंध में गिरावट आई। यह बीते कई दशकों में दोनों सेनाओं के बीच सबसे बड़ा सैन्य संघर्ष था।