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Iran Warship IRIS Dena Attack: ईरानी जहाज के क्रू को वापस न भेजने का दबाव, श्रीलंका पर अमेरिका की नजर
Mon, 09 Mar 2026 07:10 AM IST
Himanshu Singh Chandel
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Mon, 09 Mar 2026 07:10 AM IST
सार
ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना के डूबने के बाद बचे क्रू सदस्यों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका ने श्रीलंका से कहा है कि वह इन नाविकों को ईरान वापस न भेजे। श्रीलंका ने घायल नाविकों को बचाकर इलाज दिया है और दूसरे ईरानी जहाज बूशहर के क्रू को भी अपनी कस्टडी में लिया है।
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरानी जहाज से जुड़े एक नए विवाद ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को और जटिल बना दिया है। अमेरिका ने श्रीलंका पर दबाव बनाया है कि वह डूबे ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना के बचे हुए क्रू सदस्यों और दूसरे ईरानी जहाज के नाविकों को ईरान वापस न भेजे। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में सैन्य टकराव और कूटनीतिक खींचतान तेज हो गई है।
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रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी विदेश विभाग के एक आंतरिक केबल में कहा गया है कि अमेरिका चाहता है कि श्रीलंका ईरानी नाविकों को फिलहाल ईरान वापस न भेजे। श्रीलंका के दक्षिणी बंदरगाह शहर गाले के पास हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने बुधवार को ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना को निशाना बनाया था। इस हमले में जहाज डूब गया और कई क्रू सदस्य मारे गए, जबकि कुछ लोगों को बचा लिया गया।
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आईआरआईएस दना जहाज के साथ क्या हुआ था?
जानकारी के अनुसार आईआरआईएस डेना जहाज श्रीलंका के गाले बंदरगाह से करीब 19 समुद्री मील दूर समुद्र में मौजूद था, जब उस पर हमला हुआ। हमले के बाद जहाज डूब गया और दर्जनों नाविकों की मौत हो गई। श्रीलंका की नौसेना और स्थानीय एजेंसियों ने बचाव अभियान चलाकर कई नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला। बताया गया कि हादसे में बचे 32 लोगों को इलाज के लिए गाले अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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दूसरे ईरानी जहाज बूशहर के क्रू का क्या हुआ?
श्रीलंका ने एक अन्य ईरानी जहाज बूशहर के 208 क्रू सदस्यों को भी उतारकर अपनी कस्टडी में लिया है। यह जहाज श्रीलंका की समुद्री सीमा के बाहर उसके एक्सक्लूसिव आर्थिक क्षेत्र में फंस गया था। श्रीलंकाई अधिकारियों ने बताया कि जहाज को देश के पूर्वी तट के एक बंदरगाह तक ले जाया जा रहा है और उसके अधिकांश क्रू को कोलंबो के पास एक नौसैनिक शिविर में रखा गया है।
अमेरिका ने श्रीलंका से क्या कहा है?
अमेरिकी विदेश विभाग के आंतरिक संदेश के अनुसार कोलंबो में अमेरिकी दूतावास की प्रभारी जेन हॉवेल ने श्रीलंका सरकार से कहा है कि न तो बूशहर जहाज के क्रू और न ही डेना हादसे में बचाए गए लोगों को ईरान वापस भेजा जाए। अमेरिका का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है और श्रीलंका को ईरान द्वारा संभावित प्रचार से भी सतर्क रहना चाहिए।
श्रीलंका सरकार का इस मामले पर क्या रुख है?
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा कि संकट में फंसे लोगों को सहायता डेना उनके देश की मानवीय जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि घायल नाविकों का इलाज किया जा रहा है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। वहीं श्रीलंका के स्वास्थ्य उपमंत्री हंसाका विजेमुनी ने बताया कि ईरान ने डूबे जहाज में मारे गए लोगों के शव वापस लाने में मदद मांगी है।
आगे इस विवाद का क्या असर पड़ सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल मानवीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ी कूटनीतिक और सैन्य रणनीति भी जुड़ी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच श्रीलंका की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह मामला क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीतिक संबंधों को और प्रभावित कर सकता है।