फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   israel archaeology discoveries 6500 years old high tech workshop found in Israel, this discovery may change history

इस्रायल में मिली 6500 साल पुरानी 'हाई टेक' कार्यशाला, यह खोज बदल सकती है इतिहास

Tue, 13 Oct 2020 10:57 AM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 13 Oct 2020 10:57 AM IST
विज्ञापन
israel archaeology discoveries 6500 years old high tech workshop found in Israel, this discovery may change history
पाषाण युग - फोटो : For Representation Only

दक्षिणी इस्रायल के नेगेव रेगिस्तान में बीयर शेवा शहर में तीन साल के अध्ययन के बाद एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिससे दुनिया का इतिहास फिर से लिखना पड़ सकता है। 2017 के बाद से, शहर के नेव नोय क्षेत्र में तीन सालों चल चले पुरातात्विक उत्खनन में एक ऐसी चीज मिली है जो एक भट्ठी जैसी प्रतीत होती है और इसमें तांबे के अयस्क को गलाया जाता होगा। तेल अवीव विश्वविद्यालय और इस्रायल एंटिक्विटी अथॉरिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, इस स्थान पर दुनिया की पहली भट्ठी का इस्तेमाल किया गया होगा। 

विज्ञापन


इस्रायल एंटीक्विटीज अथॉरिटी की ओर से खुदाई के निदेशक तलिया अबुलफिया ने कहा, "इस खुदाई से लगभग 6,500 साल पहले चालकोलिथिक काल (ताम्रपाषाणिक या कॉपर एज) से घरेलू उत्पादन के सबूत मिले हैं।
विज्ञापन




उन्होंने कहा, "खुदाई में मिली आश्चर्य चीजों में तांबे को गलाने की एक छोटी कार्यशाला शामिल है और भट्ठी के टुकड़े भी मिले हैं। इसके अलावा टिन से बना एक छोटा अधिष्ठापन जिसमें तांबे के अयस्क को पिघलाया गया था। साथ ही बहुत अधिक तांबा लावा (कॉपर स्लैग) भी मिला है।"
विज्ञापन
विज्ञापन


चाल्कोलिथिक या ताम्रपाषाणिक या कॉपर युग को दक्षिण-पूर्व यूरोप के कुछ हिस्सों में चौथी और तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के बीच की अवधि माना जाता है।

हालांकि यह पुरातात्विक काल तांबे के उपकरणों के निर्माण के संकेत देता है, फिर भी इसे नवपाषाण या पाषाण युग (नियोलिथिक या स्टोन एज) का हिस्सा माना जाता है।

इस काल के दौरान बनाए गए अधिकांश उपकरण पत्थर के बने होते थे और जैसा इसके नाम से खुद पता चलता है। चालकोलिथिक शब्द तांबे और पत्थर के लिए इस्तेमाल होता है और यह ग्रीक शब्दों से आता है।

नीव नोय क्षेत्र में पाए गए अयस्क के आईसोटॉप्स के विश्लेषण से पता चलता है कि इस अयस्क को वाडी फेनन, जो आज का आधुनिक जॉर्डन है, से लाया गया था, जो कि इस क्षेत्र से 60 मील (100 किलोमीटर) से अधिक दूर है। 

आश्चर्य की बात यह है कि, इस काल में, तांबे के अयस्क को उस स्थान से दूर ले जाकर संसाधित किया गया था जहां से इसका खनन किया गया था।

आमतौर पर, दक्षता को बढ़ाने के लिए भट्टियों का निर्माण खानों में किया गया होगा। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है।

लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि अयस्क को कार्यशाला से इतनी दूर ले जाकर तैयार करना दरअसल अपनी प्रौद्योगिकी को छिपाना हो सकता है। 

तेल अवीव विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बेन-योसेफ ने कहा, "यह समझना महत्वपूर्ण है कि तांबे का शोधन उस काल में एक उच्च तकनीक थी।

उन्होंने कहा, "संपूर्ण प्राचीन विश्व में इससे अधिक उन्नत कोई तकनीक नहीं थी। अयस्क को आग में डालना, इससे पहले इसका जिक्र आपको कहीं नहीं मिलेगा। आपको विशेष भट्टियों तो बनाने के लिए कुछ ज्ञान की आवश्यकता होती है जो ऑक्सीजन के निम्न स्तर को बनाए रखते हुए बहुत अधिक तापमान तक पहुँच सकते हैं।"


इस बात की भी संभावना है कि एक विशिष्ट समूह के बहुत कम लोग धातु को पिघलाने के तरीके के रहस्यों को जानते थे। उन्होंने कहा कि इस इलाके ने दुनिया में मेटल क्रांति लाने में बड़ी भूमिका निभाई होगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed