Italy Election: इटली में जीत ने जियोर्जिया मेलोनी को बनाया पूरे यूरोप के धुर-दक्षिणपंथ का चेहरा
Italy Election: मेलोनी के नेतृत्व वाले गठबंधन में दो और धुर दक्षिणपंथी पार्टियां शामिल हैं। उनमें एक मेतियो साल्विनी के नेतृत्व वाली लीग और दूसरी सिल्वियो बर्लुस्कोनी के नेतृत्व वाली फोर्जा इतालिया है। विश्लेषकों के मुताबिक ये तीनों पार्टियां यूक्रेन मामले में रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का समर्थन नहीं करतीं...
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इटली के चुनाव में जीत के बाद जियोर्जिया मेलोनी को अब यूरोप में धुर दक्षिणपंथ का नया चेहरा माना जा रहा है। उनकी सफलता से यूरोप के कई देशों में धुर दक्षिणपंथी पार्टियों में उत्साह देखा गया है। विश्लेषकों ने कहा है कि इससे पहले से ही फैल रही धुर दक्षिणपंथ की लहर को अब नया बल मिलेगा।
रविवार रात जब एग्जिट पोल में मेलोनी के ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत का अनुमान लगाया गया, तो उसके बाद उन्हें सबसे पहली बधाई हंगरी के धुर दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान की पार्टी ने दी। मेलोनी को भेजे बधाई संदेश में पार्टी के राजनीतिक निदेशक बेलेज्स ऑर्बान ने कहा- ‘आज के मुश्किल वक्त में हमें ऐसे दोस्तों की जरूरत है, जो यूरोप के सामने मौजूद चुनौतियों पर समान नजरिया रखते हों।’ इसके पहले इस महीने जब यूरोपीय संसद में ऑर्बान की ‘तानाशाही’ की निंदा के लिए प्रस्ताव लाया गया था, तब मेलोनी की पार्टी के सदस्यों ने उसके खिलाफ मतदान किया था।
ऑर्बान के अलावा मेलोनी का पोलैंड की सत्ताधारी धुर दक्षिणपंथी नेशनलिस्ट लॉ एंड जस्टिस पार्टी, स्वीडन की आव्रजक विरोधी डेमोक्रेटिक पार्टी और स्पेन की धुर दक्षिणपंथी वॉक्स पार्टी के साथ भी निकट सहयोग रहा है। इस वर्ष गर्मियों में स्पेन के मार्बेला शहर में हुई वॉक्स की रैली में भाग लेने मेलोनी वहां गई थीं। इस बार के चुनाव वॉक्स ने इटली के मतदाताओं से ब्रदर्स ऑफ इटली को समर्थन देने की अपील की थी।
अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्री नाडिया उर्बिनाती ने कहा है- ‘मेलोनी की महत्त्वाकांक्षा है कि अपने मॉडल की नुमाइंदगी सिर्फ इटली में नहीं, बल्कि पूरे यूरोप में करें। यह इटली के दक्षिणपंथ के लिए बिल्कुल नई बात है। मेलोनी दूसरे देशों के कंजरवेटिव दलों से संपर्क में रहती हैं। ये तमाम दल ऐसा यूरोप बनाना चाहते हैं, जहां आज कम नागरिक अधिकार मौजूद हों।’
रोम स्थित सेपिएंजा यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र की प्रोफेसर मातिया दिलेती के मुताबिक विचाराधारा के साथ व्यावहारिकता का तालमेल बनाने की क्षमता की वजह से मेलोनी कामयाब हुई हैं। इस रूप में वे फ्रांस की धुर दक्षिणपंथी नेता मेरी ली पेन से अधिक प्रभावशाली साबित हुई हैँ। अब वे यूरोप में उग्र राष्ट्रवाद की मॉडल बन कर उभरी हैं।
दिलेती ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘मेलोनी जो अस्पष्टता बनाए रखती हैं, उसे समझना सबसे प्रमुख बात है। आर्थिक नीतियों के मामले में वे यूरोपियन यूनियन (ईयू) से समझौता करेंगी। लेकिन ईयू ने उनकी सरकार पर ज्यादा दबाव बनाया, तो वे उग्र दक्षिणपंथ के अपने जाने-पहचाने रूप में नजर आ सकती हैं।’
मेलोनी के नेतृत्व वाले गठबंधन में दो और धुर दक्षिणपंथी पार्टियां शामिल हैं। उनमें एक मेतियो साल्विनी के नेतृत्व वाली लीग और दूसरी सिल्वियो बर्लुस्कोनी के नेतृत्व वाली फोर्जा इतालिया है। विश्लेषकों के मुताबिक ये तीनों पार्टियां यूक्रेन मामले में रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का समर्थन नहीं करतीं। चुनाव अभियान के दौरान मेलोनी ने इस पर चुप्पी साधे रखी, लेकिन साल्विनी और बर्लुस्कोनी ने दो टूक कहा कि प्रतिबंधों से नुकसान इटली के लोगों को हो रहा है। ऐसे में अनुमान है कि इटली की नई सरकार का ईयू से पहला टकराव यूक्रेन के मसले पर हो।
मेलोनी ने चुनाव में जीत के बाद वादा किया है कि वे इटली के सभी निवासियों का प्रतिनिधित्व करेंगी। लेकिन इटली के प्रमुख मध्यमार्गी दल डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपनी हार स्वीकार करते हुए कहा- ‘यह देश के लिए दुखद दिन है। दक्षिणपंथ ने संसद में बहुमत हासिल कर लिया है।’ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव नतीजों के औपचारिक एलान के बाद राष्ट्रपति सर्गियो मेतारेला मेलोनी को सरकार बनाने को कहेंगे, लेकिन मुमकिन है कि गठबंधन सरकार के अंतिम रूप देने में एक महीना लग जाए।