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क्या चीन सैन्य बल का उपयोग करने की योजना बना रहा है?
Wed, 16 Oct 2019 01:38 PM IST
योगेश साहू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश साहू
Updated Wed, 16 Oct 2019 01:38 PM IST
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टैंक पर सवार चीनी सैनिक
- फोटो : शिन्हुआ
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क्या चीन द्वितीय विश्व युद्ध के अंत के बाद से अब तक का दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य तंत्र खड़ा कर रहा है? इस सवाल का जवाब देना आखिर क्यों जरूरी है? वो इसलिए क्योंकि चीन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में भारी निवेश कर रहा है, भले ही उसका देश युद्ध की स्थिति में नहीं है और इस तथ्य के बावजूद कि कोई भी देश उसे सीधे तौर पर धमकी या निशाना नहीं बना रहा है।
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बहरहाल, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएलए के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी है। आखिर चीन के सैन्य ठिकानों का प्राथमिक तौर पर लक्ष्य कौन है? एएनआई ने यह सवाल कान्वाएशियन डिफेंस के संस्थापक आंद्रेई चांग से पूछा।
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संपादक ने बिना संदेह अपना विचार व्यक्त किया कि ताइवान नंबर एक है। जबकि शी दक्षिणी चीन सागर में पुन: वर्चस्व के लिए सैन्यीकरण की श्रृंखला स्थापित करने में व्यस्त हैं। जहां अब रनवे, जहाजी बंदरगाह और अन्य सैन्य सुविधाएं हैं, चीन के लिए ताइवान हमेशा से रणनीतिक प्राथमिकता रहा है।
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चांग ने इस बात को विस्तार से समझाते हुए बताया कि दक्षिण चीन सागर में पहला चरण पहले से ही पूरा कर लिया गया है, क्योंकि उन्होंने वहां कई, संभवत: तीन हवाई अड्डे की सुविधा वाले कृत्रिम सैन्य ठिकानों का निर्माण किया है।
यदि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कोई परेशानी की संभावना बनती है, तो अमेरिका ऐसे महासागरीय द्वीपों पर आक्रमण कर उन्हें अलग-थलग कर सकता है। किसी छोटे पैमाने की टकराव की स्थिति में, दक्षिण चीन सागर में यही होगा।
लेकिन मुख्य तौर पर लक्ष्य और पहली प्राथमिकता ताइवान ही है। दशकों से पीएलए का अध्ययन करने वाले कनाडाई निवासी ने कहा कि शी न केवल माओत्से तुंग से सीखना चाहते हैं, बल्कि वास्तव में माओ ने जो हासिल किया उससे आगे जाना चाहते हैं क्योंकि वास्तव में शी बहुत ही महत्वाकांक्षी हैं।
उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार, वह वास्तव में कोई बड़ा काम करना चाहते हैं। शी हमेशा उच्च श्रेणी के सैन्य कमांडरों से बात करते हैं, और इस पीढ़ी का एक ही मिशन है एकीकरण को हासिल करना। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ताइवान में सबसे खतरनाक क्षेत्र है, और यही वजह है कि सैन्य परेड में कई चीजें ताइवान पर केंद्रित हैं।
दरअसल, चांग 1 अक्तूबर को बड़े पैमाने पर हुई परेड के बारे में जिक्र कर रहे थे। जिसमें पीएलए ने नए हाईटेक हथियारों का जखीरा प्रदर्शित किया था, इसमें से भी 40 फीसदी हथियारों को जनता को पहले कभी नहीं दिखाया गया था।
दरअसल, उस परेड के मार्फत प्रदर्शित किया गया कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सशस्त्र शाखा पीएलए में निवेश के साथ-साथ कितना अनुसंधान और विकास हुआ है। क्या हाथों में नए हथियार-उपकरण लिए मुस्तैद पीएलए अपने कम्युनिस्ट नेताओं के एक इशारे पर इनका बलपूर्वक उपयोग करने के लिए तैयार है? क्या चीन वाकई ताइवान पर हमला करने के लिए तैयार होगा?
इन सवालों के जवाब में चांग ने अपनी राय देते हुए कहा कि हां, यह बहुत हद तक संभव है। यदि ऐसा नहीं है तो इतना निवेश क्यों किया गया है? हालांकि, मुझे लगता है कि पहली प्राथमिकता आर्थिक और राजनीतिक युद्ध है। उन्होंने ताइवान के समाज यहां तक कि प्रेस और मीडिया को भी इतना अधिक प्रभावित किया है कि वे उन्हें अधिक चीन समर्थक बना सकते हैं। यह इस समय एक मनोवैज्ञानिक युद्ध और प्रचार युद्ध है, साथ ही साथ ताइवान के खिलाफ आर्थिक युद्ध है।