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Israel: छह महीनों से जारी विरोध के बीच इस्राइल में पास न्यायिक सुधार बिल क्या है? जानें अमेरिका को एतराज क्यों

Tue, 25 Jul 2023 07:28 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Tue, 25 Jul 2023 07:28 PM IST
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सार
Israel Judicial Overhaul: न्यायिक सुधार से जुड़ा विवादास्पद बिल सोमवार को इस्राइली संसद नेसेट में पारित हो गया। नए कानून के तहत 120 सीटों वाली इस्राइली संसद में 61 सांसदों के साधारण बहुमत से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद्द किया जा सकेगा। हालांकि, विपक्ष ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है और इसे अपमानजनक और भ्रष्ट कानून करार दिया है। 
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Israel judicial overhaul: What is the judicial reform bill passed And Know why America has objected
इस्रायल - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

भारी विरोध प्रदर्शन के बीच इस्राइल की संसद ने सोमवार को न्यायिक सुधर कानून पारित कर दिया। इसी साल जनवरी में यह बिल लाया गया था, तब से ही इसका विरोध हो रहा है। हालांकि, अब कानून को हरी झंडी मिल चुकी है, जिसे विपक्ष समेत तमाम संगठन न्यायपालिका की शक्ति कमजोर करने वाला बता रहे हैं। वहीं, विपक्ष ने कानून को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करने की घोषणा कर दी है। 


कानून पास होने के बाद सोमवार रात हजारों प्रदर्शनकारी यरूशलेम और तेल अवीव की सड़कों पर उतर आए। वहीं आज कानून के विरोध में पूरे इस्राइल में डॉक्टर हड़ताल कर रहे हैं। इस बीच जानते हैं कि आखिर इस्राइल में न्यायिक सुधार को लेकर क्या हुआ है? इसका विरोध क्यों हो रहा है? कानून पास होने के बाद अब आगे क्या है? सरकार का इस पर क्या रुख है? 

इस्राइल में विरोध
इस्राइल में विरोध - फोटो : सोशल मीडिया
आखिर इस्राइल में न्यायिक सुधार को लेकर क्या हुआ है?
न्यायिक सुधार से जुड़ा विवादास्पद बिल सोमवार को इस्राइली संसद नेसेट में पारित हो गया। बिल संसद में 64-0 वोट से पास हुआ। सत्तारूढ़ गठबंधन के सभी सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जबकि मतदान के दौरान सभी विपक्षी विधायक सदन से बाहर चले गए। दरअसल, देश की मौजूदा बेंजामिन नेतन्याहू वाली सरकार बड़े पैमाने पर और योजनाबद्ध तरीके से न्यायिक व्यवस्था में बदलाव करना चाहती है। हालिया कदम सरकार के इसी प्रयास का पहला हिस्सा है।

इस्राइल में विरोध प्रदर्शन
इस्राइल में विरोध प्रदर्शन - फोटो : सोशल मीडिया
न्यायिक सुधार क्या हैं जिनका विरोध हो रहा है? 
न्याय मंत्री यारिव लेविन ने इसी साल जनवरी के पहले सप्ताह में न्यायिक व्यवस्था में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया था। न्यायिक प्रणाली में संशोधन के जरिए सरकार एक समीक्षा समिति के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय के नामांकित व्यक्तियों को बदलना चाहती है। इसके साथ ही नेतन्याहू सरकार संसद को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को अस्वीकार करने का अधिकार देने का प्रयास भी कर रही है। 

नए कानून के तहत 120 सीटों वाली इस्राइली संसद में 61 सांसदों के साधारण बहुमत से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद्द किया जा सकेगा। सुधार उस प्रणाली को भी बदल देगा जिसके माध्यम से न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाती है। इससे न्यायपालिका में राजनेताओं को अधिक नियंत्रण मिलेगा।

Israel Protests
Israel Protests - फोटो : सोशल मीडिया
अब जानते हैं कानून का विरोध क्यों हो रहा है?
जनवरी में पहली बार सुधारों की घोषणा के बाद से इस्राइल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। वहीं जब कानून पास हुआ तो प्रदर्शनकारी और भड़क गए। सोमवार रात गुस्साए प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ संसद के बाहर जमा हो गई और इमारत तक पहुंच को रोकने का प्रयास करने लगी। इस्राइल पुलिस के अनुसार, उन पर पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया और कम से कम 19 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

विपक्ष ने इसे सुप्रीम कोर्ट का गला घोंटने की कोशिश बताया। इस्राइल में लिखित संविधान नहीं है, इसलिए वहां शासन तंत्र में संतुलन बनाए रखने में सुप्रीम कोर्ट की महत्त्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। कानून को लेकर यह कहा गया कि इसके जरिए सुप्रीम कोर्ट को सरकार और संसद के बराबर लाने की कोशिश की जा रही है।

वहीं, इस्राइल के पूर्व प्रधानमंत्री येर लापिद ने सरकार के इस कदम की आलोचना की और इसे अपमानजनक और भ्रष्ट कानून करार दिया है। एक इस्राइली एनजीओ 'नेमूवमेंट फॉर क्वालिटी गवर्नमेंट' ने मतदान होने के तुरंत बाद सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की। याचिका में इसने कहा कि यह इस्राइली लोकतंत्र की बुनियादी ढांचे को बदल देगा। इसके साथ ही अनुरोध किया कि वह इसके कार्यान्वयन को तब तक रोक दे जब तक कि अदालत इस पर फैसला नहीं सुना देती।

बेंजामिन नेतन्याहू(फाइल फोटो)
बेंजामिन नेतन्याहू(फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
सरकार का इस पर क्या रुख है?
सोमवार रात को देश के नाम एक संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि कानून का पारित होना एक आवश्यक लोकतांत्रिक कदम था और वह मतदाताओं की इच्छा को पूरा कर रहे हैं। विधेयक को आवश्यक बताते हुए कहा कि इस कानून के जरिए सरकार की संस्थाओं के बीच संतुलन वापस आएगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने विपक्ष के साथ नए सिरे से बातचीत का आह्वान किया और राष्ट्रीय एकता की वकालत की।

benjamin Netnyahu, Yair Lapid
benjamin Netnyahu, Yair Lapid - फोटो : अमर उजाला
अब आगे क्या होगा?
कानून को अभी भी इस्राइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग द्वारा अनुमोदित होने की आवश्यकता है। हालांकि, देश की राजनीतिक व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति एक औपचारिकता मात्र है। वहीं दूसरी ओर इसे कानूनी चुनैतियों का सामना भी करना पद सकता है। यदि अदालत कानून को ही अनुचित करार देती है तो देश में एक संवैधानिक संकट भी पैदा हो सकता है।

इस्राइली बार एसोसिएशन पहले से ही विधेयक को कानूनी चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही इसने  चेतावनी दी है कि एसोसिएशन के सदस्य पेशेवर सेवाएं प्रदान नहीं करेंगे और वकील हड़ताल पर जाएंगे।

वहीं इस्राइली मेडिकल एसोसिएशन ने कहा कि कानून पारित होने के जवाब में मंगलवार को हड़ताल पर चला गया है। आईएमए ने कहा, 'इस कानून के स्वास्थ्य प्रणाली, मरीजों और डॉक्टरों पर गंभीर परिणाम होंगे।' इसके अलावा छत्र श्रमिक संघ 'हिस्टाड्रट' ने चेतावनी दी कि कानून के गंभीर परिणाम होंगे।

पोलैंड में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन।
पोलैंड में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन। - फोटो : सोशल मीडिया
इन देशों ने दी प्रतिक्रिया 
कानून का विरोध इस्राइल के अलावा बाहर भी हो रहा है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पिछले हफ्ते एक फोन कॉल के दौरान सीधे नेतन्याहू के साथ चिंता व्यक्त की थी। बाइडेन ने चेतावनी भी दी थी कि व्यापक सहमति के बिना बदलावों को आगे बढ़ाना लोकतांत्रिक संस्थानों के पतन के समान है और यूएस-इस्राइल संबंधों को कमजोर कर सकता है। 

जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि उसे बहुत अफसोस है कि सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत फिलहाल टूट गई है। वहीं ब्रिटिश बोर्ड ऑफ डेप्युटीज ने सर्वसम्मति खोजने के लिए इस्राइली राष्ट्रपति के प्रयासों का समर्थन किया। एक बयान में कहा गया, 'इस बात से बहुत निराशा हुई है कि, इस स्तर पर वार्ता के प्रयास विफल हो गए हैं'।
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