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इसरो का कायल हुआ नासा, कहा- लैंडर ‘विक्रम’ की सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश ने हमें प्रेरित किया

Sun, 08 Sep 2019 04:49 PM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: आसिम खान Updated Sun, 08 Sep 2019 04:49 PM IST
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ISRO praises NASA, Lander Vikram attempt to soft land inspired us 
प्रतीकात्मक तस्वीर

चंद्रयान 2 मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सराहनीय प्रयास का नासा भी कायल हो गया है और उसने कहा कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ की सॉफ्ट लैंडिंग कराने की भारत की कोशिश ने उसे ‘प्रेरित’ किया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि वह भारतीय एजेंसी के साथ सौर प्रणाली पर अन्वेषण करना चाहती है।

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चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग का इसरो का अभियान शनिवार को अपनी तय योजना के मुताबिक पूरा नहीं हो सका। लैंडर का अंतिम क्षणों में जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया। इसरो के अधिकारियों के मुताबिक चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर पूरी तरह सुरक्षित और सही है।
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नासा ने शनिवार को ‘ट्वीट’ किया, ‘अंतरिक्ष जटिल है। हम चंद्रयान 2 मिशन के तहत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की इसरो की कोशिश की सराहना करते हैं। आपने अपनी यात्रा से हमें प्रेरित किया है और हम हमारी सौर प्रणाली पर मिलकर खोज करने के भविष्य के अवसरों को लेकर उत्साहित हैं।’

दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए अमेरिका के कार्यवाहक सहायक मंत्री एलिस जी वेल्स ने ट्वीट किया, हम चंद्रयान 2 के संबंध में इसरो के बेहतरीन प्रयास के लिए उसे बधाई देते हैं। यह मिशन भारत के लिए एक बड़ा कदम है और वैज्ञानिक खोज को आगे बढ़ाने के लिए मूल्यवान आंकड़े मुहैया कराता रहेगा। हमें कोई शक नहीं है कि भारत अंतरिक्ष संबंधी अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करेगा।




पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री जेरी लेनिंगर ने शनिवार को कहा कि चंद्रयान-2 मिशन के तहत विक्रम लैंडर की चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने की भारत की ‘‘साहसिक कोशिश’’ से मिला अनुभव भविष्य के मिशन में सहायक होगा। लिनेंगर ने कहा, हमें इससे हताश नहीं होना चाहिए। भारत कुछ ऐसा करने की कोशिश कर रहा है जो बहुत ही कठिन है। लैंडर से संपर्क टूटने से पहले सब कुछ योजना के तहत था।

अमेरिका के समाचार पत्र ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने कहा, भारत पहली कोशिश में भले ही लैंडिंग नहीं कर पाया हो, लेकिन उसकी कोशिश दिखाती है कि उसका इंजीनियरिंग कौशल और अंतरिक्ष के क्षेत्र में दशकों के विकास उसकी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर सकते हैं।

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