ईरान परमाणु डील: वार्ता लंबी खिंचने के कारण ईरान में बढ़ रही है बेसब्री
ईरान के विश्लेषकों का कहना है कि अभी भी कुछ मुद्दों पर ईरान और अमेरिका के बीच मतभेद बना हुआ है। इनमें एक प्रमुख यह है कि क्या ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) को अमेरिका आतंकवादी संगठनों की सूची से हटाएगा। आईआरजीसी ईरान का प्रमुख सुरक्षा बल है...
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परमाणु डील को अंतिम रूप देने में हो रही देर से ईरान में बेसब्री बढ़ रही है। परमाणु डील को पुनर्जीवित करने के लिए दस महीने से भी ज्यादा समय से ईरान की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों और जर्मनी के साथ बातचीत चल रही है। इन पक्षों के बीच परमाणु समझौता 2015 में हुआ था। उसका मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका को उस समझौते से बाहर कर लिया और ईरान पर पहले से भी ज्यादा सख्त प्रतिबंध लगा दिए।
पिछले साल जो बाइडन के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद उस समझौते को पुनर्जीवित करने के लिए ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में वार्ता शुरू हुई थी। लेकिन अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। पिछले महीने बताया गया था कि समझौते की राह में मौजूद सभी मुद्दों को हल कर लिया गया है। तब कहा गया था कि अब सिर्फ समझौते के दस्तावेज की भाषा पर सहमति बनाने का काम बाकी है। लेकिन तब से बात वहीं अटकी हुई है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकी संगठनों की सूची से हटाए अमेरिका
इस बीच रूस की एक मांग से समझौते की राह में एक नया पेंच आ गया था। रूस ने पश्चिमी देशों से यह गारंटी मांगी थी कि उसके ईरान से कारोबारी संबंधों को रूस पर लगाए गए नए प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। बताया जाता है कि इस बारे में पश्चिमी देशों ने रूस को लिखित गारंटी दे दी है। लेकिन ईरानी पर्यवेक्षकों का कहना है कि ऐसी तमाम प्रगति के बावजूद ऐसा नहीं लगता कि बहुत जल्द समझौता हो पाएगा।
ईरान के विश्लेषकों का कहना है कि अभी भी कुछ मुद्दों पर ईरान और अमेरिका के बीच मतभेद बना हुआ है। इनमें एक प्रमुख यह है कि क्या ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) को अमेरिका आतंकवादी संगठनों की सूची से हटाएगा। आईआरजीसी ईरान का प्रमुख सुरक्षा बल है। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि आईआरजीसी का मुद्दा उनके लिए रेड लाइन है। यानी जब तक यह हल नहीं होता, ईरान समझौते पर दस्तखत नहीं कर सकता।
समझौते के खिलाफ बाइडन पर दबाव
उधर बताया जाता है कि ईरान से समझौते के खिलाफ अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन पर दबाव बढ़ गया है। डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों का एक प्रभावशाली समूह आईआरजीसी के मुद्दे पर कोई नरमी बरतने के खिलाफ है। बाइडेन के लिए उनकी अनदेखी करना आसान नहीं है।
इस बीच अमेरिका और ईरान दोनों समझौते में देर के लिए एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैँ। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने बुधवार को अमेरिकी टीवी चैनल एमएसएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में शक जताया कि ये समझौता सचमुच हो पाएगा। उन्होंने कहा- मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि इस मामले को लेकर मैं बहुत आशान्वित नहीं हूं।
मगर थिंक टैंक इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में ईरान प्रोजेक्ट के निदेशक अली वाएज ने उम्मीद जताई है कि आखिरकार समझौता हो जाएगा। टीवी चैनल अल-जजीरा से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि वार्ता अप्रैल के बाद तक खिंचे, ऐसा सोचना मुश्किल लगता है। उन्होंने कहा- ये समझौता इतना बड़ा है कि उसे नाकाम नहीं होने दिया जा सकता। लेकिन ये वार्ता इतने नाजुक मोड़ पर है कि उसे लंबे समय खींचा गया, तो वह दम तोड़ देगी।