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US-Iran Talk: तुर्किये की मध्यस्थता पर क्या बोले ईरानी राष्ट्रपति? ईरान-अमेरिका वार्ता पर मिले सकारात्मक संकेत

Tue, 03 Feb 2026 11:37 AM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई Published by: अमन तिवारी Updated Tue, 03 Feb 2026 11:37 AM IST
सार

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के साथ निष्पक्ष और न्यायसंगत बातचीत के संकेत दिए हैं। उन्होंने विदेश मंत्री को निर्देश दिया कि वे बिना किसी धमकी और दबाव के गरिमा के साथ चर्चा करें। तुर्की इस वार्ता की मेजबानी कर सकता है, हालांकि अमेरिका ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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Iran signals US talks Iran President Masoud Pezeshkian Turkey meditations Iran US relations
अमेरिका-ईरान झंडा - फोटो : एएनआई

विस्तार

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा हमने अपने विदेश मंत्री को अमेरिका के साथ निष्पक्ष और न्यायसंगत बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया है। राष्ट्रपति का यह बयान ईरान की ओर से स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। कि ईरान तुर्किये के आयोजित मध्यस्थता बातचीत में हिस्सा ले सकता है। तेहरान की ओर से यह पहला साफ संकेत है कि वह तनाव कम करने के लिए चर्चा करना चाहता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच पिछले कुछ महीनों से काफी कड़वाहट बनी हुई है।
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जानकारों का मानना है कि राष्ट्रपति पेजेशकियन को इस पहल के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का समर्थन मिला है। तुर्की इस बातचीत को मुमकिन बनाने के लिए पर्दे के पीछे से कोशिश कर रहा है। इसी बीच अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ भी मध्य-पूर्व के दौरे पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि वह समझौता चाहते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी मांगों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भी शामिल कर लिया है।
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राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह फैसला क्षेत्र की मित्र सरकारों के अनुरोध पर लिया गया है। उन्होंने शर्त रखी है कि बातचीत का माहौल धमकियों और अनुचित उम्मीदों से मुक्त होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि यह चर्चा सम्मान और समझदारी के सिद्धांतों पर आधारित हो। हालांकि, अमेरिका ने अभी तक आधिकारिक तौर पर बातचीत की पुष्टि नहीं की है।


ईरान के शीर्ष सलाहकार अली शमखानी ने एक इंटरव्यू में बताया कि शुरुआत में बातचीत अप्रत्यक्ष तरीके से होगी। अगर समझौते की उम्मीद दिखी, तो सीधी बातचीत भी की जा सकती है। उन्होंने साफ किया कि यह चर्चा मुख्य रूप से परमाणु मुद्दों पर केंद्रित रहेगी। शमखानी ने रूस को अपना यूरेनियम देने के विचार को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता, लेकिन इसके बदले उसे सही कीमत मिलनी चाहिए।

दूसरी तरफ, इजरायल इस संभावित समझौते पर कड़ी नजर रखे हुए है। अमेरिकी दूत विटकॉफ इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू और मोसाद प्रमुख से मुलाकात करेंगे। इजरायल चाहता है कि किसी भी समझौते में ईरान से यूरेनियम हटाना, मिसाइल निर्माण रोकना और उसके समर्थक गुटों की मदद बंद करना शामिल हो। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो स्थिति और खराब हो सकती है। वहीं, इस मामले पर पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो को किसी स्थायी समाधान की उम्मीद कम ही नजर आती है।

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