Iran Airstrike Pakistan: ईरान की एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान देख रहा चीन की ओर! क्या ड्रैगन करेगा मदद?
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विस्तार
पाकिस्तान के भीतर घुस कर ईरान की सेना ने उग्रवादी समूह जैश-अल-अदल के ठिकानों पर हवाई हमला कर दिया। इस हमले के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। जानकारी के मुताबिक जिस हिस्से में ईरान ने एयर स्ट्राइक की है, वहां पर चीन और पाकिस्तान मिलकर कई प्रोजेक्ट बना रहे हैं। हालांकि इस हमले का सीधा असर इन प्रोजेक्ट पर भी पड़ा है। यही वजह है कि अब पाकिस्तान अपने ऊपर हुए हमले का बदला लेने के लिए चीन की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान भले ही चीन से कितनी उम्मीदें लगाए, लेकिन इस मामले में चीन उसकी बिल्कुल मदद नहीं करने वाला। फिलहाल पाकिस्तान में सेना के रिटायर्ड अधिकारियों से लेकर स्थानीय लोग पाकिस्तान की सेना और सरकार पर सवालिया निशान उठाने लगे हैं।
ईरान की सेना ने मंगलवार को पाकिस्तान में बलोच उग्रवादी समूह जैश अल-अदल के दो प्रमुख ठिकानों पर हवाई हमला किया। इराक और सीरिया में हवाई हमलों के एक दिन बाद ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने पाकिस्तान में घुसकर एयरस्ट्राइक की। ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि बलोच उग्रवादी समूह के दो प्रमुख ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया और उन्हें तबाह कर दिया गया। इस हमले के बाद पाकिस्तान ने ईरान को धमकी देकर बड़े परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। रक्षा मामलों के जानकार ब्रिगेडियर (रि.) दीपक आहूजा कहते हैं कि पाकिस्तान ने धमकी भले दी हो, लेकिन इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने वाला। इसके पीछे वह तर्क देते हुए कहते हैं कि ईरान ने पहले ही पाकिस्तान को कई बार आधिकारिक तौर पर आतंकी संगठनों की बॉर्डर पर सक्रिय होने की सूचना साझा की थी। वह कहते हैं कि जैश-अल-अदल ने हाल में ही ईरान के भीतर 11 पुलिस कर्मियों की एक हमले में हत्या कर जिम्मेदारी ली थी। उसके बाद ईरान लगातार पाकिस्तान पर ऐसे उग्रवादी कैंपों को नष्ट करने का दबाव बना रहा था।
दरअसल हमले के बाद पाकिस्तान के भीतर आवाज उठ रही है कि चीन को भी इस मामले में मदद करनी चाहिए। रक्षा मामलों के जानकार कैप्टन (रि.) सुरेंद्र रंधावा कहते हैं कि यह बात बिल्कुल सच है कि पाकिस्तान इस एयर स्ट्राइक के बाद चीन से ईरान पर कार्रवाई करने के लिए अंदरूनी तौर पर मदद मांगेगा। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों को ध्यान में रखते हुए चीन किसी भी तरह से पाकिस्तान की मदद करने की स्थिति में नहीं है। इसकी वजह बताते हुए उनका कहना है कि दो साल पहले ही चीन और ईरान ने 25 वर्षीय संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा दोनों देशों के बीच बीते एक दशक के दौरान तकरीबन पांच सौ मिलियन डॉलर के व्यापार का समझौता हुआ है, जो कि लगातार अलग-अलग संधियों के माध्यम से बढ़ते जा रहे हैं। वह कहते हैं कि चीन के नेशनल पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन की ओर से ईरान के अलग-अलग हिस्सों में नैचुरल गैस के लिए करार किया है। इसके अलावा चीन का ड्रीम प्रोजेक्ट वन बेल्ट वन रोड भी ईरान से कनेक्ट हो रहा है।
दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर अभिषेक प्रताप सिंह कहते हैं कि चीन के लिए जितना महत्वपूर्ण पाकिस्तान है, उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण ईरान भी है। उनका कहना है कि पाकिस्तान के ऊपर ईरान की हुई एयर स्ट्राइक में चीन बिल्कुल दखल नहीं देने वाला। चीन ने ईरान में अरबों डॉलर का निवेश कर वहां के नैचुरल रिसोर्सेज के साथ-साथ तेल और अन्य संसाधनों में भारी निवेश किया है। जबकि पाकिस्तान में भी चीन ने इसी तरह का निवेश किया है। लेकिन भौगोलिक दृष्टिकोण से चीन के लिए ईरान हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। अभिषेक कहते हैं कि ईरान और अरब देशों की मित्रता में चीन का बड़ा योगदान रहा है। पाकिस्तान के भीतर आवाज उठ रही है कि ईरान के ऊपर बदले की कार्रवाई में चीन किसी तरीके की बड़ी मदद करेगा, ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा है। उनका कहना है कि यह जरूर है कि चीन, ईरान और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता कर इस मामले को सुलझवाने में भले कोई मदद करे, लेकिन पाकिस्तान के ऊपर हुए हमले में बदले की कार्रवाई सेना पाकिस्तान का साथ नहीं देने वाला। उनका कहना है कि चीन हमेशा से अपने फायदे के लिए ही पाकिस्तान का इस्तेमाल करता आया है।
विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान के ऊपर ईरान के इस हमले का असर विदेश से मिलने वाली वित्तीय मदद पर भी पड़ने वाला है। इंटरनेशनल इकॉनमिक फोरम के सदस्य पीके दत्त कहते हैं कि यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान के ऊपर इस तरीके की सर्जिकल स्ट्राइक हुई है। उनका कहना है आईएमएफ जैसी संस्थाएं भी उन्हीं देशों के लिए फंड रिलीज करती हैं, जिनकी छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके बनाए मानकों को पूरा करती हो। दत्त कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकियों के ठिकाने होने और फिर उसके बाद उनके ऊपर किए जाने वाली एयर स्ट्राइक इस बात की तस्दीक करते हैं कि ऐसे मुल्कों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। क्योंकि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले से ही बेहद लचर है। ऊपर से ईरान की और से की गई एयर स्ट्राइक यह बताती है कि आतंकियों को पाकिस्तान पनाह दे रहा है, जिससे उसके देश में अस्थिरता बन रही है। इन दशाओं में आईएमएफ समेत दुनिया की प्रमुख एजेंसी वित्तीय तौर पर मदद करने में हाथ पीछे खींच लेती हैं। इसलिए पाकिस्तान पर हुई एयर स्ट्राइक से उसकी वित्तीय स्थिति भी बिगड़ने वाली है।