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Israel-Hezbollah: दुनिया में जारी है जबरदस्त 'शैडो बॉक्सिंग', हिजबुल्ला को नहीं छोड़ेगा इस्राइल

Mon, 23 Sep 2024 08:55 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 23 Sep 2024 08:55 PM IST
सार

इस वक्त दुनिया की कई महाशक्तियां नॉन स्टेट एक्टर (हूती,हमास, हिजबुल्ला) के प्रयोग में उलझी है। वहीं रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष खतरनाक मोड़ ले रही है। जबकि ईरान हारने के नहीं लड़ाई छेड़ेगा।

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Israel-Hezbollah: 'shadow boxing' continues in the world, Israel will not spare Hezbollah, World news in hindi
दुनियाभर में महाशक्तियों का टकराव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फलस्तीन में कहर बरपाने के बाद इस्राइल ने लेबनान में भीषण हमले को धार दे दी है। पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि दुनिया में गजब की 'शैडो बॉक्सिंग' चल रही है। तमाम महाशक्तियां नॉन स्टेट एक्टर के प्रयोग में दुनिया उलझ गई है। इससे दुनिया में अस्थिरता फैल रही है। भारत के चारों ओर भी अस्थिरता बढ़ रही है और समय बहुत संभलकर चलने का है। पूर्व विदेश सचिव का कहना है कि अगले एक-दो साल अभी युद्ध, टकराव, हिंसा में ही उलझते ही नजर आ रहे हैं। रूस ने भी ब्रिटेन को उसके 10 टारगेट तय करके चेतावनी देना शुरू कर दिया है। यह संदेश है कि नाटो तो बाद में पहले निशाने पर ब्रिटेन रहेगा।
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सोचिए जरा, किसके बूते लड़ रहा है हिजबुल्ला, हमास, हूती? ईरान तो लड़ने आएगा नहीं!
देश के पूर्व राजनयिक कहते हैं कि यह सोचने वाली बात है। इस्राइल की तकनीक, मारक क्षमता, आत्मरक्षा के हथियार के मुकाबले ईरान की क्षमता कुछ भी नहीं है। अमेरिका ने पहले से भूमध्यसागर में उन्नत हथियार, युद्धक बेड़े के साथ डेरा डाल दिया है। इस्राइल आक्रमण की हदें पार कर रहा है और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतेन्याहू फलस्तीन में हमास के बाद हिजबुल्ला पर हमला शुरू कर चुके हैं। यमन का हूती संगठन व्यापारिक मार्ग में दहशत फैला रहा है। बाद में उसका भी नंबर आ सकता है। एक बात तय है कि ईरान युद्ध में हारने के लिए लड़ने नहीं आएगा। ईरान से हर मामले में अधिक क्षमता इस्राइल की है। हमास, हिजबुल्ला, हूती उसके सामने कुछ नहीं, फिर भी सब लड़ रहे हैं। आखिर कौन इनको हथियार, गोला, बारुद, रॉकेट, मिसाइल, लांचर दे रहा है? शशांक कहते हैं कि मुझे अपने अनुभव के आधार पर यह नॉन स्टेट एक्टर के जरिए जबरदस्त शैडो बॉक्सिंग चल रही है। भयानक प्रॉक्सी वॉर।
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नॉन स्टेट एक्टर के आगे हारा अमेरिका, छोड़कर भागा 80 करोड़ के हथियार
यह सबने देखा है कि नॉन स्टेट एक्टर के आगे अमेरिका ने अफगानिस्तान में न केवल हार मान ली, बल्कि 80 हजार करोड़ के हथियार भी छोड़कर भाग गया। विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि यहां अमेरिका को साफ नीचा दिखाई देने की कोशिश दिखाई दे रही है। इसके लिए छद्म युद्ध को बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। अमेरिका भी आसानी से पीठ दिखाने के मूड में नहीं है। वह कहते हैं कि मुझे नहीं लगता कि अगले डेढ़-दो साल में दुनिया में इस युद्ध, हिंसा, टकराव के वातावरण से कोई राहत मिल पाएगी। इसके लिए अमेरिका जहां यूक्रेन की मदद कर रहा है, नाटो देश अमेरिका के इशारे पर चल रहे हैं और इस्राइल के लिए अमेरिका ने सभी नैतिकता को ताक पर रख दिया है, वहीं हिजबुल्ला, हमास, हूती को मिलने वाले हथियार का रूट भी कम महत्वपूर्ण नहीं। आखिर चीन, रूस क्या कर रहे हैं। तुर्किए किस भूमिका में है? बड़ा सवाल यह भी कि ईरान के हथियारों का जखीरा कितना बड़ा है? चीन वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थिति में बहुत धीमी गति से लेकिन ठोस चाल के पीछे आखिर कौन सा रहस्य छिपा है?
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भारत को थोड़ा धीमा चलना चाहिए, अभी तो दौड़ रहा है....
पूर्व विदेश सचिव कूटनीति, विदेश नीति के विशेषज्ञ हैं। वह कहते हैं कि हमारे विदेश मंत्री एस जयशंकर जनभावना के अनुरूप कूटनीति में पिरोकर अपना पक्ष रखते हैं। अच्छा है। शशांक के मुताबिक उनके समय में भारत अपना लक्ष्य निर्धारित करता था, लेकिन चाल थोड़ा धीमी रखता था। भारत को कभी बहुत तेज चलने की आदत नहीं रहीं, लेकिन इन दिनों वैश्विक मामले में भी तेज चल रहा है। चल नहीं बल्कि दौड़ रहा है। पूर्व विदेश सचिव का कहना है कि हमारी बाहरी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। हम खुद को दुनिया में ताकतवर बता रहे हैं। 2027 तक विकसित राष्ट्र का दर्जा पाने की बात कर रहे हैं और अपने चारों तरफ घिरते जा रहे हैं। म्यामांर, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव में चीन ने अपनी पैठ काफी बढ़ा ली है। हमारे पड़ोस में हमारे आस-पास की हमारे संदर्भ में अस्थिरता बढ़ रही है। अमेरिका ने एलसीए के इंजन की आपूर्ति को सप्लाई चैन में दिक्कतें बताकर रोक दिया था। हमारे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को आनन-फानन में भागकर अमेरिका जाना पड़ा। बांग्लादेश में अचानक अस्थिरता बढ़ गई। देखिएगा तो महसूस होगा कि अमेरिका और भारत के रिश्ते अपनी विश्वसनीयता को जरा कम महसूस कर रहे हैं। सबसे बड़ी एक स्थिति और है। चीन से अमेरिका की नाराजगी के कारण दक्षिण पूर्व एशिया की तमाम कंपनियां वहां से हट रही हैं। भारत को इन्हें भारत में लाने के लिए प्रयास करना चाहिए। हालांकि इन कंपनियों की निगाह अमेरिका के रुख पर ही अधिक टिकी रहेंगी। इसलिए थोड़ा संभलकर चलने की जरूरत है।


बड़ा सवाल यह भी अमेरिका में ट्रंप जीतेंगे या फिर कमला हैरिस?
पूर्व विदेश सचिव कहते हैं कि अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव भी भावी दिशा को तय करेगा। देखना होगा कि कौन चुनाव जीतता है? कमला हैरिस या डोनाल्ड ट्रंप? शशांक ने सहमति जताई कि पूर्व राष्ट्रपति प्रो रूस (पुतिन पक्षीय फ्लेवर) वाले हैं। यहूदियों को अपना भला तुलना में कमला हैरिस में अधिक दिखाई दे रहा है। दूसरे पूर्व राष्ट्रपति अमेरिका के सिस्टम के नीचे स्टोव रखकर उसे गरम कर देने की छवि बना चुका है। ऐसे में संभव है कि अमेरिकी अपने देश की व्यवस्था को मजबूती देने वाले चेहरे के प्रति ज्यादा उदार हों। पूर्व विदेश सचिव कहते हैं कि विश्व की दिशा इन दिनों बेपटरी की तरफ बढ़ रही है। थोड़ी जटिलताएं बढ़ रही है। ऐसे में सावधानी की खास जरूरत है।


 
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