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'गेंद अब अमेरिका के पाले में': पश्चिम एशिया संकट के बीच ईरान का बड़ा बयान, होर्मुज खोलने पर क्या बोले बघाई?
Mon, 02 Nov 2026 05:48 PM IST
अमन मौर्या
एएनआई, तेहरान, ईरान
एएनआई, तेहरान, ईरान
Published by: अमन मौर्या
Updated Mon, 02 Nov 2026 05:48 PM IST
सार
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और सुरक्षा बहाल करने के लिए अमेरिका के सामने अपनी शर्तें रखी हैं। ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी खत्म होने के बाद ही समझौता संभव है।
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इस्माइल बघाई
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और वहां सुरक्षा बहाल करने को लेकर अमेरिका के सामने अपनी शर्तें रखी हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि किसी भी समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की जिम्मेदारी अब पूरी तरह अमेरिका की है। बघाई ने स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं करता और तेहरान की जायज मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने या सुरक्षित बनाने पर कोई अंतिम समझौता नहीं हो सकता। तेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बघाई ने कहा, 'गेंद अब अमेरिका के पाले में है। हमारी मांगें बिल्कुल स्पष्ट हैं और तार्किक भी हैं।' उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म होने और ईरान की मांगों को लागू किए जाने के बाद ही बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
अमेरिका के रवैये पर ईरान ने उठाए सवाल
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई को भेजे गए हालिया पत्र के बारे में पूछे जाने पर बघाई ने कहा कि ईरान अमेरिका का आकलन उसके शब्दों से नहीं, बल्कि उसके कामों से करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अब तक कूटनीति को आगे बढ़ाने के बजाय उसे नुकसान पहुंचाया है। बघाई के अनुसार, पिछले दो वर्षों में अमेरिका ने केवल युद्ध की बात की है और जब भी बातचीत का रास्ता खुला, उसने प्रक्रिया को भी बाधित किया। इस्लामाबाद में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समझौते होने के बाद भी उन्हें जल्द ही पटरी से उतार दिया गया।
ईरान के सात चरणों वाले प्रस्ताव पर क्या बोले?
इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान की ओर से पेश किया गया कूटनीतिक प्रस्ताव अभी भी मौजूद है। यह सात दिन की पहल थी, जिस पर न्यूयॉर्क में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान विस्तार से चर्चा भी की गई थी। इस दौरान मध्यस्थों के जरिए दूसरे पक्ष के विचार मिले और दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी हुआ। उन्होंने कहा कि मध्यस्थों के जरिए ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का आधार वही सात चरणों वाला प्रस्ताव है, जिसे अब संक्षिप्त कर दिया गया है। अब इसे दो दिनों के भीतर लागू किया जा सकता है।
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ईरान ने अमेरिका तक कैसे पहुंचाईं अपनी शर्तें?
ईरानी प्रवक्ता ने बताया कि उप विदेश मंत्री का दोहा दौरा ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था। उनके अनुसार, कतर की मध्यस्थता में हुई बातचीत के दौरान ईरान ने अपनी सभी जायज मांगें अमेरिकी पक्ष तक पहुंचा दी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है और अब फैसला अमेरिका को करना है।
इस दौरान बघाई ने चेतावनी भी दी और कहा कि अमेरिका एक तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंता जताए और दूसरी तरफ ईरान की आर्थिक नाकेबंदी जारी रखे, ऐसा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इस तरह का एकतरफा समझौता टिकाऊ नहीं होगा। ईरान की शर्तें केवल उसके राष्ट्रीय हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जलडमरूमध्य में सुरक्षा बहाल करने के लिए भी जरूरी हैं।
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अमेरिका के रवैये पर ईरान ने उठाए सवाल
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई को भेजे गए हालिया पत्र के बारे में पूछे जाने पर बघाई ने कहा कि ईरान अमेरिका का आकलन उसके शब्दों से नहीं, बल्कि उसके कामों से करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अब तक कूटनीति को आगे बढ़ाने के बजाय उसे नुकसान पहुंचाया है। बघाई के अनुसार, पिछले दो वर्षों में अमेरिका ने केवल युद्ध की बात की है और जब भी बातचीत का रास्ता खुला, उसने प्रक्रिया को भी बाधित किया। इस्लामाबाद में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समझौते होने के बाद भी उन्हें जल्द ही पटरी से उतार दिया गया।
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ईरान के सात चरणों वाले प्रस्ताव पर क्या बोले?
इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान की ओर से पेश किया गया कूटनीतिक प्रस्ताव अभी भी मौजूद है। यह सात दिन की पहल थी, जिस पर न्यूयॉर्क में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान विस्तार से चर्चा भी की गई थी। इस दौरान मध्यस्थों के जरिए दूसरे पक्ष के विचार मिले और दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी हुआ। उन्होंने कहा कि मध्यस्थों के जरिए ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का आधार वही सात चरणों वाला प्रस्ताव है, जिसे अब संक्षिप्त कर दिया गया है। अब इसे दो दिनों के भीतर लागू किया जा सकता है।
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ईरान ने अमेरिका तक कैसे पहुंचाईं अपनी शर्तें?
ईरानी प्रवक्ता ने बताया कि उप विदेश मंत्री का दोहा दौरा ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था। उनके अनुसार, कतर की मध्यस्थता में हुई बातचीत के दौरान ईरान ने अपनी सभी जायज मांगें अमेरिकी पक्ष तक पहुंचा दी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है और अब फैसला अमेरिका को करना है।
इस दौरान बघाई ने चेतावनी भी दी और कहा कि अमेरिका एक तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंता जताए और दूसरी तरफ ईरान की आर्थिक नाकेबंदी जारी रखे, ऐसा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इस तरह का एकतरफा समझौता टिकाऊ नहीं होगा। ईरान की शर्तें केवल उसके राष्ट्रीय हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जलडमरूमध्य में सुरक्षा बहाल करने के लिए भी जरूरी हैं।