महिलाओं के सवाल पर पाकिस्तान का नकली चेहरा सामने आया, 'औरत मार्च' का किया विरोध
- महिला दिवस पर होने वाले औरत मार्च के खिलाफ इमरान सरकार का कड़ा रुख
- औरत की आजादी की बात को इस्लाम और पाकिस्तानी संस्कृति के खिलाफ बताया
- सरकार का दावा, सड़कों पर नारे उछालने वाले महिलाओं को गुमराह करते हैं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अपने देश में महिलाओं की आजादी की बात करने वाला पाकिस्तान महिला दिवस के मौके पर होने वाले औरत मार्च को लेकर क्या नजरिया रखता है, यह प्रधानमंत्री इमरान खान की विशेष सहायक और सूचना मंत्री डॉ फिरदौस आशिक अवान के बयान से साफ हो जाता है।
आशिक अवान ने महिलाओं की सुरक्षा और हकों की बड़ी-बड़ी बात करने के साथ ही इशारों-इशारों में 8 मार्च को होने वाले 'औरत मार्च' का विरोध किया है।
उन्होंने एक समारोह में कहा कि सरकार के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण एक सबसे बड़ा मिशन है, लेकिन जो लोग इसके नाम पर सड़कों पर उतर कर महिलाओं के हकों की बात करके उन्हें बरगलाना चाहते हैं, वह सही नहीं है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन में छपी खबर के मुताबिक, अवान ने एक कार्यक्रम में कहा कि जो लोग मीडिया में महिलाओं की आजादी और सशक्तिकरण के नाम पर नारे उछाल रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि महिलाएं सबसे ज्यादा उसी मानसिकता से पीड़ित हैं।
सड़कों पर उतर कर नारे लगाना किसी भी तरह हमारे समाज, धर्म और परिवार के लिए सही नहीं है। आखिर आप किस तरह का अधिकार चाहते हैं? उन्होंने धमकी भरे अंदाज में ये भी कहा कि हमें देखना होगा कि आखिर वो लोग कौन हैं, जो इस मानसिकता को आगे बढ़ा रहे हैं और पूरे देश को और खासकर महिलाओं को गुमराह कर रहे हैं।
अवान ने कहा कि उनके देश का संविधान महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करता है और उन्हें पूरी आजादी देता है। उनकी सरकार की प्राथमिकता भी यही है कि महिलाओं को पूरी आजादी मिले।
गौरतलब है कि पाकिस्तान के एक स्वयंसेवी महिला संगठन ‘हम औरतें’ ने 2018 से औरत मार्च की शुरुआत की थी। यह संगठन हर साल महिला दिवस के मौके पर 8 मार्च को औरत मार्च का आयोजन करती है जिसमें महिलाओं को हर क्षेत्र में आजादी देने और आगे बढ़ाने की बात कही जाती है।
पिछले साल इस रैली के दौरान इस्लामिक मूल्यों का हवाला देते हुए और महिलाओं को भड़काने की बात करते हुए टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी। इसे पाकिस्तानी संस्कृति के खिलाफ बताने वाले गुट ने इसमें खलल डाला था। बाद में सोशल मीडिया पर इस मार्च से जुड़ी खबरें वायरल होती रही थीं।
इस बार भी 8 मार्च को होने वाले 'औरत मार्च' को लेकर सरकार का यह रुख किसी न किसी टकराव का संकेत दे रही है। जाहिर है जो पाकिस्तान भारत में शाहीनबाग या ऐसे आंदोलनों का समर्थन करने की बात करता हो और भारत में मुस्लिम महिलाओं के सड़कों पर उतरने में उसे इस्लाम खतरे में नजर नहीं आता हो, उसका दूसरा और कट्टर चेहरा 'औरत मार्च' के बहाने दुनिया के सामने है।