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फ्यूल क्राइसिस: ईरान ने की मदद की पेशकश, रुपया-रियाल व्यापार शुरू करने पर दिया जोर, जानें पूरा मामला

Sat, 19 Mar 2022 10:44 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 19 Mar 2022 10:44 PM IST
सार

भारत में फ्यूल क्राइसिस के बीच ईरान ने मदद की पेशकश की है। ईरानी राजदूत अली चेगेनी ने शनिवार को रुपया-रियाल व्यापार शुरू करने पर दिया जोर दिया। उन्होंने कहा अगर दोबारा व्यापार शुरू होता है तो इससे दोनों देशों को फायदा होगा।

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Iran Offered to meet India energy needs by relaunching rupee-rial trade for export of oil and gas
क्रूड ऑयल - फोटो : Demo pic

विस्तार

भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ईरान तैयार है। ईरान ने भारत के सामने मदद की पेशकश की है। ईरान के राजदूत अली चेगेनी ने कहा है कि उनका देश तेल और गैस के निर्यात के लिए तैयार है। ईरानी राजदूत के मुताबिक, अगर भारत-और ईरान के बीच रुपया-रियाल व्यापार फिर से शुरू होता हैं, तो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 30 अरब डालर तक पहुंच सकता है।

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राजदूत अली चेगेनी ने ईरान-पाकिस्तान-भारत पाइपलाइन परियोजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ईरान सरकार भारत में प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिए रुकी हुई ईरान-पाकिस्तान-भारत पाइपलाइन परियोजना को पुनर्जीवित करने और उसके वैकल्पिक मार्ग खोजने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने का भी इच्छुक है।
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गौरतलब है कि ईरान से भारत में बडे पैमाने पर तेल की आपूर्ति होती थी, लेकिन जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए तो भारत को भी आयात रोकना पड़ा था। इससे पहले तक ईरान,  भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था। अमेरिका के प्रतिबंधों का असर भारत और ईरान के आर्थिक संबंधों पर बहुत बुरा पड़ा था। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत-ईरान के बीच का व्यापार वित्त वर्ष 2019 में जहां 17 अरब डालर था वो अप्रैल-जनवरी के बीच गिरकर दो अरब ही रह गया है। 
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एमवीआइआरडीसी विश्व व्यापार केंद्र ने ईरान की इस पेशकश को लेकर एक बयान भी जारी किया है। यहां से जारी एक बयान में कहा गया है कि ईरान तेल और गैस के निर्यात के लिए रुपया-रियाल व्यापार शुरू करके भारत की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है। चेगेनी के हवाले से उन्होंने आगे कहा रुपया-रियाल व्यापार तंत्र से दोनों देशों की कंपनियों सीधे सौदा कर सकती है। इसके साथ ही तीसरे पक्ष की मध्यस्थता लागत से भी बचा जा सकता है। 

गौरतलब है कि अमेरिका के प्रतिबंधों से पहले भारत और ईरान के बीच व्यापारिक कार्यों के लिए एक विनिमय तंत्र था, जिसमें भारतीय तेल आयातक एक स्थानीय ईरानी बैंक को रुपये में भुगतान करते थे और इस धन का उपयोग करते हुए ईरान भारत से अन्य चींजे आयात कर रहा था। 


वहीं, ईरान से पहले रूस से भी तेल खरीद में तेजी आई है। भारत की रिफाइनरी कंपनियों ने रूस से रियायती दर पर तेल खरीदने के प्रयास तेज कर दिए है। मीडिया रिपोर्ट के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, दो दिन पहले हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड ने रूस से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। इससे पहले इंडियन आयल कारपोरेशन ने भी रूसी कच्चा तेल खरीदा था। सूत्रों के मुताबिक, इंडियन आयल कारपोरेशन के बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड ने रूसी क्रूड ऑयल खरीदने के लिए यूरोपीय व्यापारी विटोल को माध्यम बनाया है। 

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