फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   iPhone scanning scheme suspicious for privacy violations Company initiative to catch material related to child sexual abuse

आलोचना: निजता हनन को लेकर कटघरे में आईफोन स्कैनिंग योजना, बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पकड़ने को लेकर कंपनी की पहल

Thu, 16 Sep 2021 07:10 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला रिसर्च टीम, वाशिंगटन।
अमर उजाला रिसर्च टीम, वाशिंगटन। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 16 Sep 2021 07:10 AM IST
सार

भले ही एपल ग्राहकों की निजता की रक्षा करने के वादों को पूरा करने में खुद को सक्षम बता रहा है, लेकिन स्कैनिंग योजना से यह बात तो साफ हो गई है कि आईफोन खरीदार अपनी डिवाइस के इकलौते मालिक नहीं हैं। एपल ऐसा पेचीदा स्कैनिंग सिस्टम अपनाने जा रहा है, जिसकी ऑडिट मुश्किल है।

विज्ञापन
iPhone scanning scheme suspicious for privacy violations Company initiative to catch material related to child sexual abuse
एपल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI

विस्तार

दुनिया में दिग्गज टेक कंपनियों की तकनीक और उससे निजता हनन को लेकर लंबे समय से बहस जारी है। इस बीच, अब एपल की बाल यौन शोषण से जुड़ी तस्वीरों को पकड़ने के लिए ग्राहकों के आईफोन स्कैन करने की योजना ने सबका ध्यान खींचा है, जिसे लेकर कंपनी को आलोचना झेलनी पड़ रही है।

विज्ञापन


अमेरिका की टफ्ट्स यूनिवर्सिटी में साइबर सुरक्षा के प्राध्यापक लारिन वेसिंजर का कहना है, वैसे एपल, गूगल, फेसबुक और अन्य टेक कंपनियां अरसे से उनके सर्वरों पर सुरक्षित ग्राहकों की तस्वीरें स्कैन करती रही हैं। भले ही एपल ग्राहकों की निजता की रक्षा करने के वादों को पूरा करने में खुद को सक्षम बता रहा है, लेकिन स्कैनिंग योजना से यह बात तो साफ हो गई है कि आईफोन खरीदार अपनी डिवाइस के इकलौते मालिक नहीं हैं।
विज्ञापन


ऐसा सिस्टम, जिसका ऑडिट मुश्किल
एपल ऐसा पेचीदा स्कैनिंग सिस्टम अपनाने जा रहा है, जिसकी ऑडिट मुश्किल है। लिहाजा, एपल डिवाइसों का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को यह कड़वी हकीकत मान लेनी चाहिए कि निजता को लेकर आपके पास सिर्फ कंपनी पर भरोसा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हालांकि, इस भरोसे की चिंता एपल तक ही सीमित नहीं है। दूसरी दिग्गज टेक कंपनियों का भी ग्राहकों के उपकरणों पर खासा नियंत्रण मौजूद है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बन सकता है हैकर्स का निशाना
एपल के मुताबिक, स्कैनिंग सिस्टम केवल बाल यौन दुर्व्यवहार को प्रतिबिंबित करती सामग्री के लिए ही इस्तेमाल होगा। मसलन, किसी डिवाइस में संदिग्ध सामग्री निश्चित सीमा के पार पाई जाने पर ही उपकरण उसकी समीक्षा करेगा। इस बीच, सुरक्षा शोधकर्ता और नागरिक अधिकार संगठनों ने चेताया है कि एपल की स्कैनिंग व्यवस्था जिस न्यूरलहैश एल्गोरिदम पर आधारित है, वह हैकर्स का निशाना बन सकता है, जो कि कंपनी के दावों के विपरीत है।

अधिनायकवादी देशों में दुरुपयोग का डर
आलोचकों को इस सिस्टम के अन्य सामग्रियों की स्कैनिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने का डर भी है। उनका कहना है, चीन जैसे अधिनायकवादी देश में एपल और अन्य दिग्गज टेक कंपनियां सरकार की मांगों को मानती रही हैं, जिसके चलते ग्राहकों की निगरानी होती रही है। चीन की सभी यूजर्स के डाटा तक पहुंच है।


...साझेदार पर करना होगा भरोसा
सवाल इसे लेकर भी है कि एपल स्कैनिंग सिस्टम को अपने बूते संचालित नहीं कर रहा। अमेरिका में कंपनी की संदिग्ध सामग्री गुमशुदा और शोषित बाल केंद्र से भी साझा करने की योजना है। ऐसे में सिर्फ एपल पर ही भरोसा करना काफी नहीं। एपल डिवाइस यूजर्स को कंपनी के साझेदारों पर भी उतना ही विश्वास करना होगा। जानकारों का कहना है, तकनीक कंपनियां खुद को जिम्मेदार पक्ष के रूप में स्थापित करती हैं पर अतीत देखें तो पारदर्शिता कम ही नजर आएगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed