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IMO London: अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर बड़ी सफलता; भारत के पक्ष में अब तक का सबसे अधिक वोट, जानिए असर
Mon, 04 Dec 2023 07:25 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 04 Dec 2023 07:25 PM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार से जुड़े संगठन- IMO की काउंसिल में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। भारत के समर्थन में अब तक का सबसे अधिक वोट डाला गया है। लंदन में आयोजित 33वीं बैठक में भारत को दो साल के चुना गया है।
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अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन
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विस्तार
'अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में सबसे बड़े हित' पर फैसले लेने के लिए भारत दो साल के लिए चुना गया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) की परिषद में भारत को 2024-2025 के लिए चुना गया। रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अब तक का सबसे बड़ा समर्थन मिला है। भारत के अलावा कई और देश भी अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार की श्रेणी में चुने गए हैं।
भारत के अलावा कई और बड़े देशों को भी चुना गया
दो साल के कार्यकाल के लिए चुने गए भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, स्पेन, स्वीडन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को भी 'अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में सबसे बड़े हित' की श्रेणी के तहत चुना गया। असेंबली में सभी देश समुद्री व्यापार के अलग-अलग पहलुओं पर मंथन करते हैं। जरूरत पड़ने पर असेंबली नियम और शर्त भी बनाती है।
असेंबली लंदन में छह दिसंबर तक होगी
बता दें कि आईएमओ की 33वीं असेंबली लंदन में आयोजित हुई। 27 नवंबर से 6 दिसंबर, 2023 तक लंदन स्थित आईएमओ मुख्यालय में हो रहे आयोजन में कई बड़े देश शामिल हो रहे हैं। सभी 175 सदस्य देश और तीन एसोसिएट सदस्य असेंबली में भाग लेने के हकदार हैं। यह असेंबली अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) की सर्वोच्च शासी निकाय है।
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IMO में चुने जाने पर भारत सरकार का बयान
भारत के चुने जाने पर केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने खुशी जताई। उन्होंने कहा, यह भारत के सभी समुद्री क्षेत्र के लिए अद्भुत खबर है। उन्होंने कहा कि दुनिया की शीर्ष समुद्री ताकतों में शामिल होने की दिशा में भारत के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को दुनिया भर से अपार राजनयिक लाभ मिला है।
अभूतपूर्व समर्थन के पीछे 'वसुधैव कुटुंबकम' की भूमिका
उन्होंने कहा कि दुनिया के शीर्ष समुद्री निकाय में भारत के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के हमारे प्रयास को दुनिया भर से समर्थन मिला है। उन्होंने भारत के समर्थन के पीछे पीएम मोदी की तरफ से दोहराए जाने वाले सिद्धांत- 'वसुधैव कुटुंबकम' की भूमिका का भी जिक्र किया। सोनोवाल ने कहा, ''हम भारत के पक्ष में अभूतपूर्व समर्थन से अभिभूत हैं।''
भारत की समुद्री उपस्थिति को मजबूत करने के प्रयास
बता दें कि अमृत काल विजन 2047 (Amrit Kaal Vision 2047) के तहत भारत की वैश्विक समुद्री उपस्थिति को मजबूत करने के प्रयास भी किए जाने हैं। इसके लिए भी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। अमृत काल विजन 2047 एक्शन प्लान के हिस्से के रूप में 43 पहलुओं की पहचान की गई है। इनमें से प्रमुख पहल देश की वैश्विक समुद्री उपस्थिति को मजबूत करने पर केंद्रित हैं। इसके तहत भारत में समर्पित IMO सेल बनाया जाना है। सरकार के अनुसार, भारत बिम्सटेक मास्टर प्लान के कार्यान्वयन, समयबद्ध तरीके से क्षेत्रीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए मजबूत बिम्सटेक संस्थागत संरचना बनाने की भी सोच रखता है।
2030 मैरिटाइम इंडिया विजन भी काफी अहम
इसी के तहत जनवरी, 2022 में देश में पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों- ग्रीन पोर्ट और ग्रीन शिपिंग का विकास करने के लिए सरकार ने 2030 मैरिटाइम इंडिया विजन (MIV 2030) जारी किया था। इसके तहत, IMO में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए भारत ने कई लक्ष्य तय किए हैं। इनमें IMO लंदन में स्थायी प्रतिनिधियों की नियुक्ति भी शामिल है। समुद्री विशेषज्ञता बढ़ाने की दृष्टि से भारत के लिए यह काफी अहम माना जा रहा है। एमआईवी के तहत यह प्रस्तावित है कि भारत आईएमओ में जूनियर प्रोफेशनल ऑफिसर (जेपीओ) कार्यक्रम के लिए कम से कम दो योग्य उम्मीदवारों को नामांकित करेगा।
IMO, काउंसिल और असेंबली क्या करती है?
बता दें कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) दुनियाभर में समुद्री उद्योग को नियंत्रित करने वाली संस्था है। इसके दायरे में वैश्विक व्यापार, परिवहन और सभी समुद्री संचालन आते हैं। IMO काउंसिल इसका कार्यकारी अंग है। काउंसिल संगठन के काम की निगरानी के लिए जवाबदेह है। असेंबली के सत्रों के बीच, परिषद समुद्री सुरक्षा और प्रदूषण की रोकथाम की निगरानी भी करती है। IMO की असेंबली जरूरत समझने पर अलग-अलग देश की सरकारों को सिफारिशें भी भेजती है। नवनिर्वाचित परिषद, 33वीं असेंबली के समापन के बाद पहली बैठक करेगी। 131वें सत्र (7 दिसंबर को) के लिए होने वाली बैठक में अगले दो साल के लिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होगा।
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भारत के अलावा कई और बड़े देशों को भी चुना गया
दो साल के कार्यकाल के लिए चुने गए भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, स्पेन, स्वीडन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को भी 'अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में सबसे बड़े हित' की श्रेणी के तहत चुना गया। असेंबली में सभी देश समुद्री व्यापार के अलग-अलग पहलुओं पर मंथन करते हैं। जरूरत पड़ने पर असेंबली नियम और शर्त भी बनाती है।
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असेंबली लंदन में छह दिसंबर तक होगी
बता दें कि आईएमओ की 33वीं असेंबली लंदन में आयोजित हुई। 27 नवंबर से 6 दिसंबर, 2023 तक लंदन स्थित आईएमओ मुख्यालय में हो रहे आयोजन में कई बड़े देश शामिल हो रहे हैं। सभी 175 सदस्य देश और तीन एसोसिएट सदस्य असेंबली में भाग लेने के हकदार हैं। यह असेंबली अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) की सर्वोच्च शासी निकाय है।
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IMO में चुने जाने पर भारत सरकार का बयान
भारत के चुने जाने पर केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने खुशी जताई। उन्होंने कहा, यह भारत के सभी समुद्री क्षेत्र के लिए अद्भुत खबर है। उन्होंने कहा कि दुनिया की शीर्ष समुद्री ताकतों में शामिल होने की दिशा में भारत के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को दुनिया भर से अपार राजनयिक लाभ मिला है।
अभूतपूर्व समर्थन के पीछे 'वसुधैव कुटुंबकम' की भूमिका
उन्होंने कहा कि दुनिया के शीर्ष समुद्री निकाय में भारत के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के हमारे प्रयास को दुनिया भर से समर्थन मिला है। उन्होंने भारत के समर्थन के पीछे पीएम मोदी की तरफ से दोहराए जाने वाले सिद्धांत- 'वसुधैव कुटुंबकम' की भूमिका का भी जिक्र किया। सोनोवाल ने कहा, ''हम भारत के पक्ष में अभूतपूर्व समर्थन से अभिभूत हैं।''
भारत की समुद्री उपस्थिति को मजबूत करने के प्रयास
बता दें कि अमृत काल विजन 2047 (Amrit Kaal Vision 2047) के तहत भारत की वैश्विक समुद्री उपस्थिति को मजबूत करने के प्रयास भी किए जाने हैं। इसके लिए भी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। अमृत काल विजन 2047 एक्शन प्लान के हिस्से के रूप में 43 पहलुओं की पहचान की गई है। इनमें से प्रमुख पहल देश की वैश्विक समुद्री उपस्थिति को मजबूत करने पर केंद्रित हैं। इसके तहत भारत में समर्पित IMO सेल बनाया जाना है। सरकार के अनुसार, भारत बिम्सटेक मास्टर प्लान के कार्यान्वयन, समयबद्ध तरीके से क्षेत्रीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए मजबूत बिम्सटेक संस्थागत संरचना बनाने की भी सोच रखता है।
2030 मैरिटाइम इंडिया विजन भी काफी अहम
इसी के तहत जनवरी, 2022 में देश में पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों- ग्रीन पोर्ट और ग्रीन शिपिंग का विकास करने के लिए सरकार ने 2030 मैरिटाइम इंडिया विजन (MIV 2030) जारी किया था। इसके तहत, IMO में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए भारत ने कई लक्ष्य तय किए हैं। इनमें IMO लंदन में स्थायी प्रतिनिधियों की नियुक्ति भी शामिल है। समुद्री विशेषज्ञता बढ़ाने की दृष्टि से भारत के लिए यह काफी अहम माना जा रहा है। एमआईवी के तहत यह प्रस्तावित है कि भारत आईएमओ में जूनियर प्रोफेशनल ऑफिसर (जेपीओ) कार्यक्रम के लिए कम से कम दो योग्य उम्मीदवारों को नामांकित करेगा।
IMO, काउंसिल और असेंबली क्या करती है?
बता दें कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) दुनियाभर में समुद्री उद्योग को नियंत्रित करने वाली संस्था है। इसके दायरे में वैश्विक व्यापार, परिवहन और सभी समुद्री संचालन आते हैं। IMO काउंसिल इसका कार्यकारी अंग है। काउंसिल संगठन के काम की निगरानी के लिए जवाबदेह है। असेंबली के सत्रों के बीच, परिषद समुद्री सुरक्षा और प्रदूषण की रोकथाम की निगरानी भी करती है। IMO की असेंबली जरूरत समझने पर अलग-अलग देश की सरकारों को सिफारिशें भी भेजती है। नवनिर्वाचित परिषद, 33वीं असेंबली के समापन के बाद पहली बैठक करेगी। 131वें सत्र (7 दिसंबर को) के लिए होने वाली बैठक में अगले दो साल के लिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होगा।