ईरान के बाद लेबनान को भी राहत: लगातार हमलों के बाद नरम पड़ा इस्राइल, शांति वार्ता के लिए तैयार हुए नेतन्याहू
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ सीधे शांति वार्ता शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि बातचीत का मुख्य मुद्दा हिज्बुल्ला को निरस्त्र करना होगा। यह कदम दोनों देशों के बीच रिश्तों में बड़ा बदलाव ला सकता है।
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पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब शांति की उम्मीद की एक नई किरण दिखाई दी है। इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा है कि उनका देश लेबनान के साथ सीधे शांति वार्ता के लिए तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में दोनों पक्षों के बीच हिंसक घटनाएं हुई थीं और हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए थे।
नेतन्याहू ने साफ कहा कि उन्होंने अपने कैबिनेट को निर्देश दिया है कि लेबनान के साथ जल्द से जल्द सीधी बातचीत शुरू की जाए। उन्होंने बताया कि इन वार्ताओं का मुख्य मुद्दा हिज्बुल्ला को निरस्त्र करना और दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करना होगा। यह बयान संकेत देता है कि इस्राइल अब कूटनीतिक रास्ता अपनाने की कोशिश कर रहा है।
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इस्राइल-लेबनान वार्ता अगले हफ्ते वॉशिंगटन संभावना
इस्राइल और लेबनान के बीच अहम बातचीत अगले हफ्ते वॉशिंगटन डीसी में शुरू हो सकती है। यह बैठक अमेरिकी विदेश विभाग में होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत में अमेरिका की तरफ से मिशेल ईसा शामिल हो सकते हैं, जो लेबनान में अमेरिकी राजदूत हैं। वहीं, इस्राइल की ओर से येचिएल लेइटर हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हुआ है कि लेबनान की तरफ से कौन प्रतिनिधित्व करेगा। इस बैठक की तारीख और जगह की जानकारी सबसे पहले एक्सियोस ने दी थी।
क्या इस्राइल-लेबनान के रिश्तों में बदलाव आने वाला है?
यह बयान दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा बदलाव ला सकता है। इस्राइल और लेबनान तकनीकी रूप से अब भी युद्ध की स्थिति में हैं। ऐसे में सीधे शांति वार्ता की पहल एक अहम कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में तनाव कम कर सकता है।
नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि बातचीत का मुख्य फोकस हिज्बुल्ला को हथियार मुक्त करना होगा। लेबनान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में हिज्बुल्ला की बड़ी भूमिका है, इसलिए यह मुद्दा बेहद संवेदनशील माना जा रहा है और वार्ता की दिशा तय करेगा।
क्या लेबनान की ओर से बातचीत की मांग आई थी?
इस्राइल का कहना है कि लेबनान की ओर से बार-बार बातचीत की इच्छा जताई गई थी। उसी के बाद इस्राइल ने यह कदम उठाया है। हालांकि इस पर लेबनान की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।
क्या क्षेत्र में शांति की नई शुरुआत हो सकती है?
माना जा रहा है कि अगर यह वार्ता सफल होती है तो मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव में कमी आ सकती है। हालांकि हिज्बुल्ला जैसे मुद्दों के चलते बातचीत आसान नहीं होगी, लेकिन यह पहल शांति की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
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