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Jaishankar Visit: यूरोप की बड़ी रणनीतिक बैठक में पहुंचे जयशंकर, साइप्रस में वैश्विक मुद्दों पर होगी अहम चर्चा

Thu, 28 May 2026 02:24 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, निकोसिया
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, निकोसिया Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 28 May 2026 02:24 AM IST
सार

India EU Relations: विदेश मंत्री एस जयशंकर साइप्रस में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अहम जिमनिख बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। बैठक में वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा संकट, पश्चिम एशिया तनाव और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत की मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आइए, विस्तार से जानते हैं, ये बैठक कितनी महत्वपूर्ण है...

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Jaishankar arrives at major European strategic meet key discussions on global issues to take place in Cyprus
जयशंकर की यूरोपीय यात्रा क्यों अहम? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर बुधवार को साइप्रस पहुंचे, जहां वह यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अहम अनौपचारिक बैठक में हिस्सा लेंगे। इस बैठक में यूरोप और दुनिया के सामने खड़ी बड़ी भू-राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ऐसे समय में यह बैठक हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव, ऊर्जा संकट और वैश्विक व्यापार को लेकर कई देशों की चिंता बढ़ी हुई है। भारत की मौजूदगी को भी इस बैठक में खास महत्व दिया जा रहा है।
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जिमनिख बैठक इतनी अहम क्यों मानी जाती है?
यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की यह अनौपचारिक बैठक “जिमनिख” नाम से जानी जाती है। इसमें सदस्य देशों के विदेश मंत्री और साझेदार देश वैश्विक हालात पर खुलकर चर्चा करते हैं। बैठक में सुरक्षा, रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय संकट जैसे मुद्दे शामिल रहते हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि वह इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए साइप्रस पहुंचे हैं। उन्होंने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख और साइप्रस के विदेश मंत्री को निमंत्रण के लिए धन्यवाद भी दिया।
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इस बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है?
  • विशेषज्ञों के मुताबिक, बैठक में पश्चिम एशिया संकट, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और यूरोप की रणनीतिक चुनौतियों पर चर्चा हो सकती है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप पहले से ही आर्थिक और सुरक्षा दबाव झेल रहा है। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग को भी अहम माना जा रहा है।
  • भारत आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और कई वैश्विक मुद्दों पर उसकी भूमिका मजबूत हुई है। यूरोप भी भारत को रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग बढ़ सकता है। जयशंकर की मौजूदगी इसी दिशा में अहम मानी जा रही है।

साइप्रस और भारत के रिश्तों का क्या महत्व है?
साइप्रस लंबे समय से भारत का करीबी सहयोगी माना जाता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और कूटनीतिक संबंध मजबूत रहे हैं। साइप्रस यूरोपीय संघ का सदस्य होने के कारण भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इस यात्रा से भारत और साइप्रस के रिश्तों को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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पश्चिम एशिया संकट का असर बैठक पर कितना रहेगा?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर खतरे ने कई देशों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में इस बैठक में ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर भी गंभीर चर्चा हो सकती है। भारत भी इन मुद्दों पर अपनी चिंता पहले कई मंचों पर जाहिर कर चुका है।

क्या भारत-यूरोप संबंध और मजबूत होंगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों को नई दिशा दे सकती है। दोनों पक्ष व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और जलवायु जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक बदलावों से गुजर रही है।

जिमनिख बैठक को सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं माना जाता। यहां होने वाली चर्चाओं का असर वैश्विक राजनीति और रणनीति पर भी पड़ता है। पश्चिम एशिया, रूस-यूक्रेन युद्ध और आर्थिक संकट जैसे मुद्दों के बीच यह बैठक कई अहम संकेत दे सकती है। इसी वजह से दुनिया की नजर साइप्रस में हो रही इस बड़ी रणनीतिक बैठक पर टिकी हुई है।
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