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आसियान में 8 करोड़ नौकरियों पर AI का असर: अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा- कौशल विकास पर निवेश बढ़ाने की जरूरत
Thu, 09 Jul 2026 05:15 AM IST
अमन तिवारी
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 09 Jul 2026 05:15 AM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया में करीब 8 करोड़ नौकरियां जेनरेटिव एआई के प्रभाव के दायरे में हैं। हालांकि एआई फिलहाल रोजगार खत्म करने के बजाय काम करने के तरीके में बदलाव ला रहा है। रिपोर्ट में महिलाओं और कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
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एआई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जेनरेटिव एआई दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रम बाजार में तेजी से मौजूदगी दर्ज करा रहा है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार आसियान क्षेत्र में करीब 8 करोड़ लोग ऐसे व्यवसायों में कार्यरत हैं जिनके कामकाज पर एआई का असर पड़ सकता है। हालांकि संगठन का आकलन है कि अभी यह तकनीक बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म करने के बजाय काम का तरीका बदल रही है।
जेनरेटिव एआई एंड लेबर मार्केट्स इन आसियान नामक इस रिपोर्ट में 11 देशों के श्रम बाजार का विश्लेषण है। रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र के कुल रोजगार के 22.9% हिस्से पर जेनरेटिव एआई का असर पड़ सकता है। यह संख्या 8 करोड़ लोगों के बराबर है। इनमें भी करीब 1.17 करोड़ नौकरियों में बड़े बदलाव की संभावना सबसे अधिक है।
महिलाओं के सामने चुनौती
रिपोर्ट में एआई के प्रभाव का लैंगिक पहलू भी दिखा। इसके अनुसार महिलाओं के उन व्यवसायों में कार्यरत होने की संभावना पुरुषों की तुलना में दोगुने से अधिक है जहां जेनरेटिव एआई का असर अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है। वहीं, 15 से 24 वर्ष के कर्मियों के बीच एआई के संभावित प्रभाव में खास अंतर नहीं मिला। यानी महिलाओं के सामने चुनौती भी होगी।
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देशों की तैयारी में अंतर
रिपोर्ट के अनुसार एआई को अपनाने की क्षमता सभी सदस्य देशों में समान नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों वाले देशों में सिंगापुर सबसे आगे है, जहां 42.2 फीसदी रोजगार ऐसे क्षेत्रों में हैं जो जेनरेटिव एआई से प्रभावित हो सकते हैं। इसके बाद फिलीपींस 28.1, इंडोनेशिया 21.7, वियतनाम 20.8 व थाईलैंड 20.6 फीसदी का स्थान है। आईएलओ का कहना है कि सिंगापुर की बढ़त उसके विकसित डिजिटल ढांचे, प्रशिक्षित कार्यबल व सरकार की दीर्घकालिक एआई रणनीति का परिणाम है।
ये भी पढ़ें: 'सिर्फ एक बुरा दौर': ट्रंप का नाटो देश के नेताओं पर बड़ा दावा, ईरान पर हमले में साथ न देने पर क्या बोले?
मानव-केंद्रित नीतियों पर जोर
आईएलओ का मानना है कि एआई से उत्पादकता और आर्थिक विकास का लाभ तभी व्यापक होगा, जब सरकारें तकनीकी निवेश के साथ-साथ कौशल विकास, पुनर्प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने पर भी समान प्राथमिकता दें। रिपोर्ट में विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को इस बदलाव के अनुरूप तैयार करने की जरूरत बताई गई है। साथ ही मानव केंद्रित नीतियों पर जोर दिया गया।
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जेनरेटिव एआई एंड लेबर मार्केट्स इन आसियान नामक इस रिपोर्ट में 11 देशों के श्रम बाजार का विश्लेषण है। रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र के कुल रोजगार के 22.9% हिस्से पर जेनरेटिव एआई का असर पड़ सकता है। यह संख्या 8 करोड़ लोगों के बराबर है। इनमें भी करीब 1.17 करोड़ नौकरियों में बड़े बदलाव की संभावना सबसे अधिक है।
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महिलाओं के सामने चुनौती
रिपोर्ट में एआई के प्रभाव का लैंगिक पहलू भी दिखा। इसके अनुसार महिलाओं के उन व्यवसायों में कार्यरत होने की संभावना पुरुषों की तुलना में दोगुने से अधिक है जहां जेनरेटिव एआई का असर अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है। वहीं, 15 से 24 वर्ष के कर्मियों के बीच एआई के संभावित प्रभाव में खास अंतर नहीं मिला। यानी महिलाओं के सामने चुनौती भी होगी।
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देशों की तैयारी में अंतर
रिपोर्ट के अनुसार एआई को अपनाने की क्षमता सभी सदस्य देशों में समान नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों वाले देशों में सिंगापुर सबसे आगे है, जहां 42.2 फीसदी रोजगार ऐसे क्षेत्रों में हैं जो जेनरेटिव एआई से प्रभावित हो सकते हैं। इसके बाद फिलीपींस 28.1, इंडोनेशिया 21.7, वियतनाम 20.8 व थाईलैंड 20.6 फीसदी का स्थान है। आईएलओ का कहना है कि सिंगापुर की बढ़त उसके विकसित डिजिटल ढांचे, प्रशिक्षित कार्यबल व सरकार की दीर्घकालिक एआई रणनीति का परिणाम है।
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मानव-केंद्रित नीतियों पर जोर
आईएलओ का मानना है कि एआई से उत्पादकता और आर्थिक विकास का लाभ तभी व्यापक होगा, जब सरकारें तकनीकी निवेश के साथ-साथ कौशल विकास, पुनर्प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने पर भी समान प्राथमिकता दें। रिपोर्ट में विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को इस बदलाव के अनुरूप तैयार करने की जरूरत बताई गई है। साथ ही मानव केंद्रित नीतियों पर जोर दिया गया।