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Israel Iran War: ईरान में सत्ता परिवर्तन की उम्मीदें धूमिल, इस्राइली PM नेतन्याहू के सामने नई राजनीतिक चुनौती
Sun, 15 Mar 2026 04:28 AM IST
Devesh Tripathi
अमर उजाला नेटवर्क, तेल अवीव
अमर उजाला नेटवर्क, तेल अवीव
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 15 Mar 2026 04:28 AM IST
सार
जून 2025 के बाद सिर्फ आठ महीने में ही इस्राइल फिर युद्ध में लौट आया। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान मिसाइल कार्यक्रम फिर खड़ा कर रहा था और उसे तथा अपने परमाणु कार्यक्रम को गहराई में भूमिगत ले जाने की योजना बना रहा था।
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बेंजामिन नेतन्याहू, इस्राइली पीएम
- फोटो : ANI
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विस्तार
ईरान के खिलाफ युद्ध में सैन्य हमलों और शीर्ष नेतृत्व पर हमले के बावजूद तेहरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना कमजोर पड़ती दिख रही है। ऐसे में इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अब एक नई राजनीतिक चुनौती का सामना कर रहे हैं। इस्राइली सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व अब इस युद्ध को मध्य पूर्व की रणनीतिक तस्वीर बदलने वाली कार्रवाई के रूप में पेश कर रहा है, जबकि तेहरान में शासन परिवर्तन का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस्राइल के सैन्य व राजनीतिक नेतृत्व की ओर से ईरान के खिलाफ युद्ध को मध्य पूर्व की शक्ति संतुलन को बदल देने वाली कार्रवाई बताया जा रहा है। तेल अवीव स्थित पत्रकार और यूएस-इस्राइल थिंक टैंक इस्राइल पॉलिसी फोरम से जुड़े नीति सलाहकार नेरी जिलबर के अनुसार, नेतन्याहू इस युद्ध को ऐतिहासिक जीत बताने की कोशिश कर रहे हैं। यदि तेहरान की मौजूदा सत्ता कमजोर या समाप्त हो जाती, तो लेबनान में हिज्बुल्लाह और गाजा में हमास जैसे समूहों को मिलने वाली वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और हथियारों की आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता था।
इस्राइल-अमेरिका पर बढ़ रहा दबाव
इस्राइल का मानना रहा है कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण पूरी तरह बदल सकता है। इस्राइल ने कई बार ईरानी जनता से मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील भी की। इस्राइल के भीतर कुछ लोग नेतन्याहू के इन संकेतों को इस रूप में देख रहे हैं कि संभवतः युद्ध को समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ रहा है। तेजी से बढ़ती तेल कीमतों के कारण अमेरिका की सरकार पर भी संघर्ष समाप्त करने का दबाव बताया जा रहा है।
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आठ माह में ही फिर युद्ध में लौटा इस्राइल
जून 2025 के बाद सिर्फ आठ महीने में ही इस्राइल फिर युद्ध में लौट आया। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान मिसाइल कार्यक्रम फिर खड़ा कर रहा था और उसे तथा अपने परमाणु कार्यक्रम को गहराई में भूमिगत ले जाने की योजना बना रहा था।
ईरानी सुरक्षा व्यवस्था में तनाव के संकेत
इस्राइल के अखबार येदियोथ अहरोनोथ के रक्षा संवाददाता ने लिखा है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के भीतर आंतरिक तनाव व कुछ मामलों में सैनिकों के पलायन जैसी घटनाएं सामने आई हैं। नेतन्याहू का संकेत है कि इस्राइल युद्ध के जरिए परिस्थितियां बदल पीछे हट सकता है।
हालांकि तेहरान में सत्ता बरकरार रहने की स्थिति नेतन्याहू के लिए जोखिम भी पैदा कर सकती है। विश्लेषक नेरी जिलबर के अनुसार, नेतन्याहू की पूर्ण विजय की घोषणाएं वास्तविकता में नहीं बदलतीं हैं तो यह उनके खिलाफ जा सकता है।
अन्य वीडियो
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बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस्राइल के सैन्य व राजनीतिक नेतृत्व की ओर से ईरान के खिलाफ युद्ध को मध्य पूर्व की शक्ति संतुलन को बदल देने वाली कार्रवाई बताया जा रहा है। तेल अवीव स्थित पत्रकार और यूएस-इस्राइल थिंक टैंक इस्राइल पॉलिसी फोरम से जुड़े नीति सलाहकार नेरी जिलबर के अनुसार, नेतन्याहू इस युद्ध को ऐतिहासिक जीत बताने की कोशिश कर रहे हैं। यदि तेहरान की मौजूदा सत्ता कमजोर या समाप्त हो जाती, तो लेबनान में हिज्बुल्लाह और गाजा में हमास जैसे समूहों को मिलने वाली वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और हथियारों की आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता था।
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इस्राइल-अमेरिका पर बढ़ रहा दबाव
इस्राइल का मानना रहा है कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण पूरी तरह बदल सकता है। इस्राइल ने कई बार ईरानी जनता से मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील भी की। इस्राइल के भीतर कुछ लोग नेतन्याहू के इन संकेतों को इस रूप में देख रहे हैं कि संभवतः युद्ध को समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ रहा है। तेजी से बढ़ती तेल कीमतों के कारण अमेरिका की सरकार पर भी संघर्ष समाप्त करने का दबाव बताया जा रहा है।
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आठ माह में ही फिर युद्ध में लौटा इस्राइल
जून 2025 के बाद सिर्फ आठ महीने में ही इस्राइल फिर युद्ध में लौट आया। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान मिसाइल कार्यक्रम फिर खड़ा कर रहा था और उसे तथा अपने परमाणु कार्यक्रम को गहराई में भूमिगत ले जाने की योजना बना रहा था।
ईरानी सुरक्षा व्यवस्था में तनाव के संकेत
इस्राइल के अखबार येदियोथ अहरोनोथ के रक्षा संवाददाता ने लिखा है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के भीतर आंतरिक तनाव व कुछ मामलों में सैनिकों के पलायन जैसी घटनाएं सामने आई हैं। नेतन्याहू का संकेत है कि इस्राइल युद्ध के जरिए परिस्थितियां बदल पीछे हट सकता है।
हालांकि तेहरान में सत्ता बरकरार रहने की स्थिति नेतन्याहू के लिए जोखिम भी पैदा कर सकती है। विश्लेषक नेरी जिलबर के अनुसार, नेतन्याहू की पूर्ण विजय की घोषणाएं वास्तविकता में नहीं बदलतीं हैं तो यह उनके खिलाफ जा सकता है।
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